दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबाई की फ्लाइट हाईजैक कांड पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का पहला और सबसे बड़ा आधिकारिक बयान सामने आ गया है. यूएई सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी और राष्ट्रपति के सलाहकार ने इस पूरी घटना को आधिकारिक तौर पर एक ‘टेरर एक्ट’ करार दिया है. इसके साथ ही यूएई ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की निडरता और असाधारण बहादुरी की जमकर तारीफ की है और उन्हें असली हीरो बताया है. यूएई ने साफ कर दिया है कि वह इस घटना को किसी भी हाल में हल्के में नहीं लेगा और इसकी तह तक जाने के लिए एक बहुत बड़ी जांच शुरू कर दी गई है.
UAE का पहला बड़ा बयान: ‘ये कोई हादसा नहीं, बल्कि टेरर एक्ट है’
हवा में हुई इस खौफनाक वारदात के बाद पूरी दुनिया की नजरें यूएई के रुख पर टिकी हुई थीं. आखिरकार यूएई के राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार ने आगे आकर इस मामले पर सरकार का आधिकारिक पक्ष रखा. ये पहला मौका है जब यूएई के किसी इतने बड़े अधिकारी ने इस घटना को खुलकर ‘आतंकी हमला’ कहा है.
यूएई अधिकारी ने कहा कि प्लेन के कॉकपिट के अंदर जिस तरह से हमलावर ने खूनी खेल खेलने की कोशिश की, वह सीधे तौर पर कट्टरपंथ और आतंकवाद से जुड़ा मामला नजर आता है. यूएई सरकार ने माना है कि अगर कैप्टन स्मित मच्छार उस वक्त सही फैसला न लेते, तो ये घटना एक बहुत बड़े और भयावह हादसे में बदल सकती थी. यूएई प्रशासन ने कहा है कि आतंकवाद और चरमपंथ का मुकाबला करने के लिए हर समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है, और इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बर्दाश्त की जाएगी.
UAE का ‘टेरर एक्ट’ बताना क्यों बड़ी बात?
यूएई का इस घटना को सीधे ‘टेरर एक्ट’ मानना इसलिए बहुत बड़ी बात है क्योंकि यूएई अपनी अंतरराष्ट्रीय साख और सुरक्षा छवि को लेकर बहुत सतर्क रहता है और आसानी से किसी घटना पर ‘आतंकवाद’ का ठप्पा नहीं लगाता. दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में हुए इस हमले को आतंकी कृत्य बताकर यूएई ने साफ कर दिया है कि ये कोई मामूली आपराधिक वारदात या हवा में हुआ व्यक्तिगत झगड़ा नहीं था, बल्कि इजरायल और अरब देशों के बीच शांति व रिश्तों को बिगाड़ने की एक गहरी साजिश थी.
इस आधिकारिक बयान के बाद अब मामले की जांच मामूली पुलिस केस के बजाय कड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी कानूनों के तहत होगी, जिससे हमलावर के पीछे छिपे पूरे नेटवर्क, आकाओं और फंडिंग करने वालों को बेनकाब करने की राह खुल गई है.
30 सितंबर की खौफनाक रात: मौत से कैसे लड़े कैप्टन स्मिथ मच्छार
30 सितंबर को फ्लाईदुबाई की फ्लाइट FZ1073 ने दुबई से इजरायल के तेल अवीव शहर के लिए उड़ान भरी थी. प्लेन में कुल 174 यात्री और 8 क्रू मेंबर्स सवार थे. सब कुछ बिल्कुल ठीक चल रहा था और प्लेन सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र के ऊपर से गुजर रहा था. तभी अचानक कॉकपिट के अंदर हड़कंप मच गया. कॉकपिट में मौजूद हमलावर ने अचानक कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया. हमलावर का इरादा प्लेन का कंट्रोल अपने हाथ में लेकर उसे क्रैश करने का था. अचानक हुए इस हमले से कॉकपिट के अंदर चीख-पुकार मच गई. कैप्टन स्मित बुरी तरह से लहूलुहान हो गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.
हमलावर के चाकू के वार से कैप्टन स्मित गंभीर रूप से घायल हो चुके थे और उनके शरीर से लगातार खून बह रहा था. लेकिन इतने दर्द और खौफ के बीच भी उनके दिमाग में सिर्फ एक ही बात चल रही थी, प्लेन में सवार 182 मासूम लोगों की जान बचाना.
कैप्टन स्मित ने तुरंत कॉकपिट का दरवाजा अंदर से अनलॉक कर दिया. जैसे ही दरवाजा खुला, प्लेन में मौजूद क्रू मेंबर्स और कुछ बहादुर यात्री तुरंत कॉकपिट के अंदर घुस गए. सबने मिलकर अपनी जान की बाजी लगाई और उस सनकी हमलावर को दबोचकर जमीन पर पटक दिया.
हमलावर के काबू में आने के बाद, प्लेन में सवार ऑफ-ड्यूटी रिजर्व पायलटों ने तुरंत फ्लाइट का कंट्रोल संभाला और प्लेन को सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट की तरफ मोड़कर सुरक्षित लैंड करा दिया. अगर कैप्टन स्मित उस चोट की हालत में दरवाजा अनलॉक न करते, तो बाहर के लोग अंदर नहीं आ पाते और एक बहुत बड़ा हादसा हो जाता.
यूएई में हाई-लेवल जांच शुरू: अटॉर्नी जनरल खुद संभाल रहे हैं कमान
क्योंकि ये प्लेन यूएई के झंडे तले रजिस्टर्ड था और फ्लाईदुबाई यूएई की एयरलाइन है, इसलिए इस पूरे मामले की कानूनी जांच का सीधा अधिकार यूएई के पास है. यूएई के विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि देश के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमद अल शम्सी ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूशन टीम का गठन कर दिया है. यूएई सरकार ने इस मामले में बहुत सख्त रुख अपनाया है और जांच टीम को हर एक पहलू की गहराई से पड़ताल करने के निर्देश दिए गए हैं.
- पहले से प्लान की गई साजिश: क्या इस हमले के पीछे किसी बड़े आतंकी संगठन की कोई साजिश या पहले से बनाई गई प्लानिंग थी?
- बाहरी कनेक्शन: क्या हमलावर को सीमा पार या विदेश में बैठे किसी आका से निर्देश मिल रहे थे?
- सुरक्षा में चूक: हमलावर कॉकपिट तक चाकू या हथियार ले जाने में कैसे कामयाब हुआ और इसके पीछे कहां लापरवाही हुई?
- हमले का मकसद: हमलावर का असली मकसद क्या था और उसके तार किन-किन कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं?
‘आतंकवाद के खिलाफ ढील बर्दाश्त नहीं’: यूएई का दुनिया को सख्त संदेश
यूएई के राष्ट्रपति के सलाहकार ने कैप्टन स्मित की तारीफ करते हुए पूरी दुनिया को एक बड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि आज के दौर में कट्टरपंथ और आतंकवाद का खतरा खत्म नहीं हुआ है, बल्कि ये नए-नए रूपों में सामने आ रहा है. ऐसे में हर नागरिक और सुरक्षा एजेंसी को हर पल मुस्तैद और सतर्क रहने की जरूरत है.
यूएई ने साफ शब्दों में कहा है कि शांतिप्रिय देशों के बीच सहयोग को तोड़ने या नागरिकों की सुरक्षा में सेंध लगाने वाली किसी भी कोशिश का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा. यूएई ने इस बात को दोहराया है कि कैप्टन स्मित जैसे जांबाज ही असली हीरो हैं, जो अपनी जान पर खेलकर दूसरों को बचाते हैं और आतंकवाद के नापाक मंसूबों पर पानी फेर देते हैं.
फ्लाईदुबाई की फ्लाइट FZ1073 पर हुआ ये हमला एक बेहद भयावह साजिश थी, लेकिन भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की दिलेरी ने मौत के मुंह से 182 जिंदगियों को खींच निकाला. यूएई द्वारा इसे आधिकारिक तौर पर ‘टेरर एक्ट’ करार देना बहुत बड़ी बात है. यूएई में शुरू हुई हाई-लेवल जांच से उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस पूरी आतंकी साजिश के पीछे छिपे चेहरों का पर्दाफाश होगा और दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलेगी.