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IGIMS SCAM: पटना के IGIMS अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना में बहुत बड़ी वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है. इस बात का खुलासा तब हुआ जब एक मरीज ने शिकायत की कि उसके नाम पर आयुष्मान योजना के तहत क्लेम किया गया है, जबकि वास्तविकता में उसका इलाज ही नहीं हुआ था. शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन ने आंतरिक जांच कराई तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ और रकम करोड़ों में पहुंच गई है. अभी इसकी जांच में और भी कई काले कारनामों का चिट्ठा खुलने की बात कही जा रही है. पूरी खबर विस्तार से आगे पढ़िए.
IGIMS में आयुष्मान योजना में गड़बड़ी, हटाए गए चीफ नोडल ऑफिसर डॉ जीउत राम केसरी.
पटना. बिहार के प्रतिष्ठित अस्पताल इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में आयुष्मान भारत योजना के तहत वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है. योजना के चीफ नोडल ऑफिसर डॉ. जीउत राम केसरी को पद से हटा दिया गया है. वहीं, संस्थान की ओर से चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. आरोप है कि मरीजों के रिकॉर्ड का गलत इस्तेमाल कर इलाज के नाम पर क्लेम किया गया, जबकि कुछ मामलों में मरीज का इलाज हुआ ही नहीं था.
मरीज की शिकायत से खुला फर्जी क्लेम का मामला
जानकारी के अनुसार, मामले का खुलासा एक मरीज की शिकायत के बाद हुई जांच में हुआ. आरोप है कि मरीजों के दस्तावेज और रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर आयुष्मान योजना के तहत भुगतान के लिए क्लेम किया गया. इसमें आउटसोर्सिंग कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है. बिना इलाज के मरीज के नाम पर क्लेम किए जाने का आरोप इस पूरे मामले को गंभीर बनाता है.
CAG ने भी मांगी थी 13.89 करोड़ रुपये की गड़बड़ी पर रिपोर्ट
बता दें कि आईजीआईएमएस में आयुष्मान योजना के संचालन को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं. सीएजी (CAG) ने इस योजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 13 करोड़ 89 लाख 47 हजार रुपये की राजस्व हानि के बाद इस मामले में रिपोर्ट तलब की गई थी.
निगरानी के लिए नई कमेटी, प्रशासन के रवैये पर सवाल
वहीं, मामले के सामने आने के बाद IGIMS प्रशासन ने आयुष्मान योजना की निगरानी के लिए नई कमेटी का गठन किया है. चीफ नोडल ऑफिसर को हटाने और चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी की कार्रवाई के बावजूद अस्पताल प्रशासन के रवैये पर सवाल उठ रहे हैं. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और कथित वित्तीय गड़बड़ी की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है.
अस्पताल प्रशासन के रवैये पर उठ रहे सवाल
बहरहाल, इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी लंबे समय तक चलती रही और प्रशासन को भनक तक नहीं लगी, इससे अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं. बता दें कि आयुष्मान योजना गरीब मरीजों के लिए वरदान है, लेकिन इस तरह के फर्जीवाड़े से योजना की साख पर बट्टा लग रहा है. फिलहाल IGIMS प्रशासन ने कहा है कि नई कमेटी हर क्लेम की जांच करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.