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Bulandshahr Ring Road: बुलंदशहर को जाम से राहत दिलाने के लिए 20 किमी लंबी रिंग रोड का प्रस्तावित एलाइनमेंट NHAI मुख्यालय भेजा गया है. यह सड़क अलीगढ़-गाजियाबाद NH-34 से शुरू होकर मेरठ-बदायूं, अनूपशहर और स्याना स्टेट हाईवे होते हुए इमलिया गांव के पास मेरठ NH-335 से जुड़ेगी. दिसंबर अंत तक भूमि अधिग्रहण शुरू होने की उम्मीद है. फोरलेन बाईपास का काम भी साथ चलेगा.
बुलंदशहर रिंग रोड रूट तय: इमलिया गांव के पास NH-335 से जुड़ेगा NH-34 (फोटो-AI)
Bulandshahr Ring Road: बुलंदशहर शहर को भीषण जाम से राहत दिलाने के लिए रिंग रोड का खाका पूरी तरह तैयार कर लिया गया है. इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे अहम पहलू इसका रूट है, जो शहर के अंदर घुसे बिना कई प्रमुख मार्गों को आपस में जोड़ेगा. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने प्रस्तावित एलाइनमेंट को हरी झंडी के लिए मुख्यालय भेज दिया है. वहां से अंतिम मंजूरी मिलते ही जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई तेज कर दी जाएगी.
20 किलोमीटर लंबा होगा रूट, इन प्रमुख रास्तों को जोड़ेगी नई सड़क
प्रस्तावित योजना के मुताबिक, यह रिंग रोड लगभग 20 किलोमीटर लंबी होगी. इसका निर्माण अलीगढ़-गाजियाबाद एनएच-34 से शुरू होगा. इसके बाद यह मेरठ-बदायूं स्टेट हाईवे, बुलंदशहर-अनूपशहर स्टेट हाईवे और बुलंदशहर-स्याना गढ़मुक्तेश्वर स्टेट हाईवे को क्रॉस करते हुए इमलिया गांव के पास पहुंचेगी. यहां से इसे सीधे बुलंदशहर-मेरठ एनएच-335 से जोड़ दिया जाएगा. इस कनेक्टिविटी से भारी वाहनों को शहर के भीतर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
दिसंबर के अंत तक जमीन अधिग्रहण शुरू होने की उम्मीद
जागण की खबर के मुताबिक, रिंग रोड के निर्माण को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि दिसंबर के अंत तक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. एनएचएआई के परियोजना निदेशक (पीडी) शेष नाथ यादव के अनुसार, रिंग रोड के साथ-साथ अलीगढ़-गाजियाबाद एनएच-34 और बुलंदशहर-मेरठ एनएच को जोड़ने वाले फोरलेन बाईपास का निर्माण भी एक साथ शुरू कराने की रूपरेखा बनाई गई है. मुख्यालय से वित्तीय और तकनीकी स्वीकृति मिलते ही काम आगे बढ़ेगा.
2020 में बना था 750 करोड़ का एस्टीमेट, अब पकड़ रहा रफ्तार
साल 2020 में तत्कालीन डीएम ने 750 करोड़ रुपये का एस्टीमेट शासन को भेजा था, लेकिन उनके तबादले के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था. इससे पहले सरकार ने 2020 में बुलंदशहर-मेरठ सफर आसान करने के लिए एनएच-235 को फोरलेन बनाया था. वहीं साल 2024 में प्रशासन ने सदर तहसील के छह और सिकंदराबाद के एक गांव सहित सात गांवों की 27 हेक्टेयर जमीन का किसानों से बैनामा कराकर निशानदेही पूरी कर ली थी. अब मंजूरी मिलते ही वर्षों पुरानी मांग जमीन पर उतरेगी.