Public Opinion: IAS की कुर्सी छोड़ी, अब सियासत की राह पर दिव्या मित्तल.. जानिए मिर्जापुर में क्या बोले लोग?

Public Opinion: IAS की कुर्सी छोड़ी, अब सियासत की राह पर दिव्या मित्तल.. जानिए मिर्जापुर में क्या बोले लोग?


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पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने का ऐलान किया है और उत्तर प्रदेश को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बताया है. उनके ऐलान के बाद मिर्जापुर में भी चर्चा तेज हो गई है. स्थानीय लोगों ने उनके कार्यकाल, जनता की समस्याएं सुनने और लहुरिया दह में पानी पहुंचाने जैसे कामों को याद करते हुए अपनी-अपनी राय रखी.

मिर्जापुर: यूपी की सबसे चर्चित आईएएस अफसर दिव्या मित्तल ने इस्तीफा दे दिया है. दिव्या मित्तल का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से राजनीति में आने का ऐलान किया. वीडियो के माध्यम से किए गए ऐलान में उन्होंने मिर्जापुर जिले के लहुरिया दह गांव का जिक्र किया और वहां पर उन्होंने पानी पहुंचाने की बात कहीं और स्कूल को लेकर आई समस्याओं को लेकर बात हुई. राजनीति में आने का ऐलान और मिर्जापुर का जिक्र ने सियासी सरगर्मियों को तेज कर दिया है. ऐलान के बाद मिर्जापुर जिले के लोगों से जानी गई जहां पर उन्होंने अलग-अलग मत दिए.

हम सभी लोग उनके साथ हैं

धर्मेश दूबे ने कहा कि अगर दिव्या मित्तल चुनावी मैदान में आती हैं तो निश्चित तौर पर उनका स्वागत है. उनके द्वारा मिर्ज़ापुर जिले की समस्याओं के समाधान को लेकर काम किया गया. अलग-अलग समस्याओं के लिए उन्होंने न सिर्फ खुद से प्रयास किया, बल्कि आज़ादी के बाद कई ऐसी समस्याएँ थीं, चाहे पानी पहुँचाने को लेकर हों या फिर पानी आने को लेकर हों. इन सभी का समाधान कराया और उनका कार्यकाल भी बेहतरीन रहा. अगर वो चुनावी मैदान में आती हैं तो हम सभी लोग उनके साथ हैं.

खुद सुनती थी फरियाद

अंबुज शुक्ला ने बताया कि जिलाधिकारी दिव्या मित्तल का एक काम अच्छा लगा था कि वो लोगों के पास जाकर खुद फरियाद सुनती थीं. उनके दफ्तर में पहुँचने वाले लोगों के पास वो पहुँचती थीं और उनकी बातों को सुनती थीं और उनके समाधान को लेकर प्रयास करती थीं. ऐसे में उनका कार्यकाल बेहतरीन सराहनीय रहा है. अगर वो चुनावी मैदान में आती हैं तो हम सब भी उनके साथ हैं और उनका पूरा सहयोग करेंगे.

हुआ था समाधान

धीरज त्रिपाठी ने कहा कि एक बार एक समस्या को लेकर हम उनके पास गए थे और उनके द्वारा समस्या का समाधान कराया गया. उस पर ध्यान दिया गया और उसका 24 घंटे में निस्तारण हुआ. ऐसे लोग कम ही मिलते हैं, यहाँ लोग अधिकारियों के यहाँ चक्कर लगाते हैं तो समाधान नहीं होता है. बतौर नेता अगर वो चुनावी मैदान में आएगी तो इसका फायदा मिलेगा.

जातीय समीकरण नहीं है अनुकूल

संजय दुबे ने बताया कि जिलाधिकारी दिव्या मित्तल मिर्जापुर जिले के सबसे बेहतरीन अधिकारियों में एक थीं. उनके द्वारा जो काम किए गए आज भी याद किए जाते हैं. यही वजह है कि उनके ऐलान के बाद मिर्जापुर जिले की सियासी गर्मी बढ़ गई है. यहाँ पर सांसद अनुप्रिया पटेल भी बहुत पढ़ी-लिखी हैं, लेकिन दिव्या मित्तल उनसे ज़्यादा कहीं काबिल और जनता से जुड़ाव रखने वाली अधिकारी दिखीं. ऐसे में अब उनके ऐलान के बाद हम लोगों को भी उम्मीदें हैं कि मिर्जापुर से चुनाव लड़ें. हालांकि मिर्जापुर जिले में जाति फैक्टर से मात खा सकती हैं.



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