ड्राइवर को झपकी आ जाए, आगे-पीछे वाहन हो या घना कोहरा, अलर्ट करेगा गाड़ी में लगा ADAS, जानें खासियत

ड्राइवर को झपकी आ जाए, आगे-पीछे वाहन हो या घना कोहरा, अलर्ट करेगा गाड़ी में लगा ADAS, जानें खासियत


नई दिल्लीः सड़क पर होने वाले हर हादसे के पीछे ड्राइवर की गलती हो, ऐसा जरूरी नहीं है. कई बार अचानक सड़क पर कोई वाहन आ जाना, किसी व्यक्ति का रास्ता पार करना, हाईवे पर वाहन का खड़ा होना या खराब मौसम के कारण कम विजिबिलिटी जैसी परिस्थितियां भी दुर्घटना की वजह बन जाती हैं. ऐसे में वाहन सुरक्षा से जुड़ी ADAS (Advanced Driver Assistance System) तकनीक ड्राइवर के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकती है. यह तकनीक ड्राइवर को संभावित खतरे को लेकर अलर्ट करने के साथ-साथ सड़क पर हुई घटना की रिकॉर्डिंग में भी मदद करती है. परमा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट एएल नरसिम्हन के मुताबिक, ADAS का मकसद ड्राइवर की जगह वाहन चलाना नहीं, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में ड्राइवर की मदद करना है. खासतौर पर उन परिस्थितियों में जब सड़क पर अचानक कोई रुकावट आ जाए या ड्राइवर थकान की वजह से समय पर प्रतिक्रिया न दे पाए.

आगे, पीछे और अंदर तक रिकॉर्डिंग की सुविधा
ADAS सिस्टम में वाहन की जरूरत के हिसाब से आगे और पीछे कैमरे लगाए जा सकते हैं. इसके अलावा वाहन के अंदर भी कैमरा लगाया जा सकता है. इसका फायदा यह है कि दुर्घटना की स्थिति में सिर्फ सामने की सड़क ही नहीं, बल्कि वाहन के पीछे और अंदर हुई गतिविधियों का रिकॉर्ड भी मौजूद रह सकता है. नरसिम्हन के मुताबिक, हादसे के बाद यह रिकॉर्ड काफी महत्वपूर्ण हो सकता है. इससे वाहन मालिक यह दिखा सकता है कि घटना किस परिस्थिति में हुई थी. साथ ही फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को भी दुर्घटना की वजह समझने में मदद मिल सकती है.

अचानक सामने आई रुकावट पर ड्राइवर को अलर्ट
सड़क पर कई हादसे उस वक्त होते हैं जब कोई वाहन या दूसरी रुकावट अचानक सामने आ जाती है. ADAS के कुछ फीचर्स ऐसी संभावित रुकावटों को पहचानकर ड्राइवर को अलर्ट करने के लिए बनाए गए हैं. हालांकि सिस्टम किस तरह और कितनी प्रभावी तरीके से काम करेगा, यह रुकावट और सड़क की परिस्थितियों पर निर्भर करता है. खासकर सुबह के समय घना कोहरा होने पर सामने चल रहा वाहन देर से दिखाई दे सकता है. ऐसे मामलों में ड्राइवर को समय रहते अलर्ट करने वाली तकनीक सड़क सुरक्षा के लिहाज से अहम हो सकती है.

ड्राइवर को नींद या थकान आने पर भी मिल सकता है अलर्ट
लंबे समय तक वाहन चलाने के बाद ड्राइवर का थक जाना भी सड़क हादसों का बड़ा कारण बन सकता है. ADAS से जुड़ी ड्राइवर मॉनिटरिंग तकनीक ड्राइवर के चेहरे और आंखों की गतिविधियों पर नजर रखकर थकान या नींद के संकेत पहचानने की दिशा में काम कर रही है.अगर सिस्टम को लगता है कि ड्राइवर थका हुआ है या उसकी आंखें लगातार बंद हो रही हैं, तो उसे आराम करने के लिए अलर्ट किया जा सकता है. यानी तकनीक सिर्फ सड़क पर मौजूद खतरे को नहीं, बल्कि ड्राइवर की स्थिति को भी ध्यान में रखने की कोशिश करती है.

बारिश और कोहरे में कितना कारगर
खराब मौसम में किसी भी कैमरा आधारित सिस्टम के सामने चुनौती बढ़ जाती है. बारिश, घना कोहरा या कम विजिबिलिटी जैसी परिस्थितियां ADAS के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं. नरसिम्हन के मुताबिक, अलग-अलग मौसम और विजिबिलिटी की परिस्थितियों में सिस्टम को और बेहतर बनाने के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट पर काम जारी है.यानी ADAS को हर परिस्थिति में 100 फीसदी समाधान मानने के बजाय इसे ड्राइवर की मदद करने वाली तकनीक के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा.

हादसे के बाद सबूत के तौर पर भी काम आ सकता है रिकॉर्ड
ADAS का एक अहम फायदा घटना की रिकॉर्डिंग से जुड़ा है. अगर सड़क पर कोई हादसा होता है तो कैमरे में रिकॉर्ड फुटेज से यह समझने में मदद मिल सकती है कि दुर्घटना से ठीक पहले क्या हुआ था. मसलन, सामने से कोई वाहन अचानक आया था या सड़क पर कोई व्यक्ति आया था या कोई वाहन हाईवे पर खड़ा था.ऐसे मामलों में रिकॉर्डिंग दुर्घटना की जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण सबूत बन सकती है. इससे यह समझने में भी मदद मिल सकती है कि गलती किस परिस्थिति में हुई.

सड़क सुरक्षा में बड़ा बदलाव ला सकती है तकनीक
नरसिम्हन के मुताबिक, सड़क पर अचानक आने वाली रुकावटों और दूसरे वाहनों की वजह से होने वाली घटनाओं को कम करने में ऐसी तकनीक की भूमिका अहम हो सकती है. उनका कहना है कि अगर वाहनों में इस तरह की सुरक्षा तकनीक का इस्तेमाल बढ़ता है तो ड्राइवर को समय रहते अलर्ट मिलने के साथ-साथ दुर्घटना के बाद घटना को समझने के लिए जरूरी रिकॉर्ड भी मिल सकता है.
इसके अलावा वाहन में कैमरे लगे होने की जानकारी भी लोगों को सावधान कर सकती है. इससे गलत तरीके से वाहन चलाने या किसी तरह की घटना को अंजाम देने वाले लोग भी सतर्क हो सकते हैं. ऐसे में ADAS सिर्फ ड्राइवर की सुविधा नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, ड्राइवर मॉनिटरिंग और दुर्घटना की जांच तीनों स्तरों पर उपयोगी तकनीक बन सकती है.



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