Pakistan Scared Of Houthi : पाकिस्तानी सेना ने हूतियों पर की एयरस्ट्राइक, झोंक दिए अपने JF-17 और F-16, फिर खुद ही भाग गई?

Pakistan Scared Of Houthi : पाकिस्तानी सेना ने हूतियों पर की एयरस्ट्राइक, झोंक दिए अपने JF-17 और F-16, फिर खुद ही भाग गई?


सऊदी अरब के साथ मक्का समझौता तो कर लिया, लेकिन जब असल में परीक्षा की घड़ी आई तो पाकिस्तान बगलें झांकने लगा. जब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमले किए, तो पाकिस्तान सिर्फ कड़ा विरोध जताकर किनारे हो गया. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव इतना बढ़ गया कि आखिरकार पाकिस्तानी सेना को मैदान में उतरना ही पड़ा. लेकिन मैदान में उतरते ही पहले ही एक्शन में पाकिस्तान के हाथ-पांव फूल गए. जैसे ही खबरें उड़ने लगीं कि पाकिस्तानी एयरफोर्स ने हूतियों पर एयरस्ट्राइक कर दी है, वैसे ही घबराकर पाकिस्तान जोर-जोर से ना में सिर हिलाने लगा.

पाकिस्तान ने हूतियों पर किया अटैक?

दरअसलस, अमेरिकी अखबार न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि सऊदी अरब के धाहरान स्थित किंग अब्दुलअजीज एयर बेस से पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने यमन में हूतियों के ठिकानों पर विनाशकारी एयरस्ट्राइक शुरू कर दी है.

इस रिपोर्ट के आते ही पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय में हड़कंप मच गया. पाकिस्तान ने आनन-फानन में इस रिपोर्ट को पूरी तरह से ‘झूठा, मनगढ़ंत और फेक’ करार देते हुए खारिज कर दिया. अब सवाल ये उठता है कि क्या वाकई पाकिस्तानी सेना ने हूतियों पर हमला करके पीछे कदम खींच लिए या फिर ये पाकिस्तान का अपनी ही बुनी कूटनीतिक चाल से मुकरने का जरिया है?

JF-17 और F-16 झोंकने का दावा और ‘मक्का डिफेंस अलायंस’

न्यू यॉर्क टाइम्स के अलावा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच बने ‘मक्का डिफेंस अलायंस’ के एक्टिव होते ही पाकिस्तान ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी अचानक बढ़ा दी थी.

  • 17 फाइटर जेट्स एक्टिव: दावों के मुताबिक, पाकिस्तानी वायुसेना की मशहूर ‘नंबर 11 स्क्वाड्रन’ के लगभग 17 फाइटर जेट्स, जिनमें चीनी-पाकिस्तानी जेएफ-17 (JF-17) और अमेरिकी एफ-16 (F-16) शामिल हैं, धाहरान एयर बेस से ऑपरेशनल हो चुके थे.
  • अनाम अधिकारी का कबूलनामा: रिपोर्ट में एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी के हवाले से कहा गया था कि PAF के जेट्स हूतियों के ड्रोन और मिसाइल लॉन्चिंग पैड्स को तबाह करने के लिए सीधी एयरस्ट्राइक में इस्तेमाल किए जा रहे हैं.

सऊदी अरब के रणनीतिकारों को लगा था कि पाकिस्तानी फाइटर जेट्स की एंट्री से हूती सहम जाएंगे और उनके हमले थम जाएंगे. लेकिन पाकिस्तान का ये कथित दांव पूरी तरह से उल्टा पड़ता नजर आया.

बैकफायर हुआ मूव: रियाद एयरपोर्ट पर हूतियों का खौफनाक पलटवार

इधर पाकिस्तान ने कुछ किया भी नहीं, उधर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक की खबरें सामने आते ही हूती विद्रोहियों ने इसे सऊदी अरब की एक बड़ी आक्रामकता माना और अपना हमला दस गुना तेज कर दिया. 8 अक्टूबर को रिपोर्ट सामने आने के कुछ ही घंटों बाद हूतियों ने सीधे सऊदी अरब की राजधानी रियाध को निशाना बनाया.

रियाद का किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट बैलिस्टिक मिसाइल हमले की चपेट में आ गया. एयरपोर्ट पर धुएं का गुबार देखा गया, एहतियात के तौर पर सभी उड़ानें अचानक रोक दी गईं और यात्रियों को अपना चेक-इन

सामान छोड़कर बाहर भागना पड़ा. जिस सुरक्षा की गारंटी देने का दावा किया जा रहा था, वो दांव पूरी तरह बैकफायर कर गया और रियाध शहर एक बार फिर धमाकों की गूंज से दहल उठा.

मक्का समझौते से इस खूनी खेल तक: कैसे बिगड़े हालात?

  • 7 अगस्त 2026 (समझौता): सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ‘मक्का एकॉर्ड’ पर दस्तखत किए.
  • 5 अक्टूबर 2026 (एक्टिवेशन): सऊदी अरब पर बढ़ते हूती हमलों के बाद इस समझौते को एक्टिव किया गया और सेना की त्वरित तैनाती पर सहमति बनी.
  • 7 अक्टूबर 2026 (हूती हमला): हूतियों ने रियाध और अभा एयरपोर्ट पर हमला किया, जिसमें 3 लोगों की मौत हुई और 36 घायल हुए.
  • 8 अक्टूबर 2026 (एयरस्ट्राइक का दावा और पलटवार): पाकिस्तान के जेट्स द्वारा बमबारी की खबरें आईं, जिसके तुरंत जवाब में हूतियों ने रियाध एयरपोर्ट पर फिर से बैलिस्टिक मिसाइल दाग दी.

पाकिस्तान का यू-टर्न: दावों से क्यों भाग खड़ा हुआ पाकिस्तान?

जब हूतियों का पलटवार सीधे रियाध के एयरपोर्ट तक पहुंच गया और दुनिया भर में इस युद्ध के फैलने का खतरा बढ़ गया, तब पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट को ‘फेक’ बता दिया. पाकिस्तान का ये यू-टर्न कोई हैरान करने वाला कदम नहीं है, बल्कि इसके पीछे तीन बड़ी वजहें हैं.

  1. ईरान का खौफ: हूतियों को ईरान का सीधा समर्थन हासिल है. पाकिस्तान और ईरान की सीमाएं आपस में मिलती हैं, जहां बलूच उग्रवाद को लेकर पहले से ही भारी तनाव रहता है. अगर पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर हूतियों पर हमले स्वीकार कर लेता, तो ईरान के साथ उसके कूटनीतिक और सैन्य रिश्ते पूरी तरह तबाह हो जाते.
  2. सैनिकों और एयर बेस पर मंडराता खतरा: अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी के पूर्व विश्लेषक कर्नल डेविड ओ. स्मिथ के मुताबिक, सऊदी अरब में पाकिस्तान के लगभग 8,000 सैनिक तैनात हैं. अगर हूती पलटवार में सऊदी में मौजूद पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हैं, तो पाकिस्तान एक ऐसे दलदल में फंस जाएगा जहां से निकलना मुमकिन नहीं होगा.
  3. अंदरूनी राजनीति और आर्थिक मजबूरी: पाकिस्तान में बिना संसद की मंजूरी के फील्ड मार्शल असिम मुनीर ने अपने सैनिकों को इस जंग के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है. कंगाली के कगार पर खड़ा पाकिस्तान पूरी तरह से सऊदी अरब के वित्तीय पैकेज पर टिका है. लेकिन देश के भीतर जनता और विपक्षी दल इस बात से नाराज हैं कि सऊदी पैसों की खातिर पाकिस्तानी सैनिकों को पराए युद्ध में झोंका जा रहा है.

पाकिस्तान, सऊदी के किसी काम नहीं आया?

पाकिस्तानी सेना ने मक्का समझौते के तहत सऊदी अरब में अपने JF-17 और F-16 फाइटर जेट्स और 8,000 सैनिक तैनात तो कर दिए, लेकिन जैसे ही हूतियों का बैलिस्टिक मिसाइल हमला बैकफायर होकर रियाध एयरपोर्ट तक पहुंचा और ईरान के साथ सीधा युद्ध छिड़ने का खतरा बढ़ा, पाकिस्तानी हुकूमत तुरंत अपने बयान से पलट गई और पूरी रिपोर्ट को ‘फेक’ बताकर भाग खड़ी हुई.

पाकिस्तान अब एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है, जहां न तो उसकी अर्थव्यवस्था उसे लंबा युद्ध लड़ने की इजाजत देती है, न उसकी सेना में हूतियों का सामना करने का माद्दा है, और न ही उसकी कूटनीति उसे ईरान के प्रकोप से बचा सकती है.



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