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Kanpur Asthi Bank: कानपुर के अस्थि बैंक में केवल अस्थियां नहीं हैं. बल्कि यह उस सच्चाई की प्रमाण हैं, जिसे हर किसी को जानना चाहिए. क्योंकि जिन बच्चों के लिए माता-पिता दिन रात संघर्ष करते हैं, उनको पढ़ाते-लिखाते हैं, कामयाब बनाते हैं. उन्हीं बच्चों के पास अपने माता-पिता की अस्थियों के विसर्जन का वक्त नहीं है.
कानपुर के अस्थि बैंक में जमा हो गई हैं कई अस्थियां.
कानपुरः पितृपक्ष में लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं. घाटों पर तर्पण होता है, पूजा होती है और अस्थियों का विसर्जन किया जाता है. लेकिन कानपुर में कुछ अस्थियां ऐसी भी हैं, जिनकी अंतिम विदाई आज तक पूरी नहीं हो सकी. भैरव घाट के अस्थि कलश बैंक में 24 से ज्यादा कलश रखे हैं. किसी को महीनों बीत चुके हैं, तो कुछ कलश करीब 6 साल से अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं. आखिर इन कलशों के पीछे क्या कहानी है.
किसी की मां की तो किसी के पिता की अस्थियां रखी हुईं
ये सिर्फ मिट्टी के कलश नहीं. बल्कि किसी की आखिरी निशानी है. किसी कलश में मां की अस्थियां हैं, किसी में पिता की, तो किसी में उस इंसान की, जिसके साथ जिंदगी का लंबा सफर तय किया था. अंतिम संस्कार के बाद इन अस्थियों को गंगा में प्रवाहित किया जाना था. लेकिन अपनों के वापस न आने से अंतिम यात्रा अधूरी रह गई. कानपुर के भैरव घाट स्थित अस्थि कलश बैंक में ऐसे 24 से ज्यादा कलश रखे हैं. यहां सामान्य तौर पर करीब 30 दिन तक अस्थियां सुरक्षित रखने की व्यवस्था है. कुछ लोग तय समय के बाद कलश लेकर चले जाते हैं और अपने परिजनों की अस्थियों का विसर्जन कर देते हैं. लेकिन कुछ कलश ऐसे भी हैं, जिन्हें लेने कोई नहीं आया।वक्त गुजरता गया. महीने साल में बदल गए.और कई पितृपक्ष भी बीत गए.
समय-समय पर अस्थियों की होती है पूजा
घाट पर जब लोग अपने पूर्वजों के लिए श्रद्धा से तर्पण करते हैं. उसी दौरान इन कलशों की खामोशी और ज्यादा मार्मिक हो जाती है. युग दधीचि देहदान संस्थान की ओर से संचालित इस अस्थि कलश बैंक में रखी अस्थियों की समय-समय पर पूजा भी कराई जाती है. लेकिन सबसे बड़ा इंतजार उस दिन का है, जब कोई अपना आएगा, कलश उठाएगा और अधूरी अंतिम यात्रा को पूरा करेगा. कानपुर के सरसैया घाट पर बने इस अस्थि कलश बैंक की देखरेख सामाजिक संगठन कर रहा है. वहीं सामाजिक संगठन ने एक केयरटेकर रखा है.
तीन बेटे लेकिन पिता की अस्थियां अभी तक नहीं हुई विसर्जित
अपना नाम प्रकाशित न होने की शर्त पर देखरेख करने वाले ने बताया की एक रेक में ऐसी भी अस्थि पड़ी है, जो पिछले 7 महीने से यहां है. दरअसल एक रिटायर्ड सरकारी अधिकारी की मार्च में मृत्यु हो गई थी. उसके तीन बेटे हैं, जिसमें से दो विदेश में हैं और एक दक्षिण भारत में किसी बड़ी कंपनी में बड़े पद पर है. पिता के मौत की खबर सुनकर वह आया तो जरूर मगर अस्थियां नहीं ले गया. अस्थियां यह कह कर रख गए थे की तीन चार दिन बाद आकर ले जाएंगे. मगर आज लगभग 7 महीने होने को है, वह नहीं आया. वह पहले तो फोन उठाते थे और आजकल आजकल बात कह कर टाल देते. कुछ महीने पूर्व उन्हें जब यह बताया गया की काफी समय हो गया है, इन अस्थियो को प्रवाहित करके मोक्ष प्राप्त कर लें तो उनके पुत्र ने कहा मैं तुम्हें रुपए भिजवा दे रहा हूं तुम स्वयं यह काम कर लो.