’12 घंटे चलाते हैं गाड़ी, फिर भी खर्च नहीं निकल रहा’, डिप्टी CM के बयान के बीच सुनिए रिक्शा चालकों का दर्द

’12 घंटे चलाते हैं गाड़ी, फिर भी खर्च नहीं निकल रहा’, डिप्टी CM के बयान के बीच सुनिए रिक्शा चालकों का दर्द


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Public Opinion Meerut E-rickshaw Drivers: यूपी के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के बयान के बाद मेरठ के रिक्शा चालकों ने अपनी दिनचर्या और जीवन की चुनौतियों के बारे में बताया है. उनका कहना है कि 10-12 घंटे काम करने के बाद भी घर का खर्च चलाना मुश्किल है और किराए के पैसे निकालना भी एक बड़ी परेशानी है.

मेरठ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक द्वारा ऑटो चालक सम्मेलन के दौरान भाषण देते हुए कहा कि युवा अगर नौकरी हासिल करने की जगह 4 घंटे का रिक्शा भी चलाएं तो वह काफी अच्छी कमाई कर सकते हैं. इस बयान के बाद से युवा विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के बयान का विरोध करते हुए नजर आ रहे हैं. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए लोकल 18 की टीम द्वारा रिक्शा चालकों से खास बातचीत की, जिन्होंने अपनी दिनचर्या बताते हुए अपने जीवन की चुनौतियों को बताया.

किराए के पैसे निकालने के लिए भी होती है परेशानी
लोकल-18 की टीम से खास बातचीत करते हुए रिक्शा चालक मंजूर ने बताया कि लोगों को लगता है कि रिक्शा चालक काफी अच्छी कमाई करते हैं. लेकिन हम लोग जीवन में भी काफी चुनौतियां रहती हैं. उन्होंने बताया कि 300 रुपए प्रतिदिन के किराए के हिसाब से रिक्शा किराए पर लाते हैं. उसके बाद रूट पर रिक्शा चलाते हैं. कभी-कभी सवारी मिलती है, कभी नहीं मिलती है. कई बार तो रिक्शे का किराया भी अपनी जेब से ही देना पड़ जाता है. लेकिन मजबूरी है कि ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, कोई नौकरी नहीं मिल पाता, इसलिए रिक्शा चला रहे हैं.

घर का खर्चा चलाना भी है चुनौती
रिक्शा चालक पवन ने बताया कि घर का खर्चा चलाना भी चुनौती पूर्ण रहता है, क्योंकि बढ़ती महंगाई के बीच घर का किराया, बच्चों की स्कूल फीस और रसोई का सामान लाने के लिए भी चुनौती हो जाती है. वह बताते हैं कि अपना रिक्शा लेने की भी सोचे तो वह 2 लाख रुपए का आता है. ऐसे में रिक्शा खरीद पाना संभव नहीं होता है, इसलिए किराए पर ही रिक्शा चलाते हैं. प्रतिदिन लगभग 10 से 12 घंटे रिक्शा चलाते हैं, ताकि वह अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान करते हैं कि जिससे कि वह अपने जीवन को संवारते हुए अच्छी नौकरी कर पाए.

एक चार्जिंग में 60 किलोमीटर चला पाते हैं रिक्शा
ई-रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष विशाल कौशिक ने बताया कि रिक्शा चालक के जीवन की चुनौतियां रिक्शा चालक बनकर ही समझा जा सकता है. हालांकि उन्होंने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि कम से कम देशभर में रिक्शा चालकों पर नाम तो चर्चाओं में आया.
उन्होंने बताया कि एक चार्जिंग में सिर्फ 60 से 80 किलोमीटर तक रिक्शा को चला सकते हैं. पंचर हो जाए तो रिक्शा को खींचना भी काफी कठिन हो जाता है. उसमें 50 से 60 रुपए पंचर के चले जाते हैं.

600 में 300 रुपए चला जाता है किराया
कई बार सवारी मिल भी जाती है, कई बार नहीं मिलती. एक बार में सिर्फ चार सवारियों को ही बिठा सकते हैं, जिसमें प्रति सवारी 10 रुपए और 20 रुपए किराया है. इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि दिनभर में कई बार 500 से 600 रुपए कमा पाते हैं, उसमें 300 रुपए ई-रिक्शा किराया चला जाता है, इससे कितना कमा पाते हैं, यह एक रिक्शा चालक ही जानता है कि कैसे घर का खर्चा चल पाता है.

बताते चलें कि इसी तरह से अन्य रिक्शा चालकों ने भी अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि सरकार ने जब उनके बारे में इतना सोचा है तो रिक्शा चालकों को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, उसके बारे में भी अब कार्य होना चाहिए. सभी रिक्शा चालकों ने कहा कि उन सभी का सपना है कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल कर बेहतर नौकरी कर पाएं.



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