बिहार MLC चुनाव: बीजेपी के चार उम्मीदवारों के बारे में जानिए, किनका कितना पुराना राजनीतिक अनुभव?

बिहार MLC चुनाव: बीजेपी के चार उम्मीदवारों के बारे में जानिए, किनका कितना पुराना राजनीतिक अनुभव?


बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अपने 4 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. पार्टी ने अपने दो सबसे पुराने और मजबूत चेहरों पर फिर से भरोसा जताया है, जबकि दो सीटों पर नए समीकरण के साथ दांव लगाया है. भाजपा कोटे में आई 4 सीटों में पटना शिक्षक, कोसी स्नातक, दरभंगा स्नातक और तिरहुत शिक्षक सीट शामिल हैं. चुनाव के लिए वोटिंग 23 अक्टूबर को होगी और गिनती 27 अक्टूबर को होगी.

पटना शिक्षक से फिर नवल किशोर यादव, 30 साल से अजेय किला

भाजपा ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रो. नवल किशोर यादव को फिर से उम्मीदवार बनाया है. नवल किशोर इस सीट से 1996 से लगातार 5 बार एमएलसी हैं. उनका जन्म 2 मार्च 1958 को सारण के शीतलपुर में हुआ और उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से 2001 में पीएचडी की है. उनका राजनीतिक सफर निर्दलीय और आरजेडी से होते हुए बीजेपी तक पहुंचा. वह दो बार निर्दलीय, एक बार आरजेडी और दो बार बीजेपी से विधान परिषद पहुंचे हैं.

शिक्षक राजनीति का लंबा अनुभव

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी ने नवल किशोर यादव को एक बार फिर उम्मीदवार बनाया गया है. पेशे से कॉलेज टीचर रहे नवल किशोर शिक्षकों के मुद्दों पर विधान परिषद में सबसे मुखर आवाज माने जाते हैं. यह सीट बीजेपी का सबसे मजबूत गढ़ मानी जाती है और यहां करीब 16,689 शिक्षक वोटर हैं जो सभी शिक्षक सीटों में सबसे ज्यादा है. इस क्षेत्र में पटना, नालंदा और नवादा के शिक्षक वोट करते हैं.

कोसी स्नातक से डॉ. एन के यादव, बिहार के सबसे सीनियर एमएलसी

कोसी स्नातक से बीजेपी ने डॉ. नरेंद्र कुमार यादव उर्फ एन के यादव को उतारा है. एन के यादव 18 मार्च 1993 से इस सीट से एमएलसी हैं, यानी पिछले 33 साल से लगातार जीत रहे हैं और विधान परिषद के सबसे सीनियर सदस्य हैं. डॉ. एन.के. यादव भागलपुर के रहने वाले हैं और पेशे से चिकित्सक हैं. वह कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार दो बार विधान परिषद का चुनाव जीत चुके हैं. बीजेपी ने उन्हें तीसरी बार उम्मीदवार बनाया है. उनकी पत्नी वीणा यादव भी डॉक्टर हैं और भागलपुर नगर निगम की मेयर रह चुकी हैं.

कोसी स्नातक सीट पर हैट्रिक की कोशिश

एनके यादव के बारे में खास बात यह है वह लगातार दो जीत के बाद तीसरी बार इसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. बता दें कि कोसी स्नातक क्षेत्र सबसे बड़ा है, इसमें 14 जिले – सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, खगड़िया, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, शेखपुरा, भागलपुर और बांका आते हैं. इसमें 64 विधानसभा क्षेत्र और करीब 1.34 लाख स्नातक वोटर हैं.

तिरहुत शिक्षक से नरेंद्र प्रसाद सिंह पर दूसरा दांव

तिरहुत शिक्षक सीट से बीजेपी ने नरेंद्र प्रसाद सिंह यानी एनपी सिंह को उम्मीदवार बनाया है. नरेंद्र 2020 में भी इसी सीट से भाजपा के उम्मीदवार थे, तब उन्हें सीपीआई के डॉ. संजय कुमार सिंह से हार का सामना करना पड़ा था. बीजेपी शिक्षक प्रकोष्ठ से लंबे समय से जुड़े नरेंद्र को शिक्षक आंदोलनों में सक्रिय माना जाता है. इस बार पार्टी ने कम अंतर से हारी हुई इस सीट पर फिर से उन पर भरोसा जताया है.

शिक्षक राजनीति में पुराना चेहरा

नरेंद्र प्रसाद सिंह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति में पुराने चेहरे हैं. बीजेपी ने उन्हें फिर से चुनाव मैदान में उतारा है. जानकारी के मुताबिक, वह इससे पहले भी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन पिछली बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. तिरहुत शिक्षक में मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर के करीब 9,204 शिक्षक वोटर हैं. यह सीट सीपीआई का गढ़ मानी जाती है.

दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार को पहली बार BJP सिम्बल

दरभंगा स्नातक सीट से एमएलसी सर्वेश कुमार ने 2020 में बीजेपी के समर्थन से निर्दलीय चुनाव लड़कर जेडीयू के दिलीप कुमार चौधरी को हराया था. अब भाजपा ने उन्हें सीधे पार्टी के सिम्बल पर उतारकर इस सीट को अपने खाते में करने की रणनीति बनाई है. बता दें कि इस क्षेत्र में दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय जिले आते हैं, जिसमें करीब 1.27 लाख ग्रेजुएट वोटर हैं. सर्वेश को युवा ग्रेजुएट वोटरों में पकड़ रखने वाला नेता माना जाता है.

निर्दलीय से बीजेपी के उम्मीदवार

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अब बीजेपी ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया है. जानकारी के मुताबिक, उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर शिक्षा संस्थानों, ग्रामीण आजीविका और रासायनिक खाद के इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे उठाए थे. उन्होंने रासायनिक खाद के इस्तेमाल का एक हिस्सा जैविक विकल्पों से बदलने का सुझाव भी दिया था. उनकी उम्मीदवारी से दरभंगा स्नातक सीट पर निर्दलीय से बीजेपी तक का उनका राजनीतिक सफर चर्चा में है.

एनडीए में सीट शेयरिंग और आगे की लड़ाई

बता दें कि बिहार में विधान परिषद की कुल 8 सीटों पर चुनाव हो रहा है- 4 स्नातक और 4 शिक्षक. एनडीए में बीडेपी को 4 और जेडीयू को 4 सीटें मिली हैं. जेडीयू ने पटना स्नातक से नीरज कुमार को उतारा है, जहां मोकामा विधायक अनंत सिंह ने बगावत कर जन सुराज के डॉ. अनुज को समर्थन दे दिया है. वहीं, तिरहुत स्नातक, सारण शिक्षक और दरभंगा शिक्षक सीट जेडीयू के खाते में गई हैं. इधर राजद ने 6 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं और जन सुराज ने सभी 8 सीटों पर. स्नातक और शिक्षक वोटरों वाला यह चुनाव विधानसभा चुनाव से बिल्कुल अलग होता है और इसमें शिक्षकों और ग्रेजुएटों की नाराजगी सीधे नतीजों पर असर डालती है.



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