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हाल में कूनो नेशनल पार्क में एक बाघ ने 5 शावकों को जन्म दिया. प्रोजेक्ट चीता के तहत हुए इन शावकों के आधार पर मध्य प्रदेश सरकार ने खुशी जताई. अब वाइल्ड लाइफ टूरिज्म को और बढ़ावा देने की प्लानिंग कर रही है. भोपाल में चल रहे एमपी ट्रैवल मार्ट 2026 में चंबल में डॉल्फिन और गांधी सागर में गिद्धों के संरक्षण और इनकी सफारी की प्लानिंग की बात की गई, जैसे जंगल सफारी होती है.
चंबल में डॉल्फिन सफारी और गांधी सागर में गिद्ध वॉकिंग सफारी होगी.
भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट-2026 चल रहा है. कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में चल रहे एमपी ट्रैवल का कल यानी 8 सितंबर को दूसरा दिन था. इस दौरान ‘भारत के जंगलों के जीवंत परिदृष्यः मध्य प्रदेश में वन्यजीव, समुदाय और टिकाऊ पर्यटन’ टॉपिक पर चर्चा हुई. इस चर्चा में मध्य प्रदेश के सस्टेनेबल और संरक्षण-केंद्रित टूरिज्म मॉडल को खास विषय के तौर पर पेश किया गया. चर्चा में कूनो में जन्म 5 शावक की भी चर्चा हुई. इसी तर्ज वाइल्डलाइफ टूरिज्म के तहत डॉल्फिन और गिद्द संरक्षण की बात भी कही गई.
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, केंद्रीय पर्यटन सचिव भुवनेश कुमार ने कहा कि वाइल्डलाइफ टूरिज्म को सिर्फ टूरिस्ट की गिनती या जंगल सफारी तक तक सीमित नहीं रहना है. इससे आगे बढ़ना है. इसे स्थानीय समुदायों को मिलने वाले फ़ायदों और प्राकृतिक इकोसिस्टम के संरक्षण से मापा जाना चाहिए. उन्होंने ज़ोर दिया कि स्थानीय निवासियों को हॉस्पिटैलिटी, बातचीत, गाइडिंग और पर्यटन से जुड़ी अन्य सेवाओं में ट्रेनिंग दी जानी चाहिए. राज्य ने वन प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें कूनो में महत्वाकांक्षी चीता संरक्षण कार्यक्रम एक शानदार उदाहरण के तौर पर उभरा है. पिछले हफ़्ते रविवार को कूनो में पांच और शावकों का जन्म चीता पुनर्वास कार्यक्रम में एक और अहम उपलब्धि थी.
पूर्णिमा की रात गिद्ध वॉकिंग सफारी
पैनल ने पूरे मध्य प्रदेश में वन्यजीव पर्यटन में विविधता लाने के मौकों पर प्रकाश डाला. इनमें चंबल में डॉल्फ़िन देखना, गांधी सागर क्षेत्र की जैव-विविधता को जानना, गिद्ध संरक्षण गतिविधियां और गिद्धों के प्रजनन स्थलों के पास पूर्णिमा की रात नाव की सवारी शामिल हैं. पैनल के सदस्यों की राय थी कि ऐसे अनुभव पर्यटकों को केवल अलग-अलग जानवरों को देखने के बजाय इकोसिस्टम को समझने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं.
मध्य प्रदेश में 12000 गिद्ध
फ्री प्रेस जर्नल के मुताबिक, पन्ना, रीवा, शिवपुरी, ओरछा और गांधी सागर में ‘वल्चर वॉकिंग सफारी’ शुरू करेगा. इस सफारी के दौरान 12000 हजार गिद्ध दिखेंगे. वल्चर एक्शन प्लान के तहत संरक्षण मिलने से गिद्धों की यह संख्या सबसे ज्यादा है. इस इको-टूरिज्म पहल में गाइडेड ट्रेक, स्थानीय गांवों के गाइड और होमस्टे शामिल होंगे.
मध्य प्रदेश में हो रहा वाइल्डलाइफ टूरिज्म का विस्तार
मध्य प्रदेश इको-टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड के CEO एल. कृष्णमूर्ति ने कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा, प्रशिक्षित गाइड और ड्राइवर की व्यवस्था और सामुदायिक भागीदारी इस क्षेत्र के भविष्य के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण हैं. वन्यजीव पर्यटन का विस्तार कान्हा जैसे स्थापित स्थलों से आगे बढ़कर रातापानी, सतपुड़ा, संजय और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व जैसे क्षेत्रों तक किया जा रहा है. मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर और टूरिज्म सेक्रेटरी इलैयाराजा टी ने कहा कि राज्य की प्राथमिकता प्राकृतिक संसाधनों को बचाते हुए रोज़गार और आजीविका के मौके पैदा करना है. रतापानी और चंबल इलाके जैसी उभरती जगहों पर संरक्षण से जुड़े टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा.