आज की तारीख से ठीक तीन साल पहले 7 अक्टूबर 2023 की वो सुबह दुनिया के लिए एक आम शनिवार की सुबह थी. इजरायल में यह दिन धार्मिक छुट्टी के साथ ही पार्टी और जश्न का माहौल लेकर आया था. लेकिन सुबह सवेरे ही सूरज उगने के साथ ही ऐसा भयावह कांड हुआ, जिसने झकझोर कर रख दिया. सुबह ठीक 6:30 बजे गाजा पट्टी से दागी गई हजारों रॉकेटों की गड़गड़ाहट और बॉर्डर पर फैले भयानक सन्नाटे ने एक ऐसी जंग की नींव रखी, जिसकी आग अब पूरे मिडिल ईस्ट में फैल चुकी है. हमास ने इस हमले को ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड नाम दिया था. यह घटना दोनों देशों के बीच लंबे अरसे से चली आ रही दुश्मनी का महज एक किस्सा नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट की जियो पॉलिटिक्स को झकझोर कर रखने वाली घटना साबित हुई. हमास के इस हमले ने एक तरफ जहां इजरायल के अजेय होने के भ्रम को तोड़ा, वहीं इसके जवाब में शुरू हुई जंग ने गाजा को भयावह मानवीय संकट में धकेल दिया.
यह महज एक आतंकी हमला या सीमा पार से की गई गोलाबारी नहीं थी, बल्कि 1973 के योम किप्पुर युद्ध के ठीक 50 साल बाद इजरायल की सरजमीं पर हुआ सबसे बड़ा और घातक जमीनी हमला था. इस हमले ने इजरायल के डिफेंस सिस्टम, उसकी खुफिया एजेंसी मोसाद और मिलिट्री की क्षमता के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दीं. आखिर हमास ने 7 अक्टूबर का दिन ही क्यों चुना, यह हमला किस स्तर का था, किन इलाकों को निशाना बनाया गया और इसने वेस्ट एशिया की राजनीति को कैसे मोड़कर रख दिया. आइए समझते हैं हर एक बात सिलसिलेवार तरीके से.
हमास ने इजरायल पर हमला क्यों किया?
हमास के आर्मी कमांडर मोहम्मद देइफ और पॉलिटिकल लीडरशिप ने हमले के तुरंत बाद जो बयान जारी किए, उनसे इस हमले के मुख्य वजह की तस्वीर साफ हुई. इसके पीछे मुख्य रूप से चार बड़े रणनीतिक और पॉलिटिकल कारण थे. वो क्या-क्या थे, आइए गौर कर लेते हैं.
- अल-अक्सा मस्जिद और यरुशलम का मुद्दा: हमास ने अपने ऑपरेशन का नाम ही ‘ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड’ रखा था. 2023 के दौरान यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद परिसर में इजरायली पुलिस की छापेमारी, यहूदी लोगों की ऐक्टिविटी और वहां फिलिस्तीनियों के साथ हुई झड़प को लेकर अरब कम्युनिटी में भारी गुस्सा था. हमास ने इसे अपने हमले का सबसे बड़ा वजह करार दिया.
- सऊदी-इजरायल नॉर्मलाइजेशन को तोड़ना: हमले से ठीक पहले अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक डिप्लोमेटिक संबंध स्थापित करने की बातचीत अंतिम दौर में थी. सऊदी अरब और इजरायल के रिश्ते अगर सामान्य हो जाते, तो फिलिस्तीन का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय राजनीति के हाशिए पर चला जाता. हमास इस पूरी डील को ध्वस्त करके यह संदेश देना चाहता था कि फिलिस्तीन के मसले को हल किए बिना मिडिल ईस्ट में शांति संभव ही नहीं है.
- 16 साल से जारी गाजा की नाकेबंदी: साल 2007 में हमास ने गाजा का कंट्रोल संभाला. इसके बाद से इजरायल और मिस्र ने गाजा पट्टी की जमीनी, हवाई और समुद्री नाकेबंदी कर रखी थी. हमास का तर्क था कि गाजा एक ‘खुली जेल’ बन चुका है, जहां की इकोनॉमी पूरी तरह से ध्वस्त है और युवा बेरोजगार पड़े हुए हैं.
- इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदी: इजरायल की जेलों में हजारों फिलिस्तीनी बंद थे. हमास का मकसद इजरायल के नागरिकों और सैनिकों को बंधक बनाकर एक बड़ा होस्टेज स्वैप यानी कैदियों की अदला-बदली से जुड़ी डील को हासिल करना था, ताकि अपने लीडर्स और लड़ाकों को छुड़ाया जा सके.
हमास ने इजरायल पर किया हमला
हमले के लिए 7 अक्टूबर की तारीख ही क्यों चुनी गई?
7 अक्टूबर की तारीख का चयन अचानक नहीं हुआ था, बल्कि इसके पीछे गहरा मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक गणित था:
- योम किप्पुर युद्ध की 50वीं सालगिह: 6 अक्टूबर 1973 को मिस्र और सीरिया ने इजरायल पर अचानक हमला किया था, जिसे ‘योम किप्पुर वार’ कहा जाता है. हमास ने इसके ठीक 50 साल और एक दिन बाद हमला करके इजरायल को यह मनोवैज्ञानिक झटका दिया कि 50 साल बाद भी उसकी सुरक्षा एजेंसियां उतनी ही बेखबर थीं.
- सिमचत तोराह का त्यौहार: 7 अक्टूबर 2023 को यहूदियों का पवित्र त्यौहार सिमचत तोराह (Simchat Torah) था. यह शनिवार यानी सबथ का दिन था. इस दिन पूरा देश छुट्टी के मूड में था. अधिकांश सैनिक अपने बैरक में या घरों पर थे, सीमा पर पहरा ढीला था और इजरायल का पूरा फोकस त्यौहार मनाने पर था. हमास ने इजरायल की इसी ‘सॉफ्ट स्पॉट’ पर वार किया.
- इंटेलिजेंस सरप्राइज: इजरायल को भरोसा था कि गाजा बॉर्डर पर लगी उसकी हाई-टेक कंक्रीट की दीवार, एआई सेंसर्स और ड्रोन सर्विलांस सिस्टम बेजोड़ है. इस वजह से बिना भनक लगे कोई घुसपैठ संभव नहीं है. हमास ने इसी अति-आत्मविश्वास का फायदा उठाया और कई सालों से सीक्रेट तरीके से तैयार की गई योजना को अंजाम दिया.
यह हमला कैसा और किस लेवल का था?
7 अक्टूबर का हमला एक ‘मल्टी-डोमेन जमीन, आसमान और समुद्री’ कोऑर्डिनेटेड असॉल्ट था. सैन्य रणनीतिकार इसको आधुनिक युद्ध इतिहास का सबसे बड़ा सरप्राइज अटैक मानते हैं.
- 3000 से ज्यादा रॉकेटों की बौछार: सुबह 6:30 बजे हमास ने महज 20 मिनट के अंदर ही गाजा से इजरायल के शहरों पर करीब 3000 से 5000 रॉकेट्स दागे. इतने बड़े रॉकेट हमले से इजरायल का प्रसिद्ध एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम भी कुछ समय के लिए ओवरलोड हो गया.
- हाई-टेक सुरक्षा दीवार को ध्वस्त करना: रॉकेट हमले की आड़ में हमास के लड़ाकों ने बुलडोजर और विस्फोटकों से इजरायल की स्मार्ट फेंस को दर्जनों जगहों से तोड़ दिया.
- हवा और समंदर से घुसपैठ: लड़ाकों ने मोटराइज्ड पैराग्लाइडर की मदद से उड़कर सीमा पार की और कई लड़ाके स्पीड बोट्स के जरिए समंदर के रास्ते इजरायली सीमा में घुस गए.
- ड्रोन अटैक: हमास ने सस्ते कॉमर्शियल ड्रोनों का इस्तेमाल करके सीमा पर तैनात इजरायली ऑटोमैटिक मशीन गन टावरों और कम्युनिकेशन टावरों को बेकार कर दिया, जिससे इजरायली सेना का कंट्रोल रूम अंधेरे में आ गया.
नरसंहार और बंधक बनाया
इस हमले में इजरायल के लगभग 1200 लोगों की जान गई. इनमें सबसे ज्यादा नागरिक थे, जिनमें बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और सुपरनोवा म्यूजिक फेस्टिवल में आए युवा शामिल थे. इसके अलावा लगभग 300 इजरायली सैनिक और पुलिसकर्मी भी मारे गए. हमास के लड़ाके 251 लोगों को बंधक बनाकर गाजा की सुरंगों में ले गए. इनमें इजरायली नागरिकों के साथ-साथ कई देश जैसे थाईलैंड, अमेरिका, नेपाल के विदेशी नागरिक भी शामिल थे. दूसरे वर्ल्ड वार के दौरान हुए होलोकॉस्ट के बाद यहूदियों के खिलाफ एक ही दिन में हुआ यह सबसे बड़ा नरसंहार था.
हमले में मारे गए लोगों की याद
हमास ने किन-किन इलाकों को निशाना बनाया था?
हमास के लगभग 3000 से अधिक लड़ाके हथियारों से लैस होकर इजरायल के 800 स्क्वैयर किलोमीटर से अधिक इलाके में फैल गए थे. उन्होंने गाजा पट्टी से सटे दक्षिणी इजरायल को निशाना बनाया. इसके साथ ही सुपरनोवा म्यूजिक फेस्टिवल पर हमला भी हुआ. गाजा सीमा के पास किबुत्ज रीम के पास आयोजित एक आउटडोर म्यूजिक फेस्टिवल पर हमास ने सीधा अटैक किया. केवल इस एक जगह पर 360 से ज्यादा बेकसूर युवाओं की हत्या कर दी गई और दर्जनों लोगों को अगवा कर लिया गया.
हमास लड़ाके किबुत्ज बेएरी, कफार अजा, निर ओज, और किसुफिम जैसे शांतिपूर्ण रिहायशी इलाकों में घुसे. वहां घरों में घुसकर परिवारों की हत्याएं की गईं और घरों को आग लगा दी गई. अकेले किबुत्ज बेएरी में 100 से अधिक लोग मारे गए थे. सदेरोत और ओफाकिम शहर में हमास के लड़ाके पिकअप ट्रकों और मोटरसाइकिलों पर सवार होकर दाखिल हुए.
उन्होंने सदेरोत के पुलिस स्टेशन पर कब्जा कर लिया, जिसे छुड़ाने के लिए इजरायली सेना को भारी गोलीबारी करनी पड़ी. IDF मिलिट्री बेस पर हमास ने इजरायली सेना के गाजा डिवीजन हेडक्वार्टर सहित 8 से ज्यादा मिलिट्री ठिकानों पर हमला किया, जिससे इजरायली कमांड एंड कंट्रोल पूरी तरह ठप हो गया.
इसका क्या नतीजा हुआ?
7 अक्टूबर के हमले ने पूरे मिडिल ईस्ट के समीकरण बदलकर रख दिए और एक ऐसी जंग की शुरुआत की जिसका दायरा गाजा से निकलकर कई देशों तक फैल गया. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने औपचारिक रूप से ‘युद्ध की घोषणा’ की. इजरायल ने हमास के खात्मे और बंधकों की रिहाई के मकसद से गाजा पर अब तक का सबसे भीषण अटैक शुरू किया.
इजरायली एयरस्ट्राइक और जमीनी सैन्य कार्रवाई के कारण गाजा पट्टी का बड़ा हिस्सा पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गया. हेल्थ ऑफिसर्स के आंकड़ों के मुताबिक इस युद्ध में 70 हजार से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग बेघर होकर भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं. इजरायली सेना ने गाजा में हमास के टॉप कमांडरों जैसे याह्या सिनवार और मोहम्मद देइफ को मार गिराया लेकिन जंग की तबाही थमी नहीं.
- लेबनान और हिजबुल्लाह फ्रंट: 7 अक्टूबर के हमले के बाद यह लड़ाई केवल इजरायल और हमास तक सीमित नहीं रही. उत्तरी सीमा पर लेबनान के उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह ने हमास के समर्थन में इजरायल पर रॉकेट दागने शुरू किए. इसके बाद इजरायल ने लेबनान में घुसकर हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह समेत उसके पूरे टॉप लीडरशिप को ढेर कर डाला.
- हूती विद्रोही और ईरान का मोर्चा: यमन के ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों ने लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले शुरू कर दिए, जिससे ग्लोबल समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई. इजरायल बनाम ईरान का सीधा टकराव हो गया. दशकों से एक-दूसरे के खिलाफ प्रॉक्सी वार लड़ने वाले इजरायल और ईरान पहली बार आमने-सामने आ गए. दोनों देशों ने एक-दूसरे की सरजमीं पर सीधे मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसने पूरी दुनिया को एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया.