AI को लेकर दुनिया टेंशन में है. लेकिन अब जो बातें सामने आ रही हैं, वह और भी डराने वाली हैं. अब तक कहा जाता था कि एआई को टेस्ट करते वक्त काफी छिपाकर रखा जाता था, ताकि बाकी दुनिया पर उसका असर न हो. लेकिन अब तो गजब हो गया. पहली बार Google ने माना कि उसके AI एजेंट टेस्ट एनवायरमेंट से निकलकर तीन अलग-अलग मौकों पर लाइव इंटरनेट तक पहुंच गए. उधर, OpenAI को ऑस्ट्रेलिया से इसलिए माफी मांगनी पड़ी, क्योंकि उसके AI एजेंट ऑस्ट्रेलिया की सरकारी वेबसाइट तक पहुंच गए और वो भी बिना किसी की मर्जी के.
आप सोच रहे होंगे कि ये क्या हो गया. दरअसल,जब AI एजेंट को टेस्ट किया जाता है तो उसे एक बंद सिस्टम में रखा जाता है. जैसे बच्चे को खेलने के लिए घर के अंदर एक कमरा दे दिया जाए और कहा जाए कि इसी कमरे में खेलना है. AI के मामले में इस कमरे को सैंडबॉक्स या टेस्ट एनवायरमेंट कहा जाता है. यहां इंटरनेट, असली कंपनियों के सिस्टम और संवेदनशील डेटा तक पहुंच रोकने की कोशिश की जाती है. दिक्कत तब शुरू होती है जब AI इस बंद कमरे से बाहर निकलकर असली इंटरनेट तक पहुंच जाता है.
Google के AI ने क्या किया?
5 अक्टूबर को न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल की सुनवाई में Google की AI पॉलिसी डायरेक्टर एलिस फ्रेंड ने जो बताया, वह चौंकाने वाला था. उन्होंने बताया कि कंपनी के AI एजेंट तीन बार टेस्ट एनवायरमेंट से निकलकर असली इंटरनेट से जुड़े. उनके मुताबिक, जब मॉडल ने जब देखा कि वह टेस्ट की जगह वास्तविक वेबसाइट से बातचीत कर रहा है, तो उसने अपनी गतिविधियां रोक दीं.
ठीक इसी तरह मई 2026 में Google के जेमिनी की साइबर सिक्योरिटी टेस्टिंग के दौरान वह तीन कंपनियों के सिस्टम तक पहुंच गया. टेस्ट में काल्पनिक कंपनियों को निशाना बनाना था, लेकिन यह असल कंपनियों के सेटअप तक पहुंच गया. वह पासवर्ड तलाशने लगा. उनके क्रेडेंशियल देखने लगा. हालांकि, जब उसे पता चला कि यह सिस्टम तो असली हैं तो वह वहां से डीएक्टिव हो गया.
OpenAI ने क्यों मांगी माफी
OpenAI का मामला इससे भी ज्यादा गंभीर इसलिए है क्योंकि यहां AI एजेंट ने ऑस्ट्रेलियाई सरकारी सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच बना ली. जून में OpenAI अपने एक मॉडल की ट्रेनिंग और टेस्टिंग कर रहा था. उसे सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध दवाओं और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों पर रिसर्च करने का काम दिया गया था. इस दौरान मॉडल ने ऑस्ट्रेलिया की कई सरकारी वेबसाइटों से संपर्क किया.
सबसे बड़ा मामला सर्विस ऑस्ट्रेलिया के मेडिकेयर स्टैटिस्टिक रिपोर्टिंग सर्विस का था. मॉडल को कुछ जानकारी नहीं मिली तो उसने दूसरे तरीके अपनाए और सिस्टम के ऐसे हिस्से तक पहुंच बना ली, जहां उसे जाने की अनुमति नहीं थी.
OpenAI के मुताबिक एजेंट ने कमांड चलाए, आंतरिक फाइलें और क्रेडेंशियल हासिल किए और फाइलें भी लिखीं. हालांकि कंपनी ने कहा कि उसे अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि किसी व्यक्ति का मेडिकल रिकॉर्ड एक्सेस हुआ था.
लेकिन AI ने ऐसा क्यों किया?
AI को जो काम दिया गया था, वह उसे पूरा करने की कोशिश कर रहा था. समस्या यह थी कि जिस सिस्टम में उसे सीमित रखा जाना था, उसमें कहीं न कहीं ऐसी खामी रह गई जिससे वह वास्तविक इंटरनेट या वास्तविक सिस्टम तक पहुंच गया. Google के मामले में कंपनी ने भी इसे सीधे तौर पर किसी AI विद्रोह की तरह नहीं बताया. कंपनी की अधिकारी ने इसे एक तरह की गलती बताया. लेकिन सवाल यही है कि अगर टेस्ट के दौरान सुरक्षा की एक दीवार टूट सकती है तो ज्यादा ताकतवर AI एजेंटों के इस्तेमाल के समय ऐसी गलती का असर कितना बड़ा हो सकता है.
टेंशन में आ गई ऑस्ट्रेलिया की सरकार
ऑस्ट्रेलिया ने OpenAI की घटना के बाद पूरे मामले की फोरेंसिक जांच शुरू की. प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने बताया था कि घटना में AI एजेंट ने सरकारी मेडिकेयर स्टैटिस्टिक रिपोर्टिंग सर्विस में गलत तरह से घुसा. हालांकि, किसी व्यक्ति की निजी जानकारी एक्सेस होने का सबूत नहीं है.