राजस्थान पंचायत चुनाव : खाद पर बवाल बीजेपी पर पड़ सकता है भारी, कांग्रेस बनाएगी मुद्दा

राजस्थान पंचायत चुनाव : खाद पर बवाल बीजेपी पर पड़ सकता है भारी, कांग्रेस बनाएगी मुद्दा


जयपुर. राजस्थान में पंचायत चुनाव की शुरुआत हो चुकी है. राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार आज इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है. लेकिन पंचायत से पहले सूबे के कई इलाकों में खाद की किल्लत को लेकर बवाल कटना शुरू हो गया है. किसानों का आरोप है कि उन्हें खाद नहीं मिल रही है. खाद की किल्लत को लेकर हाल ही में हाड़ौती के बारां और जयपुर से सटे दौसा में बेजा बवाल मच चुका है. इन दो शहरों के अलावा प्रदेश के कई अन्य हिस्सों में भी खाद की कमी के कारण किसानों के गुस्से की खबरें सामने आई है. किसानों के गुस्से की इस चिंगारी को कांग्रेस ने पंचायत चुनाव में भुनाने का मानस भी बना लिया है. अगर समय रहते सत्तारुढ़ बीजेपी सरकार ने इस पर काबू नहीं पाया है तो यह मुद्दे चुनावों में उसके गले पड़ सकता है.

वन स्टेट वन इलेक्शन की कवायद के तहत प्रदेश में हो रहे दूसरे चरण के पंचायत चुनाव में खाद का संकट ग्रामीण इलाकों में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनता नजर आ रहा है. ग्रामीण मतदाताओं के लिए यह विषय इसलिए भी बेहद संवेदनशील है, क्योंकि इसका सीधा असर उनकी खेती और पैदावार पर पड़ता है. किसान नेता रामपाल जाट ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर सरकार खाद का पर्याप्त भंडारण होने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर किसान अपना खेत छोड़कर खाद के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं. इस समय गेहूं, चना और जौ जैसी रबी फसलों की बुवाई के लिए खेत तैयार हैं, लेकिन किसान भूखे-प्यासे घंटों लाइनों में लगने को मजबूर हैं. अब बहस इस बात पर टिकी है कि कागजों में मौजूद खाद किसान के खेत तक समय पर पहुंच रही है या नहीं.

कांग्रेस ने सरकार को घेरा, पुलिस के पहरे में बंट रही खाद
प्रदेश में खाद की किल्लत को लेकर कांग्रेस पार्टी सरकार पर पूरी तरह से हमलावर हो गई है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार की किसान नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बुवाई के सीजन में अन्नदाता खाद के लिए दर-दर भटक रहा है. हालात यह हैं कि प्रदेश में पुलिस के पहरे के बीच खाद बांटा जा रहा है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि सरकार किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है. टीकाराम जूली ने स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी किसानों की इस गंभीर समस्या को लेकर सीधे जनता के बीच जाएगी और सरकार से जवाब मांगेगी.

गोदामों में भारी स्टॉक, फिर भी अन्नदाता बेहाल
मीडिया रिपोर्ट्स और विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, इस समय प्रदेश के सरकारी गोदामों में कुल 4.77 लाख टन यूरिया और डीएपी खाद उपलब्ध है. इसके बावजूद किसानों को खाद के लिए दिन-रात भटकना पड़ रहा है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में गोदामों में 3.73 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.04 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 95 हजार मीट्रिक टन एनपीके और 2.09 लाख मीट्रिक टन एसएसपी का स्टॉक मौजूद है. किसानों और किसान संगठनों का सवाल है कि जब गोदामों में लाखों टन खाद मौजूद है, तो यह समय पर खेतों तक और अन्नदाता के हाथों में क्यों नहीं पहुंच रही है.

समय पर खाद नहीं मिली तो पिछड़ जाएगी रबी की बुवाई
प्रदेश भर में रबी फसलों की बुवाई की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. खेतों में पर्याप्त नमी को देखते हुए सरसों, दाल और चने की बुवाई के लिए खेत पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन खाद की अनुपलब्धता के कारण बुवाई का काम अटक गया है. पिछले वर्ष प्रदेश में 114 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई हुई थी, जिसमें 34 लाख हेक्टेयर में सरसों और 22 लाख हेक्टेयर में चना बोया गया था. इस बार खाद संकट के चलते बुवाई के पिछड़ने की गंभीर आशंका जताई जा रही है. किसान नेता रामपाल जाट का कहना है कि खेत तैयार पड़े हैं, लेकिन किसान बुवाई का काम छोड़कर भूखे-प्यासे खाद की कतारों में खड़े हैं.

भाजपा का पलटवार, विपक्ष पर लगाया भ्रम फैलाने का आरोप
विपक्ष के तीखे हमलों के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि खाद की उपलब्धता को लेकर कांग्रेस केवल राजनीतिक माहौल बनाने और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है. मदन राठौड़ ने दावा किया कि केंद्र और राज्य स्तर पर उर्वरक आपूर्ति की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है और किसानों की मांग के अनुरूप ही वितरण कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी हाल में किसान को परेशान नहीं होने देगी. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि जिस तरह निकाय चुनाव में जनता ने भाजपा पर भरोसा जताया था, ठीक उसी तरह पंचायत चुनाव में भी ग्रामीण जनता विपक्ष के झूठे भ्रम का करारा जवाब देगी. हालांकि, सत्ताधारी दल होने के नाते ग्रामीण क्षेत्रों में खाद की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करना भाजपा के लिए एक बड़ी परीक्षा बनी हुई है.



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