SBI FD Rate : रेपो रेट तो बढ़ गया लेकिन एफडी पर अभी ज्यादा ब्याज मिलेगा या नहीं, एसबीआई ने कर दिया साफ


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SBI FD Rate : रेपो रेट बढ़ चुका है और अब सभी बैंक अपने कर्ज की ब्याज दरें बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं. इससे ग्राहकों को यह उम्मीद भी जगी है कि उनकी एफडी की ब्याज दरें भी बढ़ सकती हैं, लेकिन एसबीआई ने क्लीयर कर दिया है कि फिलहाल कुछ महीनों तक ऐसा नहीं होने जा रहा. एसबीआई के चेयरमैन ने कहा है कि अभी बैंक के पास पर्याप्त नकदी है और उन्हें एफडी पर ब्याज बढ़ाने की जरूरत नहीं है.

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रेपो रेट बढ़ गया लेकिन एफडी पर ज्यादा ब्याज मिलेगा या नहीं, एसबीआई ने किया साफZoom

एसबीआई की एफडी पर ब्याज दरें दो-तीन महीने तक नहीं बढ़ने वाली हैं.

नई दिल्ली. रिजर्व बैंक ने करीब साढ़े तीन साल बाद रेपो रेट बढ़ा दिया है. इसके साथ ही बैंकों ने अपने लोन की ब्याज दरें बढ़ानी भी शुरू कर दी हैं. सार्वजनिक क्षेत्र के यूको बैंक ने तो रेपो रेट से जुड़ी ब्याज दरें बढ़ा दी हैं. रेपो रेट बढ़ने के साथ ही बैंकों में एफडी जमा कराने वाले ग्राहकों को भी अपनी ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद जाग उठी थी, लेकिन सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई ने साफ कर दिया है कि फिलहाल एफडी पर ब्याज दरें बढ़ने नहीं जा रही हैं.

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने कहा है कि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी उपलब्ध होने के कारण अगले दो-तीन महीने में जमा दरों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं दिख रही है. शेट्टी ने कहा कि आरबीआई द्वारा रेपो दर में बढ़ोतरी से बैंकों के शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) को अगले दो-तीन तिमाहियों तक फायदा मिल सकता है. इसके बाद एफडी पर ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है.

बैंक ने क्यों किया ऐसा फैसला
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत ब्याज दर रेपो को 0.25 फीसदी बढ़ाकर 5.50 फीसदी करने का फैसला किया है. इसके अलावा मौद्रिक रुख को भी बदलकर सख्ती वाला कर दिया गया है. आरबीआई की इस घोषणा के बारे में पूछे जाने पर शेट्टी ने बताया कि मेरा मानना है कि अगले दो-तीन महीनों में बैंक जमा पर दरों में कोई बदलाव नहीं होगा, क्योंकि बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी मौजूद है.

आगे क्या है एफडी पर उम्मीद
एसबीआई के चेयरमैन ने कहा कि यदि कर्ज की वृद्धि मौजूदा ऊंचे स्तर पर जारी रहती है, तो कुछ बैंकों को कर्ज देने के लिए धन जुटाने की जरूरत पड़ेगी और उन्हें जमा दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं. बढ़ती महंगाई की स्थिति में जमाकर्ताओं को कुछ हद तक सकारात्मक वास्तविक ब्याज दर मिलना भी जरूरी है. इसका मतलब है कि अगली दो-तीन तिमाहियों में दर बढ़ोतरी के फैसले का एनआईएम पर सकारात्मक असर होगा. बाजार को उम्मीद है कि दो या तीन चरणों में कुल 0.75 फीसदी रेपो रेट बढ़ सकता है.

रेपो रेट से जुड़े हैं 50 फीसदी कर्ज
उन्होंने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में 50 फीसदी से अधिक कर्ज बाहरी मानक से जुड़ी दरों पर आधारित है, जिसमें रेपो रेट प्रमुख है. आरबीआई की रेपो दर में बदलाव के अनुरूप इनकी दरों में भी बदलाव होता है. हालांकि, शेट्टी ने भरोसा जताया कि एसबीआई अपने कर्ज पोर्टफोलियो में 14-15 फीसदी की ग्रोथ बनाए रखने में सक्षम होगा. उन्होंने कहा कि एसबीआई में कर्ज की वृद्धि दर मौजूदा कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर से दो-तीन फीसदी अधिक होनी चाहिए.



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