UP Shiksha Mitra Special TET 2026: UP शिक्षा मित्रों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, स्पेशल TET में शामिल होने की मांग खारिज

UP Shiksha Mitra Special TET 2026: UP शिक्षा मित्रों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, स्पेशल TET में शामिल होने की मांग खारिज


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up Shiksha Mitra Special TET 2026: उत्तर प्रदेश के शिक्षा मित्र लंबे समय से TET और नौकरी से जुड़ी राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से उन्हें बड़ा झटका लगा है. वसीम अहमद समेत 220 लोगों ने स्पेशल TET 2026 में शामिल होने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी. कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ सामान्य TET में बैठने की पात्रता होने के आधार पर कोई व्यक्ति विशेष TET में शामिल होने का दावा नहीं कर सकता.आखिर क्या है स्पेशल TET और शिक्षा मित्र इसमें शामिल होने की मांग क्यों कर रहे थे?

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UP Special TET 2026 Latest Update: यूपी के शिक्षा मित्रों के लिए झटका.

UP Shiksha Mitra Special TET 2026: उत्तर प्रदेश के शिक्षा मित्रों को स्पेशल टीईटी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है.लंबे समय से स्पेशल टीईटी में शामिल किए जाने की मांग कर रहे शिक्षा मित्रों को अब इस परीक्षा में बैठने का मौका नहीं मिलेगा.इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षा मित्रों को स्पेशल टीईटी 2026 में शामिल किए जाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है.कोर्ट ने साफ कहा कि केवल इस आधार पर कि कोई व्यक्ति सामान्य टीईटी में शामिल होने के योग्य है वह विशेष टीईटी में शामिल होने का दावा नहीं कर सकता.

इस मामले में कोर्ट ने 24 सितंबर को सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था.अब कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए शिक्षा मित्रों की मांग को खारिज कर दिया है.इस फैसले से उन शिक्षा मित्रों को बड़ा झटका लगा है जो स्पेशल टीईटी के जरिए शिक्षक के तौर पर अपनी नौकरी को बचाने या आगे शिक्षक भर्ती में शामिल होने का रास्ता तलाश रहे थे.

220 लोगों ने दाखिल की थी याचिका

शिक्षा मित्रों को स्पेशल टीईटी में शामिल किए जाने की मांग को लेकर वसीम अहमद समेत 220 अन्य लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.याचिका में मांग की गई थी कि शिक्षा मित्रों को भी उस विशेष टीईटी परीक्षा में बैठने का मौका दिया जाए जो राज्य सरकार ने पहले से सरकारी स्कूलों में नौकरी कर रहे शिक्षकों के लिए आयोजित करने का फैसला किया है.इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस मंजू रानी चौहान की सिंगल बेंच में हुई.24 सितंबर को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.अब अदालत ने याचिका खारिज कर दी है.

कोर्ट ने शिक्षा मित्रों की मांग क्यों खारिज की?

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता सिर्फ इसलिए विशेष परीक्षा में शामिल होने का दावा नहीं कर सकते क्योंकि वे सामान्य टीईटी में बैठने के लिए योग्य हैं.अदालत ने शिक्षा मित्रों की कानूनी स्थिति और पहले से नौकरी कर रहे शिक्षकों की स्थिति को अलग माना है.कोर्ट ने यह भी माना कि शिक्षा मित्रों की कानूनी स्थिति नौकरी कर रहे शिक्षकों से अलग है.अदालत के मुताबिक संविधान राज्य से उस अंतर को खत्म करने के लिए नहीं कहता जो किसी वैध कानूनी उद्देश्य पर आधारित हो यानी सिर्फ सामान्य टीईटी के लिए पात्र होना अपने आप में स्पेशल टीईटी में बैठने का अधिकार नहीं देता.इसी आधार पर हाईकोर्ट ने शिक्षा मित्रों की ओर से दाखिल याचिका को खारिज कर दिया.

क्या है स्पेशल TET, जिसे लेकर इतना विवाद है?

दरअसल उत्तर प्रदेश में उन शिक्षकों के लिए अलग से टीईटी आयोजित करने का फैसला लिया गया है जो इस समय सरकारी नौकरी में हैं और राज्य के अलग-अलग स्कूलों में पढ़ा रहे हैं.यह फैसला टीईटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सामने आया है.सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए टीईटी को अनिवार्य किया है.ऐसे में जो शिक्षक अभी सरकारी स्कूलों में नौकरी कर रहे हैं उन्हें अगले एक साल के भीतर टीईटी पास करना होगा.अगर वे निर्धारित समय में टीईटी पास नहीं कर पाते हैं तो उनकी नौकरी जाने की स्थिति बन सकती है.इसी को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में पहले से नौकरी कर रहे हजारों शिक्षकों को राहत देने के लिए उनके लिए अलग से टीईटी आयोजित करने का फैसला लिया है.इसे ही स्पेशल टीईटी कहा जा रहा है.इस परीक्षा में वही शिक्षक शामिल हो सकते हैं, जो पहले से सरकारी नौकरी में हैं और स्कूलों में पढ़ा रहे हैं.शिक्षा मित्रों की मांग इसी बात को लेकर थी कि उन्हें भी इस विशेष परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया जाए.

शिक्षा मित्रों की क्या मांग थी?

उत्तर प्रदेश में शिक्षा मित्र लंबे समय से अपनी नौकरी को पक्का करने की मांग करते रहे हैं.अब जब सरकारी नौकरी कर रहे शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी का रास्ता खुला तो शिक्षा मित्रों को इस परीक्षा से बाहर रखा गया.इसके बाद शिक्षा मित्रों की ओर से उन्हें भी विशेष टीईटी में शामिल करने की मांग उठाई गई.उनकी मांग थी कि उन्हें भी इस पात्रता परीक्षा में बैठने का अवसर दिया जाए ताकि टीईटी पास करने के बाद वे शिक्षक भर्ती में शामिल होने या अपनी स्थिति मजबूत करने का रास्ता तलाश सकें.इसी मांग को लेकर शिक्षा मित्रों की ओर से प्रदर्शन भी किए गए.इसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा और वसीम अहमद समेत 220 लोगों ने याचिका दाखिल की लेकिन अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनकी स्पेशल टीईटी में शामिल होने की उम्मीद को झटका लगा है.

कई शिक्षा मित्रों के लिए TET क्यों अहम है?

शिक्षा मित्रों में ऐसे भी कई लोग हैं जिन्होंने अभी तक टीईटी परीक्षा पास नहीं की है.ऐसे में शिक्षक भर्ती में शामिल होने या शिक्षक के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए उनके लिए टीईटी पास करना जरूरी हो जाता है.यही वजह है कि स्पेशल टीईटी में शामिल होने का मौका शिक्षा मित्रों के लिए अहम माना जा रहा था.उन्हें उम्मीद थी कि सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में पहले से पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए आयोजित की जा रही इस विशेष परीक्षा में उन्हें भी शामिल होने दिया जाएगा लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब उनकी याचिका खारिज कर दी है.कोर्ट के फैसले के मुताबिक केवल सामान्य टीईटी में बैठने की पात्रता के आधार पर शिक्षा मित्र स्पेशल टीईटी में शामिल होने का दावा नहीं कर सकते.इस फैसले के बाद शिक्षा मित्रों की ओर से स्पेशल टीईटी में शामिल होने की मांग को फिलहाल हाईकोर्ट से मंजूरी नहीं मिली है.



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