वॉशिंगटन : फरवरी 2026 में ईरान के साथ जंग के दौरान महाशक्ति अमेरिका को आसमान में बहुत बड़ा और शर्मनाक झटका लगा है. अमेरिकी संसद की नई रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में अमेरिका ने अपने करीब 81 सैन्य विमान और हाई-टेक ड्रोन गंवा दिए हैं. इस बर्बादी की कुल कीमत 3.3 बिलियन डॉलर, यानी 27,000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है. चौंकाने वाली बात ये है कि इस भारी नुकसान में अमेरिका के अपने दोस्तों का भी हाथ रहा है. तबाही के ये बड़े आंकड़े सामने आने और डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध नीतियों पर सवाल उठने के बाद, अब वॉशिंगटन से लेकर पेंटागन तक हड़कंप मच गया है और अफसर से लेकर नेता तक मुंह छुपाते फिर रहे हैं.
ईरान जंग में 3.3 बिलियन डॉलर की बर्बादी: जानिए किस अमेरिकी विमान की कितनी है कीमत
अमेरिकी वायु सेना और नौसेना को जो नुकसान पहुंचा है, वो केवल लड़ाकू जहाजों की गिनती तक सीमित नहीं है, बल्कि ये अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वहां के करदाताओं की जेब पर पड़ा एक बहुत भारी-भरकम डाका है. आम लोगों के खून-पसीने की कमाई से बने ये अत्याधुनिक विमान कितने महंगे थे, इसका अंदाजा इनकी यूनिट कीमतों से आसानी से लगाया जा सकता है.
- F-35A लाइटनिंग II: पांचवीं पीढ़ी का ये स्टील्थ फाइटर जेट अमेरिकी वायु सेना का सबसे आधुनिक और ताकतवर हथियार माना जाता है, जिसे रडार भी आसानी से नहीं पकड़ पाता. इसकी केवल एक यूनिट की कीमत लगभग 92 मिलियन डॉलर यानी करीब 770 करोड़ रुपए से भी अधिक है.
- MQ-9 रीपर ड्रोन: अमेरिकी सेना ने इस युद्ध में एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 45 MQ-9 रीपर मल्टी-रोल अनक्रूइड ड्रोन खो दिए हैं. इनमें से एक अकेले ड्रोन की कीमत 30 मिलियन डॉलर से 50 मिलियन डॉलर यानी लगभग 250 से 400 करोड़ रुपए के बीच होती है.
- F-15E स्ट्राइक ईगल: इस मल्टी-रोल फाइटर जेट की प्रति यूनिट लागत 30 मिलियन डॉलर यानी 250 करोड़ रुपए से ज्यादा है.
- E-3 सेन्ट्री सर्विलांस प्लेन: बोइंग 707 एयरलाइनर के ढांचे पर आधारित ये अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) प्लेन अमेरिका का एक बेहद दुर्लभ और अहम निगरानी प्लेटफॉर्म है. इस एक निगरानी विमान की कीमत लगभग 270 मिलियन डॉलर यानी करीब 2,250 करोड़ रुपए है. अमेरिकी वायु सेना के बेड़े में ऐसे केवल 32 विमान ही पूरी तरह काम कर रहे थे.
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की रिपोर्ट: जानिए कौन-कौन से विमान हुए तबाह
अमेरिकी संसद के लिए तैयार की गई रिपोर्ट में ‘US Aircraft Combat Damage in Operation Epic Fury: Considerations for Congress’ के मुताबिक, पश्चिम एशिया में US सेंट्रल कमांड के अभियानों के दौरान कई फाइटर जेट्स और ड्रोन्स तबाह हुए हैं. इसकी लिस्ट भी निकाली गई है.
- 12 F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट्स
- 1 F-35A लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट
- 2 A-10 थंडरबोल्ट II (ग्राउंड-अटैक एयरक्राफ्ट)
- 7 KC-135 स्ट्रैटोटैंकर (हवा में ईंधन भरने वाले एरियल रीफ्यूलिंग टैंकर विमान)
- 1 E-3 सेन्ट्री एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्लेन
- 2 MC-130J कमांडो II (स्पेशल ऑपरेशन्स एयरक्राफ्ट)
- 1 HH-60W जोली Green II (कॉम्बैट सर्च-एंड-रेस्क्यू हेलीकॉप्टर)
- 1 MQ-4C ट्राइटन (हाइ-ऑल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस अनक्रूइड ड्रोन)
- 3 MQ-1 मल्टी-रोल अनक्रूइड ड्रोन
- 45 MQ-9 रीपर मल्टी-रोल अनक्रूइड ड्रोन
केवल फिक्स्ड-विंग विमान और ड्रोन ही नहीं, बल्कि आमने-सामने की जंग के दौरान अमेरिकी सेना ने 1 AH-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर, 4 AH-6 लिटिल बर्ड लाइट अटैक हेलीकॉप्टर और 1 MH-60 सी हॉक मैरीटाइम हेलीकॉप्टर भी गंवा दिया है.
दोस्तों ने भी नहीं छोड़ा: फ्रेंडली फायर और ईरानी एयरस्ट्राइक का दर्द
इस रिपोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा ये हुआ है कि अमेरिकी फाइटर जेट्स केवल दुश्मन की मिसाइलों का शिकार नहीं हुए, बल्कि अपने ही सहयोगियों की भारी गफलत का भी शिकार बने हैं.
- कुवैत के ऊपर फ्रेंडली फायर: 2 मार्च 2026 को कुवैत के हवाई क्षेत्र में अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम या सहयोगी बलों की भारी चूक यानी फ्रेंडली फायर के कारण अपने ही 3 F-15E फाइटर जेट्स को मार गिराया गया. इसके ठीक अगले महीने यानी अप्रैल में 1 और F-15 जेट ईरान की सीमा के भीतर उड़ते समय मार गिराया गया.
- जॉर्डन एयरबेस पर ईरानी बमबारी: 9 और 10 सितंबर 2026 को जॉर्डन स्थित मुवफ्फक साल्टी एयर बेस पर ईरान द्वारा की गई भीषण एयरस्ट्राइक में अमेरिकी सेना के कम से कम 8 अन्य F-15E जेट्स बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए.
6 बिलियन डॉलर से ज्यादा उछला अमेरिकी हथियारों का बजट
ईरान युद्ध के मैदान में केवल महंगे विमानों की बर्बादी ही नहीं हो रही, बल्कि अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे आधुनिक गोला-बारूद, स्मार्ट बमों और मिसाइलों का खर्च भी अनुमान से कहीं ज्यादा तेजी से आसमान छू रहा है.
कॉन्ग्रेशनल बजट ऑफिस (CBO) की हालिया रिपोर्ट में अमेरिकी सेना द्वारा ईरान युद्ध में इस्तेमाल किए गए हथियारों की लागत 21.7 बिलियन डॉलर दर्ज की गई थी. लेकिन महज एक महीने से थोड़े अधिक समय के भीतर यूएस सेंट्रल कमांड के नए अनुमानों में ये आंकड़ा बढ़कर 28.1 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है. यानी महज 30 से 40 दिनों के भीतर अमेरिकी गोला-बारूद की खपत और लागत में 6.4 बिलियन डॉलर यानी लगभग 53,000 करोड़ रुपए का भारी-भरकम उछाल आया है.
व्हाइट हाउस की चुप्पी और डोनाल्ड ट्रंप पर उठते सवाल
रिपोर्ट में अमेरिकी संसद को चेतावनी देते हुए साफ कहा गया है कि नुकसान का ये आंकड़ा अभी अंतिम नहीं है और इसमें आगे और बढ़ोतरी हो सकती है. क्योंकि जंग अभी भी चल रही है और कई सैन्य जानकारियां बेहद संवेदनशील और सीक्रेट हैं, इसलिए हर हादसे की सही-सही जिम्मेदारी तय करने में समय लग रहा है. हालांकि, जांचकर्ताओं ने ये उम्मीद जरूर जताई है कि जो विमान थोड़े-बहुत खराब या डैमेज हुए हैं, उन्हें जरूरी मरम्मत के बाद वापस काम पर लगाया जा सकता है.
इस पोल खोलने वाली रिपोर्ट के सामने आते ही पेंटागन, व्हाइट हाउस और जंग के नाम पर राजनीति करने वाले नेताओं के बीच सन्नाटा छा गया है. विपक्षी दल डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति और सैन्य फैसलों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किस कीमत पर अमेरिकी सेना को इस जंग की आग में झोंका गया. इस रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ चल रही यह जंग अमेरिका को हर दिन भारी पड़ रही है और उसकी तथाकथित ‘सैन्य ताकत’ का घमंड अब पूरी तरह से चूर-चूर होता नजर आ रहा है.