Catholic Church and Castrati: कौन थे यूरोप के वो लड़के, ज‍िन्‍हें गायक बनाने के ल‍िए क‍िया गया ‘नपुंसक’?

Catholic Church and Castrati: कौन थे यूरोप के वो लड़के, ज‍िन्‍हें गायक बनाने के ल‍िए क‍िया गया ‘नपुंसक’?


16वीं सदी में इटली में छोटे-छोटे लड़कों के अंडकोष काटकर उन्‍हें नपुंसक बनाने का काम कोई और नहीं बल्‍कि उनका खुद का परिवार ही करता था, और उम्‍मीद इस बात की कि अब ये हमें गरीबी की राह से आगे निकालकर ले जाएंगा… ये है कहानी 16वीं सदी के कैस्‍ट्रेती गायकों की, ज‍िनका गाना 400 सालों तक दुनियाभर में चर्चा का व‍िषय बना. कैस्‍ट्रैती सिंगरों का गाना सुनना अमीरों का व‍िशेषाध‍िकार था, और इसके ल‍िए उस दौर में कई मासूम बच्‍चों से उनका बचपन छीना गया.

औरतों पर पाबंदी, तो बच्‍चों को बनाया गायक
कैस्‍ट्रेती गायकों की कहानी शुरू होती है 16वीं सदी के इटली के चर्चों और धार्मिक गायन-मंडलियों से. चर्च में गाना गाने की परंपरा काफी पुरानी है. ये गाने कई लोग म‍िलकर गाते थे. जिसमें कुछ भारी आवाज में, कुछ मध्‍ययम और कुछ लोग बेहद ऊंचे सुर में गाते थे. उस दौर में चर्च में गाना गाने के ल‍िए ऐसे पुरुष चाहिए थे, ज‍िनकी आवाज काफी ऊंचे नोट्स पर भी गा सकें. ऊंची आवाज का ये काम वैसे मह‍िलाओं से पूरा हो सकता था. लेकिन उस दौर में कैथोल‍िक चर्च में महिलाओं को तो बोलने तक की आजादी नहीं थी, तो गाने की तो बात ही क्‍या करें. ऐसे में सवाल उठा, ऊंची आवाज कहां से लाई जाए. तो सोचा गया ये काम बच्‍चे करेंगे. लेकिन सिर्फ लड़के, ज‍िनकी आवाज ऊंची थी. लेकिन असली द‍िक्‍कत थी कि जैसे ही ये लड़के युवा होते या प्‍यूबर्टी हिट करती, इनकी आवाज भी मर्दाना यानी भारी हो जाती.

लोगों ने हटा द‍िए अपने लड़कों
यानी ज‍िन बच्‍चों को चर्च में ऊंची आवाज में गाने के ल‍िए तैयार क‍िया जाए, आगे चलकर उनकी आवाज भारी हो जाए. तो इसी परेशानी से न‍िपटने के ल‍िए तरीका न‍िकाला गया ‘केस्‍ट्रेशन’ यानी बच्‍चों को बांध्‍यीकरण करने का. दरअसल लड़के जैसे-जैसे बड़े होते हैं और उनकी पप्‍यूबर्टी आती है, अंडकोष टेस्‍टेस्‍टोरोन हार्मोन बनाते हैं. इसी हार्मोन की वजह से हमारा स्वरयंत्र बड़ा होता है और पुरुषों की आवाज़ भारी हो जाती है. लेकिन प्‍यूबर्टी से पहले अंडकोष हटा दिए जाएँ, तो आवाज़ का बचपन वाला ऊँचा स्वर बना रह सकता था. यही तरीका अपनाया गया इन बच्‍चों को चर्चा का गायक बनाने के ल‍िए. इस व‍िषय पर ल‍िखी गई क‍िताबें बताती हैं कि ऑपरेशन के तरीके अलग-अलग थे. कहीं अंडकोष हटाए जाते थे और कहीं उनकी रक्त-आपूर्ति रोकने की कोशिश की जाती थी. ये सब काफी दर्दभरा, जोखिम वाला होता था, ज‍िसकी वजह से संक्रमण, रक्तस्राव, विकलांगता या मृत्यु तक हो सकती थी.

कैस्‍ट्रैती के इतिहास पर कई क‍िताबें ल‍िखी गईं. पैट्रिक बार्बियर की ‘The World of the Castrati’ इस प्रथा और इन गायकों की शुरुआत, उनके साथ होने वाले सर्ज‍िकल प्रोसेस, उनकी कमाई जैसे इतिहास के पहलुओं पर खुलकर बात करती है. 8 से 10 साल के बच्‍चों के टेस्‍ट‍िकल्‍स यानी अंडकोष हटाने शुरू क‍िए गए. इससे इन लड़कों की आवाज तो ऊंच बनी रहती पर शरीर व्‍यस्‍क हो जाता था. इन लड़कों की आवाज बहुत शक्‍तिशली होती, फेफड़े विकसित हो चुके थे तो वो लंबी सांस लेते और खूब ऊंचा गाते. इटली से शुरू हुई ये प्रथा धीरे-धीरे पूरे यूरोप में स्‍वीकार होने लगी क्‍योंकि संगीतप्रेमी खूब थे और ऐसी ऊंची आवाजों को खूब पसंद क‍िया जाता था.

अमीरों का शौक बन गए कैस्‍ट्रेती स‍िंगर
यही वजह थी कि चर्च के ये कैस्‍ट्रती स‍िंगर्स अपनी ऊंची और स्‍पेशल आवाज के चलते ओपेरा के सुपरस्‍टार बन गए. इन गायकों की मांग उस दौर में इनती बढ़ी कि कई गरीब परिवार अपने बेटों को कैस्‍ट्रेती गायक बनाने में लग गए. उन्‍हें लगता था कि यही उनका जीवन संवारेगा और उन्‍हें इस गरीबी से बचा लेगा. Surgery and Selfhood in Early Modern England: Altered Bodies and Contexts of Identity के पहले चेप्‍टर में ल‍िखा गया है, ‘कैस्ट्रती दुर्लभ और प्रतिभाशाली दोनों होने के कारण बहुत कीमती हो गए. लेकिन इनकी कीमत कैसे आँकी जाए, यह एक जटिल मामला था. इन गायकों को सुनना सिर्फ व्यक्तिगत पसंद की बात नहीं थी, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा का भी मामला था. कैस्ट्रती के क‍िसी इवेंट में दिखना, या उससे भी बेहतर, खुद उनका प्रोग्राम आयोज‍ित कराना उस दौर में अमीरी और क्‍लासिक टेस्‍ट की पहचान बन गया था.

कैस्ट्रती के शुरुआती दिनों के बारे में हेलेन बेरी कहती हैं, ‘कैस्ट्रती का गाना सुनना ऊंचे तबके के लोगों का विशेषाधिकार था. यह शक्तिशाली पुरुषों के लिए निजी आनंद था, जिनकी शारीरिक इंद्रियों की सेवा हर तरह की विलासिता से की जाती थी. जैसे जीभ के लिए काली मिर्च और मसाले, स्पर्श के लिए फर का काम करते थे, वैसे ही कानों और कभी-कभी आँखों के लिए भी कैस्ट्रती का काम था.’

16वीं सदी से लगभग 400 सालों तक इन सिंगर्स का वर्चस्‍व यूरोप में खूब रहा. फारिनेली सबसे प्रस‍िद्ध और अमीर कैस्‍ट्रेती सिंगर थे. वे खूब मशहूर हुए थे. लेकिन धीरे-धीरे ये प्रथा घटती गई. 19वीं सदी में ओपरा में महिलाओं को जगह म‍िलने लगी. दूसरी तरफ कैस्‍ट्रेती सिंगरों का नैतिक रूप से व‍िरोध होने लगा. इसी सब के चलते 1903 में वैटिकन ने इसे गैरकानूनी घोषित कर दिया. आखिरी केस्‍ट्रेटो एलसेंड्रो मोरेस्‍ची थे ज‍िनकी मृत्‍यु 1922 में हो गई. ऐसा नहीं है कि लोगों ने इसके बाद अचानक अपने लड़कों को केस्‍ट्रेटो बनाना छोड़ द‍िया. बाद में छ‍िपकर और झूठ बोलकर भी ऐसे गायक तैयार किए जाते रहे.

हालांकि इस कहानी को सुनने के बाद अगर आपका मन हो कि क‍िसी केस्‍ट्रेटो का गाना सुना जाए तो आपको बता दें कि ये उस दौर के गायक थे जब रिकॉर्डिंग की तकनीक नहीं थी. लेकिन आज भी इंटरनेट पर आखिरी केस्‍ट्रेटो मोरेस्‍ची की र‍िकॉर्ड‍िंग मौजूद है, ज‍िसे वैट‍िकन स‍िटी में र‍िकॉर्ड क‍िया गया था.



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