Mustard Farming Tips: सरसों की फसल में चाहिए ‘असली सोना’ तो अपनाएं ये खास किस्में, मिलेगा बंपर उत्पादन

Mustard Farming Tips: सरसों की फसल में चाहिए ‘असली सोना’ तो अपनाएं ये खास किस्में, मिलेगा बंपर उत्पादन


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सरसों की फसल में चाहिए ‘असली सोना’, अपनाएं ये खास किस्में, मिलेगा बंपर उत्पादन

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Mustard Farming Tips: सरसों की खेती में अच्छी पैदावार के लिए उन्नत और क्षेत्र के अनुकूल किस्म का चयन महत्वपूर्ण माना जाता है. किसान बुवाई से पहले मिट्टी, मौसम, सिंचाई सुविधा और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुसार किस्म का चुनाव कर सकते हैं. सही बीज के साथ समय पर बुवाई, संतुलित पोषण और उचित सिंचाई से फसल की उत्पादकता बेहतर करने में मदद मिल सकती है.

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भीलवाड़ा: सर्दियों की सीजन के शुरू होने से पहले किसान अपने खेत में फसल की बुवाई में लग जाते हैं. भीलवाड़ा की बात की जाए तो भीलवाड़ा में खास तौर पर बड़े पैमाने पर सरसों की फसल बोई जाती है, क्योंकि गेहूं के मुकाबले सरसों की फसल कम पानी लेती है और उत्पादन भी अधिक देती है, ऐसे में भीलवाड़ा के ज्यादातर किसान सरसों की फसल को अपनाते हैं. रबी सीजन में सरसों की खेती किसानों के लिए अच्छी आमदनी का जरिया बन सकती है. सरसों की फसल से बेहतर उत्पादन लेने के लिए किसानों को बुआई से पहले सही किस्म का चयन करना जरूरी है. भीलवाड़ा कृषि विभाग के अनुसार भीलवाड़ा जिले की जलवायु और मिट्टी को ध्यान में रखते हुए किसानों को क्षेत्र के अनुकूल उन्नत और प्रमाणित बीज का इस्तेमाल करना चाहिए. सही किस्म के साथ समय पर बुआई और फसल की उचित देखभाल से उत्पादन में अच्छा इजाफा किया जा सकता है.

भीलवाड़ा कृषि विभाग के उद्यान डिपार्मेंट के कृषि अधिकारी डॉ शंकर सिंह राठौड़ ने बताया कि भीलवाड़ा जिले में रबी सीजन के दौरान आसींद, मांडलगढ़, जहाजपुर, बिजोलिया और शाहपुरा सहित विभिन्न ग्रामीण अंचलों व तहसीलों में बड़े पैमाने पर सरसों की फसल उगाई जाती है. कम पानी की आवश्यकता और बेहतर मुनाफे के कारण यहाँ के किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सरसों की बुवाई को प्राथमिकता देते हैं. सरसों की खेती में किस्म का चुनाव खेत की मिट्टी, सिंचाई की उपलब्धता और स्थानीय मौसम के आधार पर करना चाहिए. किसानों को प्रमाणित बीज ही खरीदना चाहिए, ताकि बीज की गुणवत्ता को लेकर परेशानी न हो. क्षेत्र में प्रचलित उन्नत किस्मों में पूसा जय किसान, पूसा बोल्ड, गिरिराज और आरएच-725 जैसी किस्मों का चयन कृषि विभाग की स्थानीय सलाह के अनुसार किया जा सकता है. हालांकि, किसान अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्म की जानकारी नजदीकी कृषि पर्यवेक्षक या कृषि विभाग के कार्यालय से जरूर लें.

समय पर बुआई से फसल को मिलेगा फायदा
डॉ शंकर सिंह राठौड़ ने बताया कि सरसों की बुआई उचित समय पर करना बेहद जरूरी है. बहुत जल्दी या बहुत देर से बुआई करने पर फसल की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित हो सकता है. बुआई से पहले खेत की अच्छी तैयारी करनी चाहिए और मिट्टी में पर्याप्त नमी होने पर ही बीज डालना चाहिए. सरसों की फसल में किसान मिट्टी की जांच के आधार पर खाद एवं उर्वरक का प्रयोग करें. जरूरत से ज्यादा उर्वरक डालने से उत्पादन बढ़ने के बजाय फसल पर विपरीत असर पड़ सकता है. फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें और खेत में पानी का भराव नहीं होने दें. किसानों को सलाह दी कि सरसों की फसल में माहू सहित अन्य रोग-कीटों की नियमित निगरानी करें. खेत में किसी भी प्रकार के रोग या कीट का प्रकोप दिखाई देने पर बिना जानकारी के दवा का छिड़काव करने के बजाय कृषि विभाग के विशेषज्ञ से सलाह लें. सही किस्म, समय पर बुआई और वैज्ञानिक तरीके से देखभाल अपनाकर किसान सरसों की फसल से बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.



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