Navratri 2026 Navdurga Kon Hai: नवरात्रि में किन 9 देवियों की होती है पूजा? कैसे हुई उत्पत्ति और कैसे पड़े उनके नाम, देवीभागवत पुराण से जानें

Navratri 2026 Navdurga Kon Hai: नवरात्रि में किन 9 देवियों की होती है पूजा? कैसे हुई उत्पत्ति और कैसे पड़े उनके नाम, देवीभागवत पुराण से जानें


Navratri 2026 Navdurga Kon Hai: नवरात्रि के समय में मां दुर्गा के 9 स्वरुपों की पूजा होती है. आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से लेकर महानवमी तक 9 देवियों की पूजा करने से विभिन्न प्रकार के मनोकामनाओं की पूर्ति तो होती ही है, ग्रह भी शांत रहते हैं. मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उत्पत्ति की कथा रोचक है. उनका नाम कैसे पड़ा और उनकी पूजा से कौन से वरदान प्राप्त होते हैं, इनके बारे में देवीभागवत पुराण में विस्तार से बताया गया है. जब-जब तीनों लोकों पर असुरों का अत्याचार बढ़ा तो मां दुर्गा ने अवतार लेकर उनका वध किया और धर्म की रक्षा की. आइए जानते हैं कि 9 दुर्गा की उत्पत्ति कैसे हुई और उनका नाम कैसे रखा गया?

9 ​देवियों की उत्पत्ति, नाम और मिलने वाले वरदान

पहली देवी मां शैलपुत्री

मां दुर्गा का पहला स्वरूप मां शैलपुत्री हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के पहले दिन होता है. ये पहली नवदुर्गा हैं. प्रजापति दक्ष ने जब अपने दामाद भगवान शिव का अपमान किया तो सती ने यज्ञ की अग्नि में आत्मदाह कर लिया. उसके बाद वे राजा हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्मीं. पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने की वजह से उनका नाम शैलपुत्री पड़ा. वहीं माता पार्वती हैं. उनका वाहन बैल है. अपने दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं. इनकी पूजा से सुख और समृद्धि बढ़ती है, वहीं चंद्र दोष भी दूर होता है.

दूसरी देवी मां ब्रह्मचारिणी

मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी हैं. नारद जी के उपदेश के बाद पार्वती जी ने भगवान शिव को पति रूप में पाने का प्रण किया और ​हजारों वर्षों तक कठोर तप किया. उस समय देवी का स्वरूप सफेद वस्त्र पहने, दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल धारण किए था. इनके कठोर तप और स्वरूप को देखकर इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा. इनकी पूजा करने से वैराग्य, ब्रह्मचर्य, दृढ़ निश्चय की प्राप्ति होती है. कुंडली का मंगल दोष दूर होता है.

तीसरी देवी मां चंद्रघंटा

मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं मां चंद्रघंटा. ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज से मां चंद्रघंटा की उत्पत्ति हुई, जिन्होंने महिषासुर का वध किया. यह देवी का युद्धप्रिय स्वरूप है. इस देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इस वज​​​​ह से इनको चंद्रघंटा कहा जाता है. 10 भुजाओं वाली ये देवी सिंह पर सवार होती हैं और अनेक प्रकार के अस्त्र और शस्त्र धारण करती हैं. इनकी पूजा करने से शक्ति, पराक्रम और साहस बढ़ेगा, वहीं शुक्र दोष दूर होगा.

चौथी देवी मां कूष्मांडा

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है, वे दुर्गा जी का चौथा स्वरूप हैं. इस देवी ने अपनी हल्की मुस्कान से ही ब्रह्मांड की रचना कर दी. 8 भुजाओं वाली देवी मंद मुस्कान लिए होती हैं, जो अष्ट सिद्धियां प्रदान करती हैं और सिंह पर सवारी करती हैं. इनको कुम्हड़े यानी कद्दू की बलि प्रिय है, इसलिए इन्हें कूष्मांडा कहते हैं. इनकी पूजा से पद, प्रतिष्ठा, आयु, अरोग्य आदि की प्राप्ति होती है, सूर्य दोष मिटता है.

पांचवी देवी मां स्कंदमाता

मां दुर्गा का पांचवा स्वरूप हैं मां स्कंदमाता. तारकासुर के वध के लिए भगवान शिव और माता पार्वती से स्कंदकुमार यानी भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ तो देवी का स्कंदमाता स्वरूप बना. स्कंदकुमार की माता होने के कारण देवी का नाम स्कंदमाता हुआ. चार भुजाओं वाली देवी अपने गोद में स्कंदकुमार को लेकर कमल पर विराजमान रहती हैं. संतान प्राप्ति और अन्य सुखों के लिए इनकी पूजा करते हैं. इनकी कृपा से कुंडली का बुध दोष मिटता है.

छठी देवी मां कात्यायनी

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है, जो मां दुर्गा का छठा स्वरूप हैं. महर्षि कात्यायन ने पराशक्ति की तपस्या की थी, तब देवी ने उनकी पुत्री के रूप में अवतार लिया. महर्षि कात्यायन की पुत्री होने की वजह से उनका नाम कात्यायनी पड़ा. मां कात्यायनीने महिषासुर का वध किया था. अत्यंत स्वर्ण वर्ण वाली देवी 4 भुजाओं में अस्त्र शस्त्र धारण करती हैं और उनका वाहन सिंह है. मां कात्यायनी की पूजा से शक्ति मिलती है और गुरु दोष खत्म होता है.

सातवी देवी मां कालरात्रि

मां दुर्गा का सातवां अवतार मां कालरात्रि हैं. शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज के वध के लिए देवी ने अत्यंत भयानक स्वरूप धारण किया था. गर्दभ यानी गधे के वाहन पर सवार देवी का वर्ण काला, बाल बिखरे और गले में चमकने वाली सफेद माला होती है. काल का अंत करने और अंधकार को हरने की वजह से इनका नाम कालरात्रि पड़ा. ये युद्ध की देवी हैं. इनकी पूजा करने से शत्रुओं पर विजय मिलती है और शनि दोष खत्म होता है.

आठवी देवी मां महागौरी

मां दुर्गा का आठवां स्वरूप मां महागौरी हैं. हजारों वर्षों तक कठोर तप करने से देवी का शरीर काला और कमजोर पड़ गया था. तब शिव कृपा से उनको अत्यंत गौर वर्ण प्राप्त हुआ, जिससे उनका नाम महागौरी हुआ. बैल पर सवार होने वाली मां महागौरी की 4 भुजाएं हैं. इनकी पूजा करने से सुख, समृद्धि और उत्तम सेहत की प्राप्ति होती है. राहु दोष मिट जाता है.

नौवी देवी मां सिद्धिदात्री

नवरात्रि के अंतिम दिन यानी नौवे दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है. भगवान शिव को मां सिद्धिदात्री से ही अणिमा, महिमा, गरिमा जैसी सभी 18 प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हुईं. इन्हीं की कृपा से भगवान शिव ने अर्धनारीश्वर स्वरूप धारण किया. हर प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने की वजह से इनका नाम सिद्धिदात्री पड़ा. कमल और सिंह पर​ विराजमान होने वाली देवी अपनी चार भुजाओं में चक्र, गदा, शंख और कमल धारण करती हैं. इनकी पूजा करने से सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं और केतु दोष दूर होता है.



Source link