US Iran War Twist : ‘नहीं छोड़ेंगे’, ईरान ने न्यूक्लियर पर किया बड़ा ऐलान, जंग में आया 3 नवंबर वाला महाट्विस्ट

US Iran War Twist : ‘नहीं छोड़ेंगे’, ईरान ने न्यूक्लियर पर किया बड़ा ऐलान, जंग में आया 3 नवंबर वाला महाट्विस्ट


पश्चिम एशिया में जारी ईरान और अमेरिका की जंग में एक साथ दो बड़े महाट्विस्ट आ गए हैं. एक तरफ ईरान ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर एक तगड़ा ऐलान कर दिया है, तो दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप ने 3 नवंबर को लेकर एक बड़ा दावा ठोक दिया है. ट्रंप और ईरान दोनों ही न्यूक्लियर मुद्दे पर बात कर रहे हैं, लेकिन दोनों के बयानों में जमीन-आसमान का अंतर है. असल में ट्रंप का पूरा ध्यान अभी अमेरिका के मिडटर्म चुनावों पर है, और ईरान ने ठीक इसी मौके का फायदा उठाकर बड़ा दांव चल दिया है. ईरान के परमाणु प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने जो नया बयान दिया है, उसे सुनकर ट्रंप के दिल में आग लगना तय है.

ईरान का न्यूक्लियर पर चट्टान वाला स्टैंड

तेहरान में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए ईरान के परमाणु प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने साफ कर दिया कि अमेरिका की धमकियों का ईरान पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है. जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या ईरान अमेरिका के साथ संभावित किसी समझौते के तहत अपने इनरिच्ड यूरेनियम का स्टॉक किसी अन्य देश को ट्रांसफर करेगा या संवर्धन रोकेगा, तो उन्होंने साफ लहजे में ‘नहीं’ में जवाब दिया.

  • इनसेपरेबल पार्ट: मोहम्मद इस्लामी ने कहा कि यूरेनियम संवर्धन ईरान की परमाणु तकनीक और राष्ट्रीय संप्रभुता का ‘अटूट हिस्सा’ है. इसे रोकना या छोड़ना ईरान के लिए नामुमकिन है.
  • धमकियों को खारिज किया: अमेरिकी धमकियों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि सैन्य हमलों और पाबंदियों की धमकियां ईरान के लिए कोई नई बात नहीं हैं. ईरान अपने नागरिक और वैज्ञानिक परमाणु कार्यक्रम को कानून के दायरे में जारी रखेगा.

ईरान का ये सख्त रुख ये साबित करता है कि आर्थिक तंगी और अंतरराष्ट्रीय नाकेबंदी के बावजूद तेहरान अपने परमाणु हथियारों के सुरक्षा कवच को किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहता.

डोनाल्ड ट्रंप का ‘3 नवंबर’ वाला महाट्विस्ट

ईरान के इस सख्त बयान के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा फैसले ले रहे डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान सामने आया, जिसने इस युद्ध में एक बड़ा राजनीतिक ट्विस्ट ला दिया है. ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट शेयर करते हुए ट्रंप ने लिखा ‘हम इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ प्रोडक्टिव बातचीत कर रहे हैं. मैं ये सभी को साफ कर देना चाहता हूं कि ईरान की आर्थिक और सैन्य स्थिति बहुत खराब है और हमारी नाकेबंदी पूरी ताकत के साथ लागू रहेगी, जिसमें अकेले कल रात होर्मुज जलडमरूमध्य से रिकॉर्ड 22 मिलियन बैरल तेल बहा, जिसमें से एक बैरल भी ईरान का नहीं था’.

ट्रंप ने कहा है कि ‘अब हम 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले किसी भी समय ईरान पर हमला नहीं करेंगे’. आखिर में ट्रंप ने कैपिटल लेटर में लिख डाला है कि ‘ईरान के पास परमाणु हथियार कभी नहीं होने देंगे’.

3 नवंबर की तारीख और अमेरिका का इलेक्शन गणित

डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने ये साफ कर दिया है कि खाड़ी युद्ध की टाइमलाइन अब अमेरिकी घरेलू राजनीति से सीधी जुड़ चुकी है. 3 नवंबर को अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं.

  1. चुनावों से पहले महायुद्ध से बचाव: ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी जानती है कि चुनाव से ठीक पहले यदि अमेरिका ईरान के साथ एक बड़े और खूनी युद्ध में सीधे उतरता है, तो इससे अमेरिकी शेयर बाजार और वैश्विक तेल की कीमतें अचानक आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा नुकसान उन्हें वोट बैंक में झेलना पड़ेगा.
  2. होर्मुज स्ट्रेट की घेराबंदी: ट्रंप ने ये साफ कर दिया कि भले ही वो सैन्य हमला न करें, लेकिन ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी ताकि ईरान का एक बैरल तेल भी बाहर न बिक सके.
  3. दूसरे रास्ते निकालने का समय मिलेगा : 3 नवंबर तक का समय देकर अमेरिका वास्तव में बैकचैनल कूटनीति के लिए समय दे रहा है, ताकि ईरान को बिना सीधी जंग के न्यूक्लियर प्रोग्राम फ्रीज करने पर मजबूर किया जा सके.

क्या रुक जाएगी जंग या सिर्फ तूफान से पहले की शांति?

विदेश नीति और डिफेंस एक्सपर्ट्स मानना है कि ट्रंप का ‘3 नवंबर’ वाला ऐलान युद्ध का अंत नहीं, बल्कि केवल एक टेंपरेरी पॉज है.

ईरान के परमाणु प्रमुख के बयान से साफ है कि तेहरान अमेरिका की आर्थिक नाकेबंदी के आगे झुकने को तैयार नहीं है. ईरान को भली-भांति पता है कि अगर उसने अपना समृद्ध यूरेनियम सौंप दिया या संवर्धन रोक दिया, तो उसके पास अमेरिका और इजरायल के खिलाफ कोई मजबूत ‘डिटरेंस’ नहीं बचेगा.

ऐसे में 3 नवंबर की डेडलाइन बीतते ही मध्य पूर्व में एक बहुत बड़ा सैन्य धमाका देखने को मिल सकता है. यदि बातचीत का कोई ठोस हल नहीं निकलता, तो अमेरिकी चुनावों के ठीक बाद वाशिंगटन और इजरायल मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर अंतिम और सबसे बड़ा हमला बोल सकते हैं.

ईरान की जिद और ट्रंप की टाइमलाइन

‘नहीं छोड़ेंगे’ की ईरान की न्यूक्लियर जिद्द और डोनाल्ड ट्रंप की ‘3 नवंबर’ वाली टाइमलाइन ने इस युद्ध को एक बेहद पेचीदा शतरंज के खेल में तब्दील कर दिया है. ईरान अपना यूरेनियम जखीरा बचाने पर अड़ा है, जबकि अमेरिका चुनाव तक अपने हाथ बांधकर केवल आर्थिक नाकेबंदी से काम चला रहा है. 3 नवंबर तक खाड़ी का सुलगता महासागर एक अस्थाई शांति में दिख सकता है, लेकिन इस तारीख के बीतते ही ये जंग अपने सबसे भयानक दौर में जा सकती है.



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