इंटरनेट और सोशल मीडिया ने लोगों को जुड़ने का खूब मौका दिया है. लेकिन इसी इंटरनेट की एक काली दुनिया भी है, जो इस ‘नेटवर्किंग’ का इस्तेमाल किशोरों और खासकर नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाने के लिए कर रही है. ऐसा ही एक नेटवर्क है CVLT (कल्ट) जिसने दुनियाभर की हजारों नाबालिग लड़कियों को ‘सेक्सटॉर्शन’ का शिकार बनाया है. इस ग्रुप से जुड़े लोग महिलाओं, यहूदियों और LGBTQ समुदाय के प्रति नफरत भरे विचार रखते हैं. हैरानी की बात ये है कि पेरिस में इस नेटवर्क के खिलाफ मुकदमा चल रहा है, जिसका मुख्य आरोपी एक 29 साल का भारतीय लड़का रोहन संदीप राणे है. आरोप है कि उसने CVLT (कल्ट) नाम के एक ऑनलाइन नेटवर्क का लीड किया है, जो नाबालिग लड़कियों को फंसाकर उनका यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना करता था. रोहन का ट्रायल इसी सोमवार से पेरिस में शुरू हुआ है.
क्या है CVLT (कल्ट)?
रोहन राणे पढ़ाई के लिए फ्रांस गया था. वह फ्रांस के एंटीब्स क्षेत्र में एक बिजनेस स्कूल में पढ़ा और बाद में फिटनेस कोच के रूप में काम करने लगा. इनवेस्टिगेशन में पता चला कि इसी दौरान उसने Discord (डिसकॉर्ड) पर CVLT नेटवर्क को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई. CVLT कोई सामान्य ऑनलाइन ग्रुप नहीं था. जांच एजेंसियों के अनुसार यह डिसकॉर्ड प्लेटफॉर्म पर सक्रिय एक इंटरनेशनल नेटवर्क था, जिसके सदस्य खुद को ‘Warlords’ कहते थे. अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों के अनुसार यह नेटवर्क नाजीवाद, बाल यान शोषण जैसे विचारों को बढ़ावा देता था. यहां नाबालिग लड़कियों को फंसा कर उन्हें यौन शोषण के लिए ब्लैकमेल किया जाता था. ये मामला कितना गंभीर है, ये इस बात से समझा जा सकता है कि रोहन राणे पर नाबालिगों के खिलाफ यातना, यौन शोषण से जुड़ी सामग्री फैलाने, संगठित जबरन वसूली और अन्य गंभीर अपराधों समेत लगभग एक दर्जन आरोप लगाए गए हैं.
रोहन राणे पढ़ाई के लिए फ्रांस गया था. वह फ्रांस के एंटीब्स क्षेत्र में एक बिजनेस स्कूल में पढ़ा और बाद में फिटनेस कोच के रूप में काम करने लगा. (फोटो साभार AI)
इंस्टाग्राम पर फंसाई जाती थीं लड़कियां
फ्रांसिसी जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क काफी प्लानिंग से काम करता था. सदस्य पहले इंस्टाग्राम और बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी किशोर लड़कियों को ढूंढते थे जो इमोशनली कमजोर हों या अकेलापन महसूस कर रही हों. उनसे दोस्ती की जाती थी और फिर बातचीत डिसकॉर्ड पर ले जाई जाती थी. कुछ समय बाद उनसे निजी तस्वीरें या वीडियो हासिल किए जाते थे. इसके बाद शुरू होता था “सेक्सटॉर्शन” यानी यौन ब्लैकमेल का भद्दा खेल. लड़कियों को धमकी दी जाती थी कि अगर उन्होंने आदेश नहीं माने तो उनकी निजी तस्वीरें इंटरनेट पर फैला दी जाएंगी.
यह पूरा मामला पहली बार 2020 में सामने आया था. अमेरिका की संस्था ‘नेशलन सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लायटिड चिल्ड्रन (NCMEC) को कुछ संदिग्ध ऑनलाइन सामग्री मिली, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय जांच शुरू हुई. बाद में फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपोल सहित कई एजेंसियां जांच में शामिल हुईं. पेरिस की कोर्ट में चल रहे इस मामले में आरोप है कि ब्लैकमेल के जरिए पीड़ितों को बेहद खतरनाक और अपमानजनक हरकतें करने के लिए मजबूर किया जाता था. Firstpost की रिपोर्ट बताती है कि कुछ लड़कियों को खुद को चोट पहुंचाने, शरीर पर कट लगाने, बेल्ट से गला दबाने, यहां तक कि आत्महत्या की कोशिश जैसे काम करने के लिए उकसाया गया. इन लड़कियों से कहा जाता कि वो अपने खुद के बाल काटें और उसे खाएं, खुद को घूंसा मारें. कई मामलों में तो उनसे यौन प्रकृति की गतिविधियों के वीडियो बनवाए गए. इस मामले ने दुनिया का ध्यान तब खींचा जब जांचकर्ताओं को पता चला कि कुछ पीड़ितों को अपने शरीर पर आरोपियों के नाम या नाजी प्रतीक गोदने के लिए मजबूर किया गया था. एक 12 वर्षीय लड़की को अपने शरीर पर ‘रोहन’ लिखने के लिए मजबूर किया गया था. ये सब इस कदर बढ़ता था कि कई बार लड़कियों को ‘लाइवस्ट्रीम वीडियो में खुद की जान लेने’ के लिए तक कहा गया.
फ्रांसीसी जांच एजेंसियों के अनुसार, रोहन राणे से जुड़े मामले में करीब 20 पीड़ितों की पहचान हुई है, जबकि पूरे CVLT नेटवर्क से जुड़े मामलों में विभिन्न देशों के लगभग 100 पीड़ितों का पता चला. इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, एस्टोनिया, नीदरलैंड और अन्य देशों के बच्चे और किशोर शामिल हैं. अधिकांश पीड़ितों की उम्र 12 से 18 वर्ष के बीच बताई गई है. जांच एजेंसियों का कहना है कि इंटरनेट पर ऐसे कई गुप्त नेटवर्क मौजूद हैं जो कमजोर किशोरों को इमोशनली कंट्रोल कर उन्हें शोषण और हिंसा के चक्र में फंसा देते हैं.