पाकिस्तान के पीओके में घमासान मचा हुआ है, लोग आटे और बिजली जैसी बेसिक चीजों के लिए सड़कों पर उतर आए हैं. लोगों को इतनी मामूली सुविधाएं देने के बजाए पाकिस्तानी सेना उन्हें गोलियों से भून रही है. ‘फेल्ड मार्शल’ आसिम मुनीर ने पीओके में नरसंहार करवाया है. पीओके के लोग भारत में शामिल होने की मांग कर रहे हैं और ऐसे हालातों के बीच एक 17 साल की लड़की ने बॉर्डर क्रॉस करने की बड़ी गलती कर दी. घुसते वक्त ही वो पकड़ी गई लेकिन खुफिया तंत्र में हड़कंप मच गया. सवाल उठने लगे क्या ये किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है या फिर सिर्फ रास्ता भटकने जाने का मामला?
PoK की उस लड़की के साथ क्या हुआ?
सस्पेंस और सवालों के बीच आखिरकार इस मामले में भारतीय अधिकारियों और सेना का बड़ा फैसला सामने आ गया है. इस लड़की की पहचान हो गई है, वो पीओके के कोटली जिले की रहने वाली है. 2 अक्टूबर को जब सेना के जवानों ने उसे पकड़ा, तो कानून के तहत सख्त पूछताछ हुई.
जांच में जब ये साफ हो गया कि ये सिर्फ रास्ता भटकने का मामला था, तो भारतीय अधिकारियों ने इस मामले को मानवीय संवेदनाओं के साथ हैंडल किया. इस केस में सारी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं, इसके बाद बुधवार को पूंछ के चक्का दा बाग क्रॉसिंग प्वाइंट के जरिए सामिया को पूरे सम्मान और सुरक्षा के साथ पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले कर दिया गया.
2 अक्टूबर की वो दोपहर: जब नौशेरा सेक्टर में मची हलचल
ये पूरी घटना 2 अक्टूबर की है, जब राजौरी जिले के नौशेरा तहसील में स्थित लाम सेक्टर में भारतीय सेना की एक नियमित गश्त चल रही थी. जवान एलओसी पर पैनी नजर बनाए हुए थे कि तभी बाड़ के बेहद करीब एक लड़की की संदिग्ध हरकत दिखाई दी.
इलाका सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील और बारूदी सुरंगों से भरा हुआ है. जवानों ने बिना कोई देरी किए उसे तुरंत हिरासत में ले लिया. पकड़ी गई लड़की की पहचान हो गई है, वो पीओके के कोटली जिले के खुईरट्टा तहसील स्थित बैंस गाला गांव की रहने वाली है. अचानक एलओसी पार कर भारतीय सीमा में आने से शुरुआती कुछ घंटों तक सुरक्षा एजेंसियां इसे सुरक्षा चूक या संदिग्ध गतिविधि मानकर अलर्ट हो गईं.
क्या थी लड़की की कहानी? नौशेरा पुलिस की कड़ी पूछताछ
सेना ने प्रारंभिक पूछताछ के बाद लड़की को स्थानीय पुलिस चौकी लाम के हवाले कर दिया, जहां नौशेरा पुलिस ने उससे विस्तार से पूछताछ की.
पूछताछ के दौरान 17 साल की लड़की ने रोते हुए पुलिस अधिकारियों को बताया कि वो किसी जासूसी या नापाक इरादे से भारतीय सीमा में नहीं आई थी. वो अनजाने में रास्ता भटक गई थी और चलते-चलते उसे अंदाजा ही नहीं रहा कि कब उसने नियंत्रण रेखा को पार कर लिया. चूंकि सीमा पर कई जगहों पर केवल कटीले तार हैं और कई इलाके बेहद दुर्गम हैं, इसलिए अक्सर वहां के स्थानीय ग्रामीण रास्ता भूल जाते हैं. जांच अधिकारियों ने उसके बयानों और बैकग्राउंड को पूरी तरह खंगाला और जब ये पुष्टि हो गई कि उसके पास से कोई भी संदिग्ध सामान या दस्तावेज नहीं मिला है, तब अधिकारियों ने राहत की सांस ली.
क्या है अनजाने में बॉर्डर क्रॉस करने की सजा?
अब एक बड़ा सवाल ये उठता है कि अगर कोई नागरिक गलती से या अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा या LoC पार कर जाता है, तो कानून में उसके लिए क्या प्रावधान हैं?
- अवैध घुसपैठ का कानून: सामान्य परिस्थितियों में बिना वैध पासपोर्ट या वीजा के किसी देश की सीमा में घुसना ‘पासपोर्ट एक्ट’ और ‘फॉरेनर्स एक्ट’ के तहत एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना जाता है. इसमें कई सालों की जेल और जुर्माना हो सकता है.
- मानवीय आधार और फ्लैग मीटिंग: लेकिन जब मामला LoC पर अनजाने में सीमा पार करने का होता है, तो दोनों देशों की सेनाओं के बीच एक स्थापित ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ लागू होता है. अगर जांच में व्यक्ति का इरादा निर्दोष साबित होता है तो सेना फ्लैग मीटिंग के जरिए दूसरे देश की सेना से संपर्क करती है.
- नाबालिगों को विशेष राहत: खासकर अगर सीमा पार करने वाला कोई बच्चा, नाबालिग या मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति हो, तो भारतीय एजेंसियां मानवीय आधार पर बिना कोई मुकदमा दर्ज किए या जेल भेजे, कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी करके उसे उसके देश वापस लौटा देती हैं.
चक्का दा बाग से पाकिस्तान वापसी: भारत का मानवीय पैगाम
सामिया अजीम के मामले में भी भारतीय सेना और पुलिस ने कानून और मानवीयता का बेहतरीन तालमेल दिखाया. नौशेरा पुलिस और लाम पुलिस चौकी के इन-चार्ज ने पूरी एस्कॉर्ट गाड़ियों के साथ सामिया को पूंछ जिले के ऐतिहासिक ‘चक्का दा बाग’ क्रॉसिंग प्वाइंट पर पहुंचाया.
बुधवार को वहां भारतीय और पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के बीच कानूनी दस्तावेजों का आदान-प्रदान हुआ और सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सामिया को सही-सलामत पाकिस्तान के हवाले कर दिया गया. अपने परिवार से बिछड़ी 17 साल की बच्ची को जिस तरह भारत ने सुरक्षित वापस भेजा, उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सेना केवल देश की रक्षा ही नहीं करती, बल्कि मानवीय मूल्यों की मिसाल भी पेश करती है.
गोलियों की गूंज के बीच इंसानियत की जीत
कश्मीर की कटीली तारों और बारूदी सुरंगों के बीच अक्सर ऐसी कहानियां दबकर रह जाती हैं, लेकिन सामिया अजीम का मामला दिखाता है कि सख्त सुरक्षा पाबंदियों के बीच भी इंसानियत जिंदा है. सीमा पार से जब लगातार घुसपैठ और आतंकवाद की साजिशें रची जाती हैं, तब भारत द्वारा एक भटकी हुई नाबालिग बलूच/पाकिस्तानी लड़की को पूरे सम्मान के साथ वापस भेजना पूरी दुनिया को एक बड़ा संदेश देता है. ये घटना साबित करती है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था जितनी मजबूत है, उसका दिल भी उतना ही बड़ा है.