upsc success story, IAS Priya Rani Sasaram SDM: सासाराम की एसडीएम प्रिया रानी इन दिनों अपने काम करने के अंदाज को लेकर चर्चा में हैं. कभी वह सड़क पर उतरकर कानून-व्यवस्था का जायजा लेती नजर आती हैं तो कभी अचानक किसी स्कूल या सरकारी व्यवस्था का निरीक्षण करने पहुंच जाती हैं. उनकी सक्रियता से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहे हैं लेकिन सासाराम में एक्शन मोड में नजर आने वाली इस युवा आईएएस अधिकारी की कहानी सिर्फ उनकी मौजूदा पोस्टिंग तक सीमित नहीं है. इसके पीछे यूपीएससी के चार प्रयास, एक कॉरपोरेट नौकरी छोड़ने का फैसला, आईडीईएस में चयन और फिर उसी के बाद आईएएस बनने की जिद की लंबी कहानी है.
प्रिया रानी का एक इंटरव्यू भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वह अपने यूपीएससी सफर को काफी सहज और मजाकिया अंदाज में बताती नजर आती हैं. वह तैयारी के दौरान रोज अखबार पढ़ने और परीक्षा की तैयारी में पूरी तरह जुटे रहने की बात करती हैं. इसी बातचीत में वह हंसते हुए यह भी कहती हैं कि जब इतनी तैयारी के बाद भी परीक्षा क्लियर नहीं हो रही थी तो उन्हें लगने लगा था कि कहीं उनकी जिंदगी ही खराब तो नहीं हो रही. वह मजाकिया अंदाज में कहती हैं कि उन्होंने इस परीक्षा को काफी कुछ सुना दिया था लेकिन जिस परीक्षा को लेकर वह मजाक में इतनी बातें कहती हैं, उसी परीक्षा ने आखिरकार उन्हें देश की प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा तक पहुंचाया. यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन 2023 में प्रिया रानी ने ऑल इंडिया 69वीं रैंक हासिल की और 2024 बैच की आईएएस अधिकारी बनीं.
किसान परिवार से निकलीं
प्रिया रानी की पृष्ठभूमि भी उनकी कहानी को खास बनाती है. वह बिहार के पटना क्षेत्र के कुरकुरी गांव से आती हैं और किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता किसान हैं जबकि मां गृहिणी हैं. परिवार ने उनकी पढ़ाई को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया.गांव से निकलकर उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए पटना का रुख किया. इसके बाद उन्होंने रांची के बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी बीआईटी मेसरा से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक किया यानी उनकी पढ़ाई का बैकग्राउंड पूरी तरह इंजीनियरिंग का था. इसके बाद उनके सामने एक अच्छी कॉरपोरेट नौकरी का रास्ता खुला और उन्होंने बेंगलुरु में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम भी किया.
बेंगलुरु की नौकरी छोड़कर दिल्ली क्यों पहुंचीं?
इंजीनियरिंग के बाद प्रिया रानी ने बेंगलुरु में कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी शुरू की. अच्छी नौकरी और स्थिर करियर के बावजूद उनके मन में सिविल सर्विस में जाने की इच्छा बनी रही. आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़ने का बड़ा फैसला लिया और 2019 में दिल्ली आकर यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया है कि वह 2019 में बेंगलुरु की नौकरी छोड़कर दिल्ली आई थीं. यह फैसला आसान नहीं था. एक तरफ उनके पास इंजीनियरिंग की डिग्री और अच्छी कॉरपोरेट नौकरी थी, वहीं दूसरी तरफ यूपीएससी जैसी परीक्षा थी जिसमें सफलता की कोई गारंटी नहीं होती. इसके बावजूद उन्होंने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया और तैयारी में जुट गईं.
upsc success story, ias story, Priya Rani IAS: आईएएस प्रिया रानी का इंटरव्यू वायरल हो रहा है. ( photo: sasaramtimess)
रोज अखबार पढ़ने से लेकर लगातार तैयारी तक
प्रिया रानी की तैयारी की कहानी में एक बात बार-बार सामने आती है-सिर्फ पढ़ना नहीं, बल्कि अपनी कमियों को पहचानकर रणनीति बदलना.उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान अखबार और करेंट अफेयर्स पर खास ध्यान दिया. उनका मानना रहा कि यूपीएससी के लिए सिर्फ किताबें पढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि देश-दुनिया में क्या हो रहा है, उसे समझना भी जरूरी है.यही वजह है कि सोशल मीडिया पर वायरल उनके इंटरव्यू में जब वह अपनी तैयारी के दिनों की बात करती हैं तो रोज अखबार पढ़ने का जिक्र भी करती हैं. उनकी बातों का अंदाज भले ही मजाकिया हो, लेकिन पीछे की कहानी लगातार मेहनत और लंबे समय तक तैयारी की है.
पहला प्रयास सफल नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी
यूपीएससी का सफर प्रिया रानी के लिए पहली कोशिश में आसान नहीं रहा. वह पहले प्रयास में मेन्स परीक्षा तक भी नहीं पहुंच पाईं.इसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया और दोबारा तैयारी की. उनके यूपीएससी सफर पर उपलब्ध साक्षात्कारों के मुताबिक उन्होंने अपने वैकल्पिक विषय यानी इकोनॉमिक्स में भी अपनी कमियों पर काम किया और नोट्स तथा उत्तर लेखन की रणनीति बदली. उनका सफर यहीं नहीं रुका. उन्होंने परीक्षा के हर प्रयास से कुछ न कुछ सीखा और अगली कोशिश में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश की.
दूसरे प्रयास में AIR 284, मिली IDES सेवा
प्रिया रानी की मेहनत का पहला बड़ा नतीजा यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन 2021 में सामने आया. उन्होंने इस परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 284 हासिल की.इस रैंक के आधार पर उनका चयन इंडियन डिफेंस एस्टेट्स सर्विस यानी IDES में हुआ. एक लिहाज से देखा जाए तो यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी. देश की कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक को पास करके ग्रुप ए सेवा में जगह मिल चुकी थी लेकिन प्रिया का लक्ष्य सिर्फ सिविल सेवा में किसी एक पद तक पहुंचना नहीं था. उनका लक्ष्य आईएएस बनना था. इसलिए IDES में चयन के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी बंद नहीं की.
तीसरे प्रयास में फिर झटका, चौथे में बदल गई पूरी कहानी
प्रिया रानी के सफर का सबसे बड़ा सबक शायद यही है कि एक सफलता मिलने के बाद भी उन्होंने अपने अंतिम लक्ष्य से समझौता नहीं किया.पहले प्रयास की असफलता के बाद दूसरे प्रयास में AIR 284 हासिल की लेकिन आईएएस बनने का सपना पूरा नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने फिर परीक्षा दी. तीसरे प्रयास में भी उन्हें वह सफलता नहीं मिली जिसकी वह उम्मीद कर रही थीं यानी जिस परीक्षा को लेकर वह आज हंसते हुए कहती हैं कि उन्होंने उसे बहुत कुछ सुना दिया था.उसी परीक्षा के लिए उन्होंने बार-बार खुद को तैयार किया.आखिरकार चौथे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई.
UPSC 2023 में AIR 69
यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन 2023 प्रिया रानी के लिए निर्णायक साबित हुआ. उन्होंने इस बार ऑल इंडिया 69वीं रैंक हासिल की और आईएएस के लिए चयनित हुईं.उपलब्ध मार्क्स रिकॉर्ड के अनुसार उनके कुल 1000 अंक थे. लिखित परीक्षा में उन्हें 807 अंक मिले, जबकि पर्सनैलिटी टेस्ट यानी इंटरव्यू में उन्होंने 193 अंक हासिल किए. उनका वैकल्पिक विषय इकोनॉमिक्स था. खास बात यह है कि अंतिम प्रयास में उनके इंटरव्यू के अंक काफी मजबूत रहे. उनके एक इंटरव्यू के अनुसार IDES अधिकारी के तौर पर जनता से रोजाना बातचीत करने के अनुभव ने उनकी कम्युनिकेशन स्किल और परिस्थितियों को संभालने की क्षमता को बेहतर किया था.