हीरा कारखानों में 12-18 घंटे काम, मिल नहीं रहे कारीगर, कहां से आई इतनी डिमांड

हीरा कारखानों में 12-18 घंटे काम, मिल नहीं रहे कारीगर, कहां से आई इतनी डिमांड


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Surat Ground Report : सूरत के हीरा कारखानों में अचानक काम की रफ्तार बढ़ गई है. कहीं 12 घंटे तो कहीं 18 घंटे तक कारीगर काम कर रहे हैं. कई यूनिट में एक भी टेबल खाली नहीं है और नए कारीगरों की भर्ती की जा रही है. ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए अमेरिका के ऑर्डर पूरे करने की इतनी जल्दबाजी क्यों है और रूस से तेल खरीद पर संभावित अमेरिकी टैरिफ का सूरत के हीरा कारोबार से क्या कनेक्शन है.

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सूरत की डायमंड इंडस्‍ट्री में इस समय काफी चहल पहल है. (Image Canva)

सूरत के डायमंड कटिंग-पॉलिशिंग कारखानों में इन दिनों नजारा बदला हुआ है. जिस इंडस्ट्री में कुछ महीने पहले काम की कमी और कारीगरों की छंटनी की चर्चा थी, वहां अब कई यूनिट में एक भी टेबल खाली नहीं दिख रही. मशीनें और पॉलिशिंग व्हील लगातार चल रहे हैं. कारीगर अपनी शिफ्ट से ज्यादा वक्त कारखाने में गुजार रहे हैं. कई यूनिट में काम 12 घंटे तक पहुंच गया है, जबकि कुछ जगहों पर 18 घंटे तक काम कराने की नौबत आ गई है. बाहर नए कारीगरों की भर्ती के बोर्ड लगे हैं, लेकिन जरूरत के मुताबिक लोग मिलना आसान नहीं है. CNBC आवाज ने फैक्‍ट्री में जाकर वहां के कारोबार‍ियों से सीधी बात की है.

मामला सिर्फ अचानक बढ़ी हीरे की मांग का नहीं है. इसके पीछे अमेरिका का टैरिफ है. कारोबारी इस वक्त एक-एक ऑर्डर को जल्दी से जल्दी तैयार करके अमेरिका भेजना चाहते हैं. वजह है 18 अक्टूबर की डेडलाइन. अमेरिका ने 18 सितंबर को ऐसा कानून बनाया है, जिसके तहत रूस से तेल या गैस खरीदने वाली कुछ श्रेणी की बड़ी आयातक अर्थव्यवस्थाओं पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का रास्ता खुल गया है. हालांकि 100 फीसदी टैरिफ भारत पर अपने आप लागू नहीं हो जाता, लेकिन भारत के कारोबारी संभावित जोखिम को देखते हुए पहले से तैयारी कर रहे हैं.

‘ऑर्डर अभी निकालो, बाद का बाद में देखेंगे’

यानी अभी जो तेजी कारखानों के अंदर दिखाई दे रही है, उसका एक बड़ा हिस्सा ‘ऑर्डर अभी निकालो, बाद का जोखिम बाद में देखेंगे’ वाली रणनीति है. अमेरिका भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी कारोबार का सबसे अहम बाजार है. ऐसे में अगर अक्टूबर के बाद भारतीय सामान पर अतिरिक्त ड्यूटी बढ़ती है, तो उसका असर भारतीय निर्यातक, अमेरिकी खरीदार और आगे ग्राहक… तीनों पर पड़ सकता है. इसी वजह से जिन ऑर्डरों की डिलीवरी पहले की जा सकती है, उन्हें कारोबारी आगे खींच रहे हैं.



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