बरेली का आलमगीरीगंज है सबसे पुरानी सोने की मार्केट, जहां लगती है सोने की मंडी, मुगल काल से है इसका संबंध, जानें इतिहास

बरेली का आलमगीरीगंज है सबसे पुरानी सोने की मार्केट, जहां लगती है सोने की मंडी, मुगल काल से है इसका संबंध, जानें इतिहास


Last Updated:

बरेली के विकास के साथ आलमगीरीगंज क्षेत्र का भी धीरे-धीरे विस्तार हुआ. एक दौर में यह इलाका आज की तरह घना बाजार नहीं था. यहां बाग-बगीचे और बड़ी-बड़ी हवेलियां हुआ करती थीं. समय के साथ सेठ-साहूकार यहां आकर बसने लगे. इनमें कई लोग गिरवी और गांठे के कारोबार से जुड़े थे.धीरे-धीरे इसी कारोबार से आभूषणों का व्यापार बढ़ा और यहां सोने-चांदी की दुकानें खुलती चली गईं. यही वजह है कि समय के साथ आलमगीरीगंज बरेली के प्रमुख ज्वेलरी बाजार के रूप में अपनी पहचान बनाने लगा

बरेली: झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में ये पंक्तियां सुनते ही बरेली और यहां के बाजारों की तस्वीर आंखों के सामने आ जाती है. लेकिन बरेली की पहचान सिर्फ इस मशहूर गीत से नहीं, बल्कि अपने पुराने कारोबार और ऐतिहासिक बाजारों से भी जुड़ी है. इन्हीं में एक खास नाम है. आलमगीरीगंज, जिसे बरेली की प्रमुख सोने-चांदी की मंडियों में गिना जाता है.

बरेली की है पुरानी सोना मंडी

वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. राजेश कुमार शर्मा के मुताबिक, बरेली के विकास के साथ आलमगीरीगंज क्षेत्र का भी धीरे-धीरे विस्तार हुआ. एक दौर में यह इलाका आज की तरह घना बाजार नहीं था. यहां बाग-बगीचे और बड़ी-बड़ी हवेलियां हुआ करती थीं. समय के साथ सेठ-साहूकार यहां आकर बसने लगे. इनमें कई लोग गिरवी और गांठे के कारोबार से जुड़े थे.धीरे-धीरे इसी कारोबार से आभूषणों का व्यापार बढ़ा और यहां सोने-चांदी की दुकानें खुलती चली गईं. यही वजह है कि समय के साथ आलमगीरीगंज बरेली के प्रमुख ज्वेलरी बाजार के रूप में अपनी पहचान बनाने लगा. आज भी यहां पारंपरिक सोने-चांदी के आभूषणों की दुकानें और पुराने कारोबारी परिवार इस बाजार की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. भले ही आधुनिक दौर में बड़े ज्वेलर्स ने शहर के दूसरे हिस्सों में भी शोरूम खोल लिए हों, लेकिन पारंपरिक ज्वेलरी के कारोबार में आलमगीरीगंज की अपनी अलग पहचान है.

मुगल काल से इस मोहल्ले का रहा है नाता

आलमगीरीगंज नाम को लेकर एक स्थानीय मान्यता यह भी है कि इसका संबंध मुगल बादशाह आलमगीर से रहा होगा. हालांकि इस संबंध में स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. इसलिए इसे मान्यता के तौर पर ही देखा जाता है. अब बात उस झुमके की, जिसने बरेली को देशभर में अलग पहचान दिलाई. वर्ष 1966 में आई फिल्म मेरा साया के गीत झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में ने बरेली और झुमके को हमेशा के लिए एक-दूसरे से जोड़ दिया. इस गीत को आशा भोसले ने आवाज दी, जबकि गीतकार राजा मेहंदी अली खान और संगीतकार मदन मोहन थे.



Source link