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Mau News: मुहम्मदाबाद गोहना के निवासी संजय मिश्रा की कहानी ही अलग है. सरकार की विभिन्न योजनाओं की मदद व खुद के प्रयास से अब तक 10 हजार से ऊपर लोगों को रोजगार दिला चुके हैं. आईए जानते हैं क्या उनकी पूरी कहानी है और कहां से उन्हें यह आइडिया मिला और कैसे वह यह काम कर रहे हैं. लोकल 18 से बात करते हुए संजय मिश्रा बताते हैं कि वह महिला ग्राम उद्योग सेवा समिति के तहत यह कार्य कर रहे हैं अब तक 13 हजार परिवार के लोगों को रोजगार दिला चुके हैं.
मऊ: जनपद के मुहम्मदाबाद गोहना के निवासी संजय मिश्रा की कहानी ही अलग है. सरकार की विभिन्न योजनाओं की मदद व खुद के प्रयास से अब तक 10 हजार से ऊपर लोगों को रोजगार दिला चुके हैं. आईए जानते हैं क्या उनकी पूरी कहानी है और कहां से उन्हें यह आइडिया मिला और कैसे वह यह काम कर रहे हैं. लोकल 18 से बात करते हुए संजय मिश्रा बताते हैं कि वह महिला ग्राम उद्योग सेवा समिति के तहत यह कार्य कर रहे हैं अब तक 13 हजार परिवार के लोगों को रोजगार दिला चुके हैं. हालांकि यह संस्था सन 1994 से कार्य कर रही है लेकिन वह सन 2002 में इस संस्था से जुड़े.
इस संस्था का गठन बलिया निवासी एक रिटायर्ड महिला अधिकारी राधिका मिश्रा ने सन 1994 में किया. यह बलिया जिले की रहने वाली थी और मऊ जनपद में खंड विकास अधिकारी पद पर रही रिटायर्ड होने के बाद वह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस संस्था का गठन किया. गांव में ज़रूरतें बहुत ज्यादा थी लेकिन मौलिक अधिकार पाने के संसाधन कम थे फिर उन्होंने इस संगठन का शुरूआत किया और गांव-गांव जाकर महिलाओं व अन्य लोगों को जागरूक करने का कार्य किया और उनके मौलिक अधिकार दिलाने का काम किया और सन 2021 तक उन्होंने संस्था में काम किया उसके बाद उनका निधन हो गया .
2002 में इस संस्था से जुड़कर शुरू किया समाज सेवा
संजय मिश्रा बताते हैं कि वह इस संगठन से 2002 में वह इस संगठन से जुड़े जब वह इलाहाबाद से लॉ ग्रेजुएट पास करके आए, फिर वह इस संस्था से जुड़ गए और 2002 से लगातार वह इस संस्था को चला रहे हैं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहे हैं. शुरुआती दौर में सरकार की योजनाएं नहीं मिलती थी एक दूसरे के मदद से महिलाओं व अन्य गरीब परिवार और असहाय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया. हालांकि उस दौर में कठिनाइयां अधिक थी एक दूसरों से मदद लेकर किसी को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें रोजगार दिलाना बहुत कठिनाई का कार्य था. लेकिन हौसले बुलंद थे और एक दूसरे के सहयोग से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते गए फिर उन्हें सरकार की योजनाओं के बारे में पता चला और अब वह सरकार की योजनाओं को धरातल पर लेकर आते हैं, सरकार की योजनाओं के मदद से महिलाओं व अन्य लोगों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं और उन्हें रोजगार दिला रहे हैं.
लगभग 13000 महिलाओं के परिवार को दिला चुके हैं रोजगार
इस संस्थान के किए गए कार्यों और प्रयास से महिलाओं और किशोरियों तथा बालिकाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया गया, और लगभग 13 हजार महिलाओं के परिवार को वह रोजगार दिला चुके हैं. वह बताते हैं कि आगे का उनका लक्ष्य है कि वह ऐसे ही निरंतर कार्य करते रहेंगे और महिलाओं व बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाएंगे और उनका रोजगार प्रदान कराएंगे. क्योंकि सरकार की बहुत सारी योजनाएं चल रही हैं जानकारी के अभाव में लोग उस योजना का लाभ नहीं ले पाते. इस संगठन के माध्यम से वह गांव गांव और डोर टू डोर जाकर लोगों को जागरुक कर रहे हैं और उन्हें प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना रहे हैं. हालांकि आज वर्तमान में वह सरकार और आम जनता के बीच योजनाओं को लेकर जो दूरियां है उसे वह पूरा कर रहे हैं, और आगे लक्ष्य है कि वह अन्य महिलाओं व बालिकाओं को रोजगार प्रदान कराएंगे और उन्हें आत्मनिर्भर बनाएंगे