एक ही मां के बच्चे हैं धरती, मंगल! फिर पालन-पोषण अलग क्यों? सौरमंडल का राज
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धरती और मंगल ग्रह दोनों एक मां के बच्चे हैं. आज से लगभग 4.5 अरब साल पहले धरती और मंगल ग्रह सौरमंडल के उसी एक घूमते हुए धूल और गैस के बादल से बने थे. हालांकि एक ही कॉस्मिक रेसिपी से बनने के बावजूद, पड़ोसी होने के नाते दोनों ग्रहों के विकसित होने और बनने का तरीका पूरी तरह से अलग था.
धरती और मंगल
क्या आपको सौरमंडल का खास राज पता है? ये बात अपनी धरती से जुड़ी हुई है. दरअसल धरती और मंगल ग्रह दोनों एक मां के बच्चे हैं. ये कैसे, इसे समझते हैं. दरअसल आज से लगभग 4.5 अरब साल पहले धरती और मंगल ग्रह सौरमंडल के उसी एक घूमते हुए धूल और गैस के बादल से बने थे. हालांकि एक ही कॉस्मिक रेसिपी से बनने के बावजूद, पड़ोसी होने के नाते दोनों ग्रहों के विकसित होने और बनने का तरीका पूरी तरह से अलग था. यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन के वैज्ञानिकों की तरफ से हाल ही में की गई स्टडी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. यह रिसर्च नेचर एस्ट्रोनॉमी नामक साइंटिफिक मैगजीन में पब्लिश हुई है.
यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन के ग्लोब इंस्टीट्यूट के रिसर्चर एंडर्स जोहानसन ने कहा कि सबसे हैरान करने वाला नतीजा यह रहा कि धरती और मंगल पूरी तरह से अलग-अलग प्रॉसेस के जरिए बने. कोई भी यही उम्मीद करेगा कि एक ही सौर मंडल में आसपास बने दो ग्रहों का निर्माण इतिहास एक जैसा रहा होगा, लेकिन ऐसा भी नहीं है.
दोनों ग्रहों के बनने का अलग गणित
सबसे पहले समझते हैं कि ग्रह निर्माण कैसे होता है? इस मॉडल में मुख्य रूप से दो चीजें अहम भूमिका निभाती हैं. पहला है पेबल एक्रिशन (Pebble Accretion) यानी छोटे-छोटे कंकड़ जैसी संरचनाओं का जुड़ना. और दूसरी है प्लेनेटेसिमल्स (Planetesimals) आकार की बड़ी ठोस चट्टानों की टक्कर.
रिसर्च के अनुसार दोनों ग्रहों का निर्माण इन दोनों प्रक्रियाओं के मेल यानी हाइब्रिड मॉडल से हुआ, लेकिन दोनों का रेशियो पूरी तरह से अलग था. वो कैसे, आइए समझते हैं.
- धरती का निर्माण: ग्लोब इंस्टीट्यूट के असिस्टेंट प्रोफेसर और रिसर्चर हाइयांग वांग के अनुसार धरती के मास का कम से कम 75 प्रतिशत यानी तीन-चौथाई हिस्सा दो शुरुआती प्रोटोप्लैनेट्स यानी कि शुरुआती ग्रह रूप के कंकड़ इकट्ठा करने की प्रक्रिया से बना है. केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही बड़ी चट्टानों के टकराने से जुड़ा.
- मंगल का निर्माण: इसके ठीक उलट, मंगल ग्रह के टोटल मास का 75 प्रतिशत तीन-चौथाई हिस्सा किलोमीटर आकार की बड़ी चट्टानों की भीषण टक्करों से बना है. केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही छोटे कंकड़ों के मिलने से तैयार हुआ.
कैसे सुलझा रहस्य
रिसर्चर ने कंप्यूटर सिमुलेशन और स्टैटिस्टिकल मॉडलिंग के जरिए ग्रहों के शुरुआती चरण के वोलाटाइल एलिमेंट्स का एनालिसिस किया. वैज्ञानिक यह जानने में सफल रहे कि 4.5 अरब साल पहले सौरमंडल में इन ग्रहों का बिल्डिंग ब्लॉक कैसा था.
इस नई खोज ने खगोल विज्ञान में लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद और बहस को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है कि हमारे सौरमंडल के चट्टानी ग्रह आखिरकार कैसे अस्तित्व में आए थे.