Durga Puja: मिट्टी में जान फूंकते ये कलाकार, बिलासपुर में 41 साल से बना रहे मां दुर्गा की मूर्तियां

Durga Puja: मिट्टी में जान फूंकते ये कलाकार, बिलासपुर में 41 साल से बना रहे मां दुर्गा की मूर्तियां


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Bilaspur News: मूर्तिकार शीतल पाल ने लोकल 18 से कहा कि उनके बड़े भाई राम प्रसाद पाल पिछले 41 वर्षों से बिलासपुर में मूर्ति निर्माण के काम से जुड़े हुए हैं. वह खुद करीब 21 साल से पुराने लॉ कॉलेज, मिशन हॉस्पिटल रोड स्थित अपने कारखाने ‘मां दक्षिणी स्त्री शिल्पाय’ में प्रतिमाएं बना रहे हैं.

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बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नवरात्रि की तैयारियां तेज हो गई हैं. गणेश उत्सव के बाद अब शहर में मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है. खास बात यह है कि बंगाल से आए पाल परिवार के मूर्तिकार पिछले 41 सालों से बिलासपुर में मां दुर्गा की प्रतिमाएं बना रहे हैं. कभी हजार-दो हजार रुपये में बिकने वाली मूर्तियां अब बढ़ती लागत और बदलती मांग के साथ 80 हजार रुपये तक पहुंच गई हैं. इस काम से सिर्फ एक परिवार की रोजी-रोटी नहीं चलती बल्कि करीब 15 कारीगरों समेत कई परिवारों का रोजगार भी जुड़ा हुआ है. इस बार मूर्तिकारों ने करीब 100 प्रतिमाएं तैयार की हैं, जिनमें से 97 की बुकिंग हो चुकी है.

मूर्तिकार शीतल पाल लोकल 18 को बताते हैं कि उनके बड़े भाई राम प्रसाद पाल पिछले 41 सालों से बिलासपुर में मूर्ति निर्माण के काम से जुड़े हैं. वह खुद करीब 21 साल से पुराना लॉ कॉलेज, मिशन हॉस्पिटल रोड स्थित अपने कारखाने ‘मां दक्षिणी स्त्री शिल्पाय’ में मूर्तियां बना रहे हैं. उनका कहना है कि बिलासपुर में बंगाल से आकर मूर्ति निर्माण करने वाले शुरुआती कारीगरों में उनके बड़े भाई का नाम प्रमुख है. पहले शहर में दुर्गा पूजा के लिए गिनी-चुनी प्रतिमाएं ही बनती थीं लेकिन अब जगह-जगह भव्य दुर्गा पूजा समितियां बन रही हैं.

वर्तमान में बदल गई स्थिति
शीतल पाल के मुताबिक, करीब चार दशक पहले बिलासपुर शहर में दुर्गा पूजा का आयोजन सीमित संख्या में होता था. उस समय एक-दो या अधिकतम तीन-चार जगहों पर ही मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाती थीं. आज स्थिति पूरी तरह बदल गई है और शहर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दुर्गा पूजा का आयोजन होता है. इसी के साथ प्रतिमाओं की मांग भी लगातार बढ़ी है.

1000 रुपये से शुरू हुए थे दाम
मूर्तिकार बताते हैं कि जब उन्होंने करीब 41 साल पहले यह काम शुरू किया था, तब दुर्गा प्रतिमाओं की कीमत लगभग 1000 रुपये से 1200 रुपये तक हुआ करती थी. अब मिट्टी, रंग, सजावट, कपड़े, आभूषण और अन्य सामग्री की कीमत बढ़ने के साथ प्रतिमाओं की लागत भी काफी बढ़ गई है. इस बार उनके यहां 10 हजार रुपये से शुरू होकर करीब 80 हजार रुपये तक की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं. शीतल पाल बताते हैं कि उन्होंने महज 16 साल की उम्र में मूर्ति बनाना शुरू किया था और अब तक सैकड़ों प्रतिमाएं अपने हाथों से तैयार कर चुके हैं.

15 कारीगर तैयार कर रहे मूर्तियां
पहले कम कारीगरों के साथ ही पूरा काम हो जाता था लेकिन अब प्रतिमाओं की मांग बढ़ने के कारण उनके कारखाने में करीब 15 कारीगर काम कर रहे हैं. शीतल पाल के अनुसार, उनके दो भाइयों के अलावा कई अन्य कारीगर भी इस काम से जुड़े हैं, यानी नवरात्रि के लिए तैयार हो रही इन प्रतिमाओं के साथ कई परिवारों की रोजी-रोटी भी जुड़ी हुई है.

AI तस्वीर देख मूर्ति बनाना नई चुनौती
इस बार मूर्तिकारों के सामने एक नई चुनौती भी आई है. शीतल पाल आगे बताते हैं कि ग्राहक अब मोबाइल और AI की मदद से अलग-अलग डिजाइन और चेहरे तैयार कराकर उनके पास पहुंच रहे हैं और उसी तरह की प्रतिमा बनाने की मांग करते हैं. उनका कहना है कि AI की तस्वीर को हूबहू मूर्ति में उतारना आसान नहीं है और इसमें पहले की तुलना में काफी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. उनका अनुमान है कि अगर 80 हजार रुपये की मूर्ति है, तो AI से मिले जटिल डिजाइन के हिसाब से उसे तैयार करने में करीब 1 लाख 10 हजार रुपये तक की लागत और मेहनत लग सकती है.

100 प्रतिमाएं तैयार, 97 की बुकिंग पूरी
इस बार पाल परिवार ने मां दुर्गा की करीब 100 प्रतिमाएं तैयार की हैं. इनमें से 97 प्रतिमाओं की बुकिंग हो चुकी है जबकि शेष प्रतिमाएं अभी बिक्री के लिए बची हुई हैं. मूर्तिकारों को उम्मीद है कि नवरात्रि शुरू होने से पहले बाकी प्रतिमाएं भी बिक जाएंगी. वहीं गणेश उत्सव में कुछ प्रतिमाएं नहीं बिक पाने से नुकसान भी हुआ था लेकिन इस बार मां दुर्गा की प्रतिमाओं की बिक्री को लेकर उन्हें काफी उम्मीद है.



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