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Single Arm Plank World Record Rudranshi Rathore: केकड़ी की महज 6 साल की रुद्रांशी राठौड़ ने लगातार 4 मिनट तक एक हाथ के सहारे प्लैंक यानी सिंगल-आर्म प्लैंक पोज कर योगा बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में विश्व रिकॉर्ड बनाया है. रुद्रांशी ने यह कारनामा 21 जून 2026 को जयपुर में किया था, जिसका प्रमाणपत्र 2 अक्टूबर 2026 को जारी हुआ. दूसरी कक्षा की छात्रा और ताइक्वांडो खिलाड़ी रुद्रांशी ने कोच सुरजीत यादव तथा जिम संचालक पिता भूपेन्द्र सिंह राठौड़ व मां पूजा शेखावत के सहयोग से यह मुकाम हासिल किया है. उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है.
Kekri Rudranshi World Record: 6 साल की रुद्रांशी ने 4 मिनट तक एक हाथ पर प्लैंक कर बनाया विश्व रिकॉर्ड
केकड़ी. महज छह साल की नन्ही सी उम्र में जहां बच्चे खेलकूद में व्यस्त रहते हैं, वहीं केकड़ी की रुद्रांशी राठौड़ ने योग और फिटनेस के क्षेत्र में एक अद्भुत कारनामा कर दिखाया है. इस नन्ही प्रतिभा ने अपनी कड़ी मेहनत और शारीरिक क्षमता के दम पर योगा बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराते हुए एक नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया है. रुद्रांशी ने सिंगल-आर्म प्लैंक पोज यानी केवल एक हाथ के सहारे प्लैंक करने की बेहद कठिन मुद्रा को लगातार 4 मिनट तक बनाए रखकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है. 6 साल की बच्ची के इस असाधारण प्रदर्शन से पूरे केकड़ी क्षेत्र और परिवार में जश्न और खुशी का माहौल है.
रुद्रांशी राठौड़ ने यह कठिन शारीरिक चुनौती 21 जून 2026 को राजधानी जयपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पूरी की थी. उनके इस शानदार प्रदर्शन के गहन मूल्यांकन के बाद बीते 2 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक रूप से परिणाम घोषित किया गया. योगा बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से 2 अक्टूबर को ही रुद्रांशी को विश्व रिकॉर्ड का आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी कर सम्मानित किया गया. इतनी कम उम्र में एक हाथ के सहारे चार मिनट तक शरीर का पूरा संतुलन साधे रखना उनकी गहरी एकाग्रता, अनुशासन और निरंतर अभ्यास को दर्शाता है.
योग के साथ ताइक्वांडो की भी बेहतरीन खिलाड़ी हैं रुद्रांशी
वर्तमान में दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली रुद्रांशी केवल योग ही नहीं, बल्कि ताइक्वांडो की भी एक होनहार खिलाड़ी हैं और रोजाना अपनी फिटनेस पर पूरा ध्यान देती हैं. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने जयपुर की लक्षिका एकेडमी में कोच सुरजीत यादव के निर्देशन में योग और फिटनेस की बारीकियां सीखीं. एकेडमी से टिप्स लेने के बाद उन्होंने अपने घर पर भी बिना रुके नियमित रूप से कड़ा अभ्यास जारी रखा, जिसका परिणाम आज विश्व रिकॉर्ड के रूप में सबके सामने है.
माता-पिता का सपना, देश का प्रतिनिधित्व करे बेटी
रुद्रांशी की इस बड़ी कामयाबी के पीछे उनके कोच सुरजीत यादव के साथ-साथ उनके माता-पिता का भी बेहद अहम योगदान रहा है. रुद्रांशी के पिता भूपेन्द्र सिंह राठौड़ स्वयं एक जिम संचालक हैं, जिनसे बच्ची को शुरू से ही फिटनेस की प्रेरणा मिली, वहीं उनकी मां पूजा शेखावत एक गृहिणी हैं. बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए मां पूजा शेखावत ने बताया कि उनका सपना है कि रुद्रांशी भविष्य में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करे और पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन करे.