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Mustard Seed Treatment : धान की कटाई के बाद कई किसान सरसों की खेती में जुट जाते हैं. सरसों की बुवाई का समय अक्टूबर से शुरू हो जाता है. जैसे ही धान कट जाए किसानों को खेत की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए. रामपुर के जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा लोकल 18 से बताते हैं कि बुवाई से पहले खेत में दो से तीन बार गहरी जुताई करें. इससे खेत की मिट्टी अच्छी तरह खुल जाती है और अगली फसल के लिए अच्छी जमीन तैयार हो जाती है. कुलदीप सिंह राणा बताते हैं कि सरसों की फसल में किसानों को सबसे ज्यादा ध्यान बीज शोधन पर देना चाहिए. कई बार किसान सीधे बीज खेत में डाल देते हैं. किसान भाई सरसों के बीज का उपचार ट्राइकोडर्मा से कर सकते हैं.
रामपुर. सरसों की बुवाई का समय चल रहा है. धान की कटाई के बाद किसान अब खेतों को सरसों की फसल के लिए तैयार करने में जुटे हैं. ऐसे में अगर बुवाई से पहले खेत और बीज की ठीक से तैयारी कर ली जाए तो फसल की शुरुआत बेहतर हो सकती है. रामपुर के जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा ने लोकल 18 से सरसों की बुवाई से पहले कुछ जरूरी बातें बताई हैं जिनका ध्यान रखकर किसान बीज जनित रोगों के खतरे को कम करने के साथ फसल की अच्छी बढ़वार और उत्पादन हासिल कर सकते हैं. कुलदीप सिंह राणा के मुताबिक सरसों की बुवाई का समय अक्टूबर से शुरू हो जाता है. जैसे ही धान की फसल खेत से निकल जाए किसान को खेत की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए. इसके लिए खेत में दो से तीन बार गहरी जुताई करनी चाहिए. इससे खेत की मिट्टी अच्छी तरह खुल जाती है और अगली फसल के लिए जमीन तैयार होती है. गहरी जुताई के बाद खेत में गोबर की अच्छी तरह सड़ी हुई खाद मिलाई जा सकती है. इससे खेत में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद मिलती है. हालांकि खाद और उर्वरक की मात्रा खेत की स्थिति के हिसाब से तय करना बेहतर है.
सरसों की फसल में किसानों को सबसे ज्यादा ध्यान बीज शोधन पर देना चाहिए. अधिकारी के मुताबिक कई बार किसान सीधे बीज खेत में डाल देते हैं. बीज में मौजूद रोगकारक बाद में अंकुरण और पौधों की शुरुआती बढ़वार को प्रभावित कर सकते हैं. इससे फसल को शुरुआत में ही नुकसान हो सकता है. कुलदीप सिंह राणा बताते हैं कि किसान सरसों के बीज का उपचार ट्राइकोडर्मा से कर सकते हैं. जरूरत के अनुसार कार्बेन्डाजिम से भी बीज शोधन किया जा सकता है. कार्बेन्डाजिम की मात्रा करीब 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज से लेकर 4 ग्राम प्रति किलोग्राम तक रखी जा सकती है. हालांकि किसी भी कृषि रसायन का इस्तेमाल करते समय उत्पाद के लेबल और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर माननी चाहिए.
कैसी मिट्टी सबसे अच्छी
सरसों की अच्छी फसल के लिए तीसरा जरूरी काम है मिट्टी की जांच. अधिकारी के अनुसार मिट्टी की जांच से यह पता चलता है कि खेत में किन पोषक तत्वों की कमी है और मिट्टी की स्थिति कैसी है. जांच में सबसे पहले मिट्टी का पीएच देखा जाता है. सामान्य तौर पर 7 से कम पीएच वाली मिट्टी अम्लीय और 7 से अधिक पीएच वाली मिट्टी क्षारीय मानी जाती है. मिट्टी की जांच के बाद ही पोषक तत्वों की जरूरत तय करना ज्यादा सही रहता है. सरसों में NPK के साथ कैल्शियम, फास्फोरस और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों की भी जरूरत पड़ सकती है. किसान मिट्टी की रिपोर्ट के आधार पर इनकी पूर्ति कर सकते हैं.
न करें ये गलती
कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा बताते हैं कि आजकल बाजार में कई तरह के माइक्रो न्यूट्रिएंट उपलब्ध हैं, लेकिन किसान बिना जरूरत के कोई भी पोषक तत्व खेत में न डालें. पहले मिट्टी की जांच कराएं और रिपोर्ट के आधार पर जिस पोषक तत्व की कमी हो उसी की पूर्ति करें. सरसों में संतुलित पोषण मिलने से पौधों की बढ़वार फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर अच्छा असर पड़ सकता है. इसलिए सिर्फ खाद डालने पर ध्यान देने के बजाय किसान को यह भी देखना चाहिए कि फसल को जरूरी पोषक तत्व सही मात्रा में मिल रहे हैं या नहीं.