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Bangladesh Planning News: बांग्लादेश में सरकार अब सॉफ्ट पावर इस्तेमाल करने के मूड में आ चुकी है. उसने तय कर लिया है कि अब वो आने वाली पीढ़ी के लिए इतिहास बदलकर रख देगा. यहां कोर्स की किताबों में काफी कंटेंट बदल दिया जाएगा, ताकि बच्चे वो पढ़ सकें जो सरकार चाहती है. इसमें सबसे अहम ये है कि शेख मुजीबुर्रहमान की वजह अब छात्र जियाउर्रहमान की महानता के बारे में पढ़ेंगे.
तारिक रहमान. (रॉयटर्स)
Bangladesh News: बांग्लादेश में सरकार बदली, परिस्थितियां बदली और अब इसका असर स्कूल के पाठ्यक्रम पर भी दिखाई दे रहा है. स्कूल के विद्यार्थियों को अगले शैक्षणिक सत्र से देश का इतिहास नए तरीके से पढ़ने को मिलेगा. साल 2027 में लागू होने वाली टेक्स्ट बुक्स में मुक्ति संग्राम, आजादी के बाद की राजनीतिक घटनाओं और 2024 के जुलाई आंदोलन से जुड़े कई नए लेसन और जानकारी शामिल की जाएगी. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के सामने देश का इतिहास सही रूप में पेश करना है.
नेशनल करिकुलम एंड टेक्स्टबुक बोर्ड (NCTB) ने बांग्लादेश के अगले सत्र की नई किताबों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू भी कर दी है. यहां क्लास 3 से 10 तक की कई पुस्तकों में पुराने विषयों को संशोधित करने के साथ कुछ नए टॉपिक भी जोड़े जाएंगे. इनमें जियाउर रहमान, खालिदा जिया, 7 नवंबर 1975 की घटनाएं और 1990 के जनआंदोलन से जुड़े टॉपिक मुख्य रूप से होंगे.
मुक्ति संग्राम का इतिहास ही बदल दिया
नई किताबों में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम से जुड़े हुए तथ्य भी बदलकर पढ़ाए जाएंगे. छोटी कक्षाओं में जियाउर रहमान के स्वतंत्रता की घोषणा से जुड़े प्रसंग को संक्षेप में बताया जाएगा, जबकि बड़ी कक्षाओं में इसे विस्तार से पढ़ाया जाएगा. पांचवीं की किताब में जियाउर रहमान और खालिदा जिया की जीवनी को प्रमुख नेताओं से जुड़े पाठ के रूप में शामिल करने की योजना है. वहीं कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के लिए जियाउर रहमान के युद्धकालीन अनुभवों से संबंधित लेख भी जोड़ा जाएगा. दिलचस्प ये है कि इससे पहले तक शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर्रहमान को बांग्लादेश का राष्ट्रपिता माना जाता था. उन्हें आदर से ‘बंगबंधु’ की भी उपाधि दी गई थी. इतिहास में उनका नाम 1971 के मुक्ति संग्राम में विशेष रूप से लिया गया लेकिन अब उन्हें इतिहास से मिटा देने की तैयारी चल रही है.
2024 का छात्र आंदोलन भी पाठ्यक्रम में शामिल
पाठ्यक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में 2024 के जुलाई आंदोलन को शामिल करना भी है. नई किताबों में इस आंदोलन की वजह, उसके दौरान हुई घटनाओं, मारे गए लोगों के बलिदान, महिलाओं की भूमिका और इसके ऐतिहासिक प्रभाव को विद्यार्थियों की उम्र के अनुसार समझाने की तैयारी है. कक्षा 4 में आंदोलन से जुड़े एक शहीद की कहानी और कक्षा 9-10 में जुलाई आंदोलन से संबंधित विस्तृत सामग्री शामिल किए जाने की योजना है.
इतिहास बदलना क्यों खतरनाक?
पाठ्यपुस्तकों में बदलाव को लेकर विशेषज्ञों ने सवाल भी उठाए हैं. उनका कहना है कि सत्ता में आने वाली हर सरकार के साथ इतिहास की किताबों में बदलाव ठीक नहीं है. इतिहास किसी राजनीतिक दल की सुविधा के मुताबिक नहीं बल्कि दस्तावेजों और प्रमाणों के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए. विशेषज्ञों के मुताबिक मुक्ति संग्राम और उसके बाद की राजनीतिक घटनाओं में जिन लोगों की भूमिका रही है, उसे संतुलित रूप में पढ़ाना चाहिए. किसी भी देश में सरकार अपने हिसाब से कोर्स में बदलाव करती है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे शिक्षा पद्धति का नुकसान न हो.