Last Updated:
GST काउंसिल ने कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर चुकाए गए GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC देने को मंजूरी दी है. इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को मिलेगा जो अपने कर्मचारियों के लिए ग्रुप हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस कराती हैं. अभी तक इस GST का क्रेडिट नहीं मिल पाता था, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ती थी. अब कंपनियां इस टैक्स को अपने आउटपुट GST के खिलाफ एडजस्ट कर सकेंगी. कर्मचारियों को और बेहतर विकल्प दे पाएंगी.
कर्मचारियों के हेल्थ इंश्योरेंस पर बड़ा फैसला.
GST काउंसिल ने कर्मचारियों के लिए कंपनियों की ओर से लिए जाने वाले हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC की मंजूरी दे दी है. इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को मिलेगा जो अपने कर्मचारियों को ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस या ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस की सुविधा देती हैं. अभी तक इन पॉलिसी पर चुकाए गए GST का क्रेडिट आम तौर पर नहीं मिल पाता था, जिससे यह टैक्स कंपनियों की लागत का हिस्सा बन जाता था. अब ITC की अनुमति मिलने से कंपनियां इस GST को अपने आउटपुट टैक्स के खिलाफ एडजस्ट कर सकेंगी.
कंपनियां जब अपने कर्मचारियों के लिए ग्रुप हेल्थ या ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदती हैं तो उस पर GST देना पड़ता है. Moneycontrol के मुताबिक, ऐसे ग्रुप इंश्योरेंस उत्पादों पर 18% GST लागू था और इस पर ITC लेने की पाबंदी थी. यानी कंपनी ने इंश्योरेंस प्रीमियम के साथ जो GST चुकाया, उसे सामान्य तौर पर अपने दूसरे टैक्स भुगतान में घटाने की सुविधा नहीं थी. इससे इंश्योरेंस खरीदना कंपनी के लिए महंगा पड़ता था.
मिसाल के तौर पर अगर किसी कंपनी ने कर्मचारियों के ग्रुप इंश्योरेंस के लिए 10 लाख रुपये का प्रीमियम दिया और उस पर 18% यानी 1.80 लाख रुपये GST चुकाया, तो पहले यह 1.80 लाख रुपये कंपनी की लागत में जुड़ जाता था. अब ITC की अनुमति मिलने के बाद पात्र कंपनियां इस GST को अपने आउटपुट GST के खिलाफ एडजस्ट कर सकेंगी. इससे प्रभावी लागत कम हो सकती है.
इसका फायदा किसे मिलेगा?
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा उन कंपनियों को होगा जो बड़ी संख्या में कर्मचारियों को हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस कवर देती हैं. आईटी, आईटीईएस, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, मैन्युफैक्चरिंग और दूसरी बड़ी कंपनियों में कर्मचारियों को ग्रुप इंश्योरेंस देना आम है. इसलिए कर्मचारियों की संख्या जितनी ज्यादा होगी, इंश्योरेंस पर चुकाए गए GST का असर भी उतना बड़ा हो सकता है.
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
Deloitte India के पीयूष बिहानी के मुताबिक, इस प्रस्ताव से इंश्योरेंस की खरीद लागत कम हो सकती है. इससे कंपनियां उसी बजट में कर्मचारियों को ज्यादा कवरेज देने के लिए प्रोत्साहित हो सकती हैं. यानी फायदा सिर्फ कंपनी की लागत तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि कर्मचारियों को मिलने वाले बीमा कवर पर भी इसका असर पड़ सकता है.
कर्मचारी की जेब पर क्या असर होगा?
यह समझना जरूरी है कि ITC का फायदा सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में पैसा आने के रूप में नहीं मिलेगा. इसका फायदा पहले कंपनी को टैक्स क्रेडिट के रूप में मिलेगा. लेकिन अगर कंपनी की इंश्योरेंस लागत घटती है तो वह भविष्य में कर्मचारियों को ज्यादा कवर, बेहतर पॉलिसी या दूसरे कर्मचारी लाभ देने की स्थिति में आ सकती है. यानी सरकार का यह कदम कंपनियों के लिए इंश्योरेंस को सस्ता बनाने और कर्मचारियों के बीमा कवरेज को बढ़ाने की दिशा में देखा जा रहा है.