रेपो रेट बढ़ते ही क्या महंगा हो जाएगा होम लोन? एक्सपर्ट्स ने बताया प्रॉपर्टी बाजार पर होगा क्‍या असर

रेपो रेट बढ़ते ही क्या महंगा हो जाएगा होम लोन? एक्सपर्ट्स ने बताया प्रॉपर्टी बाजार पर होगा क्‍या असर


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RBI Repo Rate Hike Impact : भारतीय रिजर्व बैंक ने आज, 7 अक्‍टूबर को रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ेातरी कर दी. ब्‍याज दर बढ़ने से आने वाले दिनों में होम लोन सहित कई तरह के कर्ज महंगे हो सकते हैं. क्‍या होम लोन की दरें तुरंत बढ़ जाएंगी? इसका प्रॉपर्टी मार्केट पर क्‍या असर होगा? आइये एक्‍सपर्ट्स से जानते हैं.

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ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी का असर अफोर्डेबल और कम कीमत वाले घरों पर ज्‍यादा दिखेगा. (Photo : Canva)

नई दिल्‍ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की बढ़ोतरी कर दी है. इस फैसले से होम और कार लोन महंगे हो सकते हैं. लेकिन, राहत की बात यह है कि त्योहारी सीजन के चलते इस बढ़ोतरी का पूरा बोझ अभी ग्राहकों पर नहीं आएगा. रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स के अनुसार, शार्ट टर्म में हाउसिंग मार्केट पर कोई बड़ा ब्रेक लगने के आसार नहीं हैं. JLL इंडिया के सीनियर डायरेक्टर (रिसर्च एंड REIS) रोहन शर्मा के मुताबिक, 25 बेसिस प्वाइंट का यह इजाफा इतना बड़ा नहीं है कि प्रॉपर्टी बाजार में खलबली मचा दे. होम लोन बाजार अब भी कंपीटिटीव बना हुआ है और अच्छे क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को 8% से कम ब्याज दर पर लोन मिल सकता है.

सीएनबीसी- टीवी18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, रोहन शर्मा का कहना है कि जब बैंक रेपो रेट में बढ़ोतरी को अपने लेंडिंग रेट्स में पास करेंगे, तब फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन की ब्याज लागत बढ़ेगी. आमतौर पर बैंक ईएमआई बढ़ाने के बजाय लोन का टेन्योर बढ़ा देते हैं. नया होम लोन लेने वालों के ब्‍याज दर थोड़ी महंगी होंगी. इससे उन्‍हें ज्‍यादा ईएमआई चुकानी होगी. शर्मा के अनुसार, त्योहारी सीजन नजदीक होने के कारण बैंक और रियल एस्टेट डेवलपर रेपो रेट में हुई बढ़ोतरी का बोझ तुरंत ग्राहकों पर डालने से बचेंगे. इस वृद्धि का वास्तविक असर मध्यम अवधि में ही देखने को मिल सकता है जब बैंक धीरे-धीरे ब्याज दरों में इजाफा करेंगे.

किफायती घरों की मांग पर ज्‍यादा असर

रोहन शर्मा के अनुसार, बढ़ी हुई ब्याज दरों का असर हाउसिंग मार्केट के अलग-अलग सेगमेंट पर एक जैसा नहीं होगा. ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी का असर अफोर्डेबल और कम कीमत वाले घरों पर ज्‍यादा दिखेगा. इसका कारण यह है कि इन सेगमेंट के घर खरीदारों की आर्थिक स्थिति ज्‍यादा मजबूत नहीं होती. ईएमआई में हल्का सा उछाल भी उनके बजट को बिगाड़ सकता है, जिससे इस वर्ग में बिक्री धीमी होने का खतरा है. महंगे और प्रीमियम प्रोजेक्ट्स में खरीदारों की बाइंग पावर मजबूत है. यह वर्ग बढ़ी हुई ब्याज लागत को आसानी से वहन कर सकता है, इसलिए इस सेगमेंट की डिमांड जस की तस बनी रहने की उम्मीद है.

बिल्‍डर्स पर रेपो रेट बढ़ने का क्‍या होगा असर

शर्मा का कहना है कि रियल एस्टेट डेवलपर्स पर भी रेपो रेट में वृद्धि का असर अलग-अलग होगा. बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों को आमतौर पर कम ब्‍याज दरों पर फाइनेंसिंग की सुविधा मिलती है. इसलिए बड़े डेवलपर्स पर इसका असर कम होगा, लेकिन छोटे बिल्‍डर्स पर दबाव जरूर बढ़ेगा. रियल एस्टेट डेवलपर्स पहले से ही सीमेंट, सरिया और सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते बढ़ती लागत का सामना कर रहे हैं. छोटे बिल्डरों के लिए फंडिंग महंगी होगी, जिससे उनके मार्जिन पर असर पड़ेगा. अनिश्चित समय तक बोझ उठाने की गुंजाइश न होने के कारण आगे चलकर वे इस लागत को प्रॉपर्टी की कीमतों में जोड़ सकते हैं.

RBI ने उठाया नपा-तुला कदम

अर्बन मनी (Urban Money) के को-फाउंडर और चीफ बिजनेस ऑफिसर अमित प्रकाश सिंह के अनुसार, इस बढ़ोतरी को पश्चिम एशिया के तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक महंगाई के परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए. RBI की प्राथमिकता देश में आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है. यह कदम बाजार को झटका देने के लिए नहीं लिया गया है. रियल एस्टेट के लिए यह कदम किसी बड़े व्यवधान के बजाय एक मापी-तुली कार्रवाई है. हाउसिंग की मांग बुनियादी तौर पर मजबूत बनी हुई है और एक स्थिर व्यापक आर्थिक माहौल अंततः इस सेक्टर के लिए उधारी लागत में निकट अवधि के मामूली बदलाव से ज्यादा महत्वपूर्ण होगा.

सैविल्स इंडिया (Savills India) के सीईओ अनुराग माथुर का कहना है कि रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का फैसला वैश्विक अनिश्चितता, महंगा होते कच्‍चे तेल और खाने-पीने के सामान की बढ़ती कीमतों और अन्य आर्थिक चिंताओं को देखते हुए लिया गया है. फाइनेंसिंग लागत बढ़ने से निकट अवधि में हाउसिंग डिमांड पर दबाव पड़ सकता है, खासकर अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग सेगमेंट में. माथुर का कहना है कि फिलहाल कमर्शियल रियल एस्टेट की मांग काफी हद तक सही दिशा में बनी हुई है. मध्यम अवधि में रियल एस्टेट सेक्टर का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है. मौजूदा माहौल में रियल एस्टेट समेत सभी क्षेत्रों में कैपिटल डिसिप्लिन पर ध्‍यान देने की जरूरत है.



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