देहरादून: राजधानी दून में लगे सरस मेले में इन दिनों अलग-अलग राज्यों की कला और संस्कृति देखने को मिल रही है. मेले में देशभर से आए कारीगर अपनी पारंपरिक चीजें लेकर पहुंचे हैं. इसी बीच छत्तीसगढ़ से आए कारीगर राकेश की वर्ली आर्ट से सजी रेशम की साड़ियां लोगों का ध्यान खींच रही हैं. साड़ियों पर बनी पारंपरिक चित्रकारी और डिजाइन काफी अलग नजर आती है.
खास बात यह है कि इन साड़ियों की कीमत मेले में 3,000 रुपये तक रखी गई है. राकेश के मुताबिक, इसी तरह की वर्ली आर्ट साड़ियां बड़े शोरूम और बुटीक में 5,000 से 10,000 रुपये तक में मिलती हैं. ऐसे में मेले में लोगों को सीधे कारीगर से ये साड़ियां खरीदने का मौका मिल रहा है.
पहली बार देहरादून पहुंचे कारीगर राकेश
राकेश छत्तीसगढ़ से पहली बार देहरादून आए हैं. वह अपने साथ कई तरह की रेशम की साड़ियां और सूट लेकर पहुंचे हैं. इनमें वर्ली आर्ट से सजी साड़ियों को लोग सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इन साड़ियों पर पारंपरिक जनजातीय और वर्ली चित्रकारी की गई है. साड़ियों पर बनी बारीक डिजाइन और सादगी लोगों को आकर्षित कर रही है. खास बात यह भी है कि इनकी चित्रकारी में उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपण कला की झलक दिखाई देती है.
वर्ली आर्ट में दिखती है ऐपण कला की झलक
महाराष्ट्र की वर्ली कला और उत्तराखंड की ऐपण कला अलग-अलग क्षेत्रों की पारंपरिक कलाएं हैं, लेकिन दोनों में कुछ आकृतियां और प्राकृतिक प्रतीक देखने को मिलते हैं. इनमें त्रिभुज, वृत्त और मानव आकृतियों का इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि देहरादून के लोगों को वर्ली आर्ट से सजी इन साड़ियों में अपनी पारंपरिक ऐपण कला की झलक भी नजर आ रही है. इससे लोग इस कला से आसानी से जुड़ पा रहे हैं.
साड़ियों पर दिखती है ग्रामीण जीवन की तस्वीर
वर्ली आर्ट एक जनजातीय कला शैली है. इसमें ग्रामीण जीवन, त्योहार, नृत्य, प्रकृति और जानवरों जैसे विषयों को चित्रों के जरिए दिखाया जाता है. इन डिजाइनों को साड़ियों के आंचल और बॉर्डर पर उकेरा जाता है. रेशम के कपड़े पर हाथ से की गई बारीक पेंटिंग इन साड़ियों की खासियत है. ज्यामितीय आकृतियों वाली डिजाइन की वजह से इनका लुक पारंपरिक होने के साथ आधुनिक भी दिखाई देता है.
सही देखभाल से लंबे समय तक चलती हैं साड़ियां
उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले सिल्क कपड़े और टिकाऊ रंगों के इस्तेमाल के कारण इन साड़ियों को लंबे समय तक रखा जा सकता है. सही तरीके से देखभाल करने और ड्राई क्लीन कराने पर ये साड़ियां कई साल तक अच्छी स्थिति में रह सकती हैं. इनकी टिकाऊ बनावट की वजह से इन्हें लंबे समय तक संभालकर रखा जा सकता है और परिवार में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को भी दिया जा सकता है.
मेले में 3 हजार रुपये तक की कीमत
वर्ली आर्ट की जो साड़ियां बड़े शोरूम और बुटीक में 5,000 से 10,000 रुपये तक की कीमत में मिलती हैं, वही साड़ियां राकेश के स्टॉल पर 3,000 रुपये तक में उपलब्ध हैं. मेले में ग्राहक सीधे कारीगर से साड़ियां खरीद सकते हैं. सरस मेले में अलग-अलग राज्यों की हस्तकला और पारंपरिक चीजें देखने के साथ लोगों को इन्हें खरीदने का भी मौका मिल रहा है. वर्ली आर्ट की ये साड़ियां इसी वजह से मेले में आने वाले लोगों के बीच खास आकर्षण बनी हुई हैं.