टापू बन गए थे गांव! इंद्रावती की बाढ़ में डूबे बस्तर के भेजापदर और बेलगांव, 123 घर प्रभावित

टापू बन गए थे गांव! इंद्रावती की बाढ़ में डूबे बस्तर के भेजापदर और बेलगांव, 123 घर प्रभावित


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Bastar Flood Bhejapadar Village: बस्तर के भेजापदर और बेलगांव गांव हाल ही में आई बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इंद्रावती नदी का पानी घुसने से लगभग 123 घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं और ग्रामीणों को धान की फसल और घरेलू सामान का भारी नुकसान हुआ है.

Bastar Flood Bhejapadar Village: बस्तर के भेजापदर और बेलगांव गांव हाल ही में आई बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इन गांवों में इंद्रावती नदी का पानी घुसने से लगभग 123 घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिनमें से कुछ पूरी तरह टूट गए हैं और कुछ को आंशिक नुकसान पहुंचा है. ग्रामीणों को अपनी धान की फसल और घरेलू सामान का भारी नुकसान हुआ है.

बाढ़ का प्रभाव
जगदलपुर के भेजापदर और बेलगांव गांव बाढ़ से पूरी तरह घिर गए थे. बाढ़ के दौरान गांव चारों ओर से पानी से घिर गए थे, जिससे गांव तक पहुंचने का रास्ता भी बंद हो गया था. ग्रामीणों को पानी के बीच बने टापू जैसे इलाकों में रहने को मजबूर होना पड़ा. बस्तर में इंद्रावती नदी के किनारे बसे अधिकतर गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे.

क्षतिग्रस्त घर और फसलें
भेजापदर गांव में लगभग 123 घर बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. इनमें से कई घरों को पूर्ण क्षति हुई है, जबकि कुछ घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है. ग्रामीणों के अनुसार, बाढ़ में उनकी धान की फसल और घरों में रखा सामान बह गया, जिससे उन्हें फसल और घरेलू सामान के नुकसान का सामना करना पड़ा है.

ग्रामीणों के अनुभव
न्यूज18 की टीम ने गांव के ग्रामीण मकोड़सन से बात की, जिन्होंने बताया कि उनका पूरा घर क्षतिग्रस्त हो गया है. उनके घर में गले तक पानी भर गया था, जिसके बाद वे सुरक्षित जगह पर चले गए. घर का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह टूट जाने के कारण वे अभी तक घर के अंदर नहीं जा पाए हैं. उन्होंने यह भी बताया कि करीब तीन से चार दिन तक धान की फसल पानी में डूबी रही, जिससे फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई. भेजापदर की नीलेंद्री बघेल का भी पूरा घर टूट गया है. नीलेंद्री ने बताया कि जब घर में पूरा पानी भर गया था, तो उन्हें सुबह करीब चार बजे घर छोड़कर जाना पड़ा. उनके मुताबिक, घर में करीब दो से तीन फीट तक पानी भर गया था.

राहत और बचाव कार्य
गांव की सरपंच भुनेश्वरी बघेल ने बताया कि गांव पूरी तरह पानी में डूब गया था और सिर्फ थोड़ा सा हिस्सा बचा था. बाढ़ के दौरान राहत शिविर बनाए गए थे, जहां लोगों को सुरक्षित रखा गया था. सरपंच के अनुसार, गांव के 123 घरों में आंशिक और पूर्ण क्षति हुई है. लोगों को राहत शिविरों के माध्यम से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया था.



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