घर में बार-बार हो रहा है कलह? सर्वपितृ अमावस्या पर दक्षिण दिशा में करें ये काम
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सर्वपितृ अमावस्या पर दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक जलाएं. इससे पितृ दोष और गृह कलह दूर होता है. इस दिन पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध जरूर करें. गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन कराएं. सामर्थ्य अनुसार दान करने से पितरों की कृपा और सुख-शांति मिलती है.
देवघरः श्राद्ध पक्ष अब समाप्त होने वाला है और इसके साथ ही पितरों को समर्पित आखिरी तिथि सर्वपितृ अमावस्या आने वाली है. आश्विन महीने की अमावस्या तिथि को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जा सकता है, जिनकी श्राद्ध तिथि किसी कारण से याद नहीं है या जिनका श्राद्ध नहीं हो पाया है. इस दिन लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए कई तरह के धार्मिक कार्य करते हैं.अगर आप भी सर्वपितृ अमावस्या पर अपने पितरों का श्राद्ध कर रहे हैं, तो सिर्फ श्राद्ध करने के साथ कुछ सत्कर्म और छोटे-छोटे उपाय भी कर सकते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इन कार्यों से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य?
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुद्गल ने लोकल 18 को बताया कि इस साल सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी. इसके अगले दिन यानी 11 अक्टूबर से देवी पक्ष यानी शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो जाएगी. ऐसे में सर्वपितृ अमावस्या पितरों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद लेने का अंतिम अवसर माना जा रहा है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार कई बार घर में बिना किसी बड़ी वजह के बार-बार विवाद होता रहता है. परिवार के लोग मेहनत करते हैं, तरक्की भी होती है, लेकिन इसके बावजूद घर का माहौल अशांत रहता है. ऐसी स्थिति को ज्योतिष में पितृ दोष से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, हर पारिवारिक परेशानी का कारण पितृ दोष ही हो, यह जरूरी नहीं है, लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों के निमित्त किए गए कर्मों से मानसिक शांति और परिवार में सकारात्मक माहौल बनाने की कामना की जाती है.
इस दिन पितृ के नाम से तर्पण-श्राद्ध अवश्य करें
पंडित मुद्गल बताते हैं कि सर्वपितृ अमावस्या के दिन सबसे पहले अपने पितरों के नाम से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जरूर करना चाहिए. अगर विधि-विधान से श्राद्ध कर रहे हैं तो पितरों को याद करके श्रद्धा से उनका तर्पण करें. इसके बाद गाय, कौवा और कुत्ते के लिए भोजन निकालकर उन्हें खिलाना भी शुभ माना जाता है. इसके पीछे धार्मिक मान्यता है कि पितरों के निमित्त निकाला गया भोजन इन जीवों को खिलाने से पितरों तक उसका पुण्य पहुंचता है. इसके बाद ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं और अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र या जरूरत की दूसरी सामग्री का दान करें. ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस दिन दिखावे से ज्यादा जरूरी श्रद्धा है, इसलिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही दान-पुण्य करना चाहिए.
दक्षिण दिशा में करें यह कार्य
इसके अलावा सर्वपितृ अमावस्या की शाम को एक खास उपाय भी किया जा सकता है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार शाम के समय घर के बाहर या पूजा स्थान पर दक्षिण दिशा की ओर तिल के तेल का दीपक जलाएं. धार्मिक मान्यता में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है. इसलिए इस दिन दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर अपने पितरों को याद करने और उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना करने की परंपरा है. मान्यता है कि श्रद्धा से किए गए इन कार्यों से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-शांति व समृद्धि बनी रहने की कामना की जाती है. सर्वपितृ अमावस्या का उद्देश्य केवल कर्मकांड करना नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों को याद करना, उनके प्रति सम्मान जताना और जरूरतमंदों की मदद करना भी है.