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Read Rudawal News: भरतपुर के रुदावल कस्बे के बीच स्थित पोखर गंदगी और दुर्गंध के कारण ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है. खाली जमीन पर पानी जमा होने और कचरा फेंकने से यह पोखर में तब्दील हो गई. ठहरे पानी में मच्छर पनपने से बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. सुरक्षा व्यवस्था न होने से हादसों का डर भी बना हुआ है. बार-बार शिकायत के बाद भी सफाई न होने से ग्रामीणों में रोष है. उन्होंने प्रशासन से जल्द पानी निकासी और सफाई कराने की मांग की है.
भरतपुर: भरतपुर जिले के रुदावल कस्बे के बीचोंबीच बनी एक पोखर इन दिनों स्थानीय निवासियों के लिए जी का जंजाल बन चुकी है. पोखर में लंबे समय से जमा गंदे पानी और उसके चारों तरफ फैली कचरे की परतों के कारण पूरे इलाके में भीषण दुर्गंध फैली हुई है. बदबू और गंदगी के चलते आसपास के लोगों का सांस लेना तक दूभर हो गया है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी और पानी की निकासी की कोई व्यवस्था न होने से यह समस्या दिन-ब-दिन और विकराल रूप धारण करती जा रही है.
कस्बे के बुजुर्गों और स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस जगह पर आज यह पोखर बनी हुई है, वह पूर्व में बिल्कुल खाली जमीन हुआ करती थी. धीरे-धीरे आसपास के इलाकों का पानी यहां जमा होने लगा और समय के साथ इसने एक बड़ी पोखर का रूप ले लिया. पानी जमा होने के बाद आसपास के कुछ लोगों ने भी यहां कचरा डालना शुरू कर दिया. समय पर कचरा न उठाए जाने और लगातार पानी जमा रहने से स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है. अब यह जगह पूरे कस्बे के लिए कचरा डंपिंग यार्ड जैसी नजर आने लगी है.
संक्रमण और बीमारियों का मंडरा रहा खतरा
पोखर के गंदे और ठहरे हुए पानी में भारी मात्रा में मच्छर, मक्खियां और अन्य हानिकारक कीट-पतंगे पनप रहे हैं. इसके चलते आसपास के इलाकों में डेंगू, मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों और त्वचा संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि घर के छोटे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर वे हर समय चिंतित रहते हैं. गंदे पानी की सड़ांध के कारण घरों के दरवाजे और खिड़कियां हर समय बंद रखनी पड़ती हैं.
हादसों को न्योता दे रही बिना सुरक्षा वाली पोखर
लोकल 18 से बातचीत करते हुए एक स्थानीय निवासी ने बताया कि पोखर के आसपास किसी भी प्रकार की फेंसिंग या सुरक्षा व्यवस्था नहीं है. मुख्य रास्ते और आबादी के बीच स्थित होने के कारण यहां हर वक्त हादसों का खतरा बना रहता है. रात के अंधेरे में या खेलते समय बच्चों के पोखर में गिरने की आशंका से अभिभावक हमेशा डरे-सहमे रहते हैं. इसके अलावा आवारा पशु भी गंदगी के बीच विचरण करते रहते हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना और बढ़ जाती है.
प्रशासनिक अनदेखी से ग्रामीणों में भारी रोष
ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर वे कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं और शिकायतें दर्ज करा चुके हैं. इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है. न तो आज तक पोखर की सफाई कराई गई और न ही जमा पानी को बाहर निकालने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना बनाई गई है. आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि जल्द से जल्द पंप सेट लगाकर पोखर के पानी की निकासी कराई जाए, चारों तरफ सफाई अभियान चलाया जाए और भविष्य में यहां कचरा फेंकने वालों पर रोक लगाई जाए.