देहरादून: देहरादून में भाजपा पार्षद अमिता सिंह के घर डकैती के मामले में पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो घर में काम करने वाले नौकर भरत थापा का पुराना रिकॉर्ड सामने आया. पुलिस को नफीस पोर्टल से पता चला है कि भरत का दिल्ली में भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वह करीब डेढ़ साल जेल में रह चुका है. सबसे बड़ी बात यह है कि भरत को पार्षद के घर काम करते हुए सिर्फ 20 दिन हुए थे और इतने कम समय में ही उसने परिवार का भरोसा जीत लिया था.
पुलिस के मुताबिक, भरत ने इस वारदात की पहले से पूरी तैयारी कर रखी थी. उसे घर में रखे आभूषण और नकदी की जानकारी थी. आरोप है कि उसने अपने चार साथियों को भी बुला लिया था. वारदात वाली रात वह नशीला पदार्थ लेकर आया और खाना बनाते समय उसमें मिला दिया. परिवार के खाना खाने के बाद सभी लोग सोने चले गए. इसके बाद भरत ने अपने साथियों के साथ मिलकर घर से आभूषण और नकदी चोरी कर ली. परिवार के कुछ सदस्यों की आवाज से नींद खुली तो आरोपी मौके से भाग निकले.
20 दिन पहले ही दिल्ली से देहरादून आया था भरत
पुलिस के मुताबिक नेपाल मूल के भरत थापा को पार्षद की बेटी मेघा ने दिल्ली की एएस प्लेसमेंट सर्विस एजेंसी के जरिए काम पर रखा था. वह करीब 20 दिन पहले ही देहरादून आया था. इतने कम समय में उसने परिवार का भरोसा हासिल कर लिया और फिर घर की जरूरी जानकारी जुटा ली. अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि भरत को घर पर काम के लिए भेजने से पहले प्लेसमेंट एजेंसी ने उसका कितना वेरिफिकेशन किया था. पुलिस दिल्ली पुलिस से उसके पुराने रिकॉर्ड की पुष्टि करेगी. इसके साथ ही उस एजेंसी की भूमिका भी जांची जा रही है, जिसके जरिए उसे काम मिला था.
नफीस पोर्टल से सामने आया पुराना आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस को भरत के पुराने रिकॉर्ड की जानकारी नफीस पोर्टल के जरिए मिली. यह पुलिस का डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसकी मदद से किसी व्यक्ति की पहचान और आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी का मिलान किया जा सकता है. किसी संदिग्ध व्यक्ति की तस्वीर या उपलब्ध जानकारी के आधार पर पुलिस उसके पुराने मामलों और जेल रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी भी हासिल कर सकती है. इसी के जरिए देहरादून पुलिस को भरत के कथित पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी मिली है. देहरादून के एसपी सिटी शेखर सुयाल के मुताबिक, भरत के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी सामने आई है. अब दिल्ली पुलिस और संबंधित कंपनी से जानकारी लेकर यह पता लगाया जाएगा कि उसका वेरिफिकेशन किस तरह हुआ था.
घर में काम करने के लिए हुई थी भरत की एंट्री
पुलिस की जांच में सामने आया है कि भरत को दिल्ली की एएस प्लेसमेंट सर्विस एजेंसी के जरिए काम पर रखा गया था. अब पुलिस यह पता कर रही है कि एजेंसी ने उसे काम पर भेजने से पहले उसके पहचान पत्र, पते और पुराने रिकॉर्ड की जांच की थी या नहीं. अगर भरत का पुराना रिकॉर्ड पहले से मौजूद था, तो पुलिस यह भी देखेगी कि एजेंसी के वेरिफिकेशन में यह जानकारी क्यों नहीं सामने आई.
सर्वेंट एजेंसियों के वेरिफिकेशन पर भी उठे सवाल
इस घटना के बाद घरों में काम करने वाले लोगों को उपलब्ध कराने वाली प्लेसमेंट एजेंसियों के वेरिफिकेशन पर भी सवाल उठ रहे हैं. देहरादून में कई एजेंसियां घरेलू कामगार और दूसरे कर्मचारी उपलब्ध कराती हैं. आम तौर पर एजेंसियां कर्मचारी के पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज लेने और पुलिस वेरिफिकेशन कराने की बात कहती हैं. सर्वेंट प्रोवाइडर कंपनी चेकमेट के फील्ड ऑफिसर जगत सिंह पुंडीर के मुताबिक, किसी नए कर्मचारी को रखने से पहले उसके पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज देखे जाते हैं. इसके बाद पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाता है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिकॉर्ड की जांच की जाती है.
न्यूज18 की पड़ताल में एजेंसी ने क्या बताया
वहीं, जब न्यूज18 संवाददाता सतेन्द्र बर्तवाल ने देहरादून की केएस मैनपावर सर्विस एजेंसी से ग्राहक बनकर बात की. एजेंसी की ओर से बताया गया कि सर्वेंट की मासिक सैलरी करीब 15 हजार रुपये होगी. कर्मचारी के वेरिफिकेशन से जुड़े दस्तावेज देने की भी बात कही गई. इसके लिए पहले एक हजार रुपये रजिस्ट्रेशन फीस बताई गई. पार्षद के घर हुई इस वारदात के बाद अब पुलिस की जांच इस बात पर भी है कि एजेंसियों की ओर से किया जाने वाला वेरिफिकेशन जमीन पर कितना सही तरीके से होता है.
तीन टीमें सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं
डकैती के बाद पुलिस की तीन टीमें मामले की जांच में लगी हैं. पुलिस घर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देख रही है. इसके जरिए आरोपियों के आने और जाने वाले रास्तों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है. पुलिस भरत के संपर्क में रहे लोगों की भी जानकारी जुटा रही है. जांच में यह पता लगाने की कोशिश है कि वारदात से पहले उसने किन लोगों से संपर्क किया था और उसके साथ आए चार अन्य लोग कौन थे.
अब वेरिफिकेशन की जांच पर टिकी नजर
भरत के पुराने रिकॉर्ड की जानकारी सामने आने के बाद अब पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल उसके वेरिफिकेशन का है. अगर दिल्ली पुलिस की जांच में उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की पुष्टि होती है, तो पुलिस यह देखेगी कि प्लेसमेंट एजेंसी ने उसे काम पर भेजने से पहले किस तरह जांच की थी. अब जांच से ही साफ होगा कि वेरिफिकेशन में कोई कमी रही थी या नहीं और अगर कमी मिली तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा.