Hyderabad News: कागज बनाने में रिकॉर्ड, सालाना 8 लाख टन उत्पादन वाली मिल; 35 करोड़ नोटबुक्स बनाती है ये कंपनी

Hyderabad News: कागज बनाने में रिकॉर्ड, सालाना 8 लाख टन उत्पादन वाली मिल; 35 करोड़ नोटबुक्स बनाती है ये कंपनी


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तेलंगाना में है भारत की सबसे बड़ी पेपर मिल: हर साल बनता है 8 लाख टन कागज

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Hyderabad News Hindi: तेलंगाना में भारत की सबसे बड़ी पेपर मिल है, जो सालाना 8 लाख टन कागज और 35 करोड़ नोटबुक्स का उत्पादन करती है. यह मिल पर्यावरण-अनुकूल मॉडल पर आधारित है और इसे प्लेटिनम रेटिंग मिली है.

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हैदराबाद: स्कूल-कॉलेज में पढ़ाई करने वाले छात्र हों या दफ्तरों में काम करने वाले पेशेवर, रोजमर्रा की जिंदगी में कागज की जरूरत हर किसी को पड़ती है. कॉपियों के पन्ने, किताबों की छपाई, पैकेजिंग बॉक्स, साबुन के रैपर और यहां तक कि ताश के पत्तों तक में कागज और पेपरबोर्ड का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला यह कागज आखिर कहां और कैसे तैयार होता है? भारत की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक पेपर मिल दक्षिण भारत के तेलंगाना राज्य में स्थित है.

तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले के भद्राचलम में स्थित आईटीसी का यह प्लांट भारत का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन इंटीग्रेटेड पेपर और पेपरबोर्ड प्लांट है. यह विशाल औद्योगिक परिसर अपने बड़े आकार और उन्नत तकनीक के लिए जाना जाता है.

प्रीमियम पैकेजिंग के लिए भी यहीं से बोर्ड की सप्लाई
मील के एक कर्मचारी अनुसार इस पेपर मिल की सालाना उत्पादन क्षमता लगभग 8 लाख टन से अधिक वर्जिन पेपर और पेपरबोर्ड की है. देश भर के छात्रों के बीच लोकप्रिय क्लासमेट नोटबुक के लिए पेपर भी मुख्य रूप से इसी मिल से तैयार होकर जाता है. आंकड़ों के अनुसार यहां से मिलने वाले पेपर से हर साल लगभग 35 करोड़ क्लासमेट नोटबुक्स तैयार की जाती हैं. इसके अलावा दैनिक उपयोग के घरेलू सामान, टूथपेस्ट बॉक्स, अगरबत्ती कवर और प्रीमियम पैकेजिंग के लिए भी यहीं से बोर्ड की सप्लाई होती है.

रोजगार और कमाई का जरिया भी मिलता
इस मिल की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरण-अनुकूल मॉडल है. इसे देश की सबसे ‘ग्रीनेस्ट’ मिलों में गिना जाता है और इसे प्रतिष्ठित प्लेटिनम रेटिंग भी मिल चुकी है. मिल अपनी लकड़ी की जरूरत पूरी करने के लिए प्राकृतिक जंगलों पर निर्भर नहीं रहती. इसके बजाय सोशल और एग्रो फॉरेस्ट्री कार्यक्रम के जरिए किसानों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जाते हैं. जितने पेड़ों की लकड़ी का उपयोग पल्प बनाने में होता है, उससे कहीं अधिक संख्या में पौधे रोपे जाते हैं, जिससे स्थानीय किसानों को नियमित रोजगार और कमाई का जरिया भी मिलता है.

तकनीक और हरित उत्पादन के मामले में देश भर में शीर्ष
भारत में कागज निर्माण का इतिहास काफी पुराना रहा है. 15वीं सदी में कश्मीर के सुल्तान जैन-उल-आबिदीन के समय से इसकी शुरुआत मानी जाती है. वहीं आधुनिक मशीनीकृत मिलों की नींव 19वीं सदी के उत्तरार्ध में पड़ी. आज देश में सैकड़ों पेपर मिलें काम कर रही हैं, लेकिन भद्राचलम की यह मिल आधुनिक तकनीक और हरित उत्पादन के मामले में देश भर में शीर्ष पर है.



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