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India-US Trade Deal : अमेरिका की टैरिफ व्यवस्था अब अधिक जटिल हो गई है. अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत अतिरिक्त टैरिफ लगाए जा रहे हैं. इसी को देखते हुए भारत अब चाहता है कि ट्रेड डील में ऐसा प्रावधान हो, जो भविष्य में अमेरिकी टैरिफ में होने वाले बदलावों से भारतीय निर्यातकों को सुरक्षा प्रदान करे.
एमएफएन यह सुनिश्चित करता है कि इसके दायरे में आने वाले सभी देशों को समान टैरिफ दरें मिलें.
नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच अटकी पड़ी ट्रेड डील एक बार फिर से चर्चा में आ गई है. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल अमेरिका जा रहे हैं. वे द्विपक्षीय वार्ता के साथ-साथ G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे. साथ ही वे अमेरिकी वार्ताकार जेमिशन ग्रीर से मुलाकात भी करेंगे. भारत पहले ही साफ कर चुका है कि समझौता तभी होगा, जब उसकी शर्तें दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होगी. भारत इस बार सिर्फ मौजूदा टैक्स छूट तक सीमित नहीं रहना चाहता. अमेरिकी टैक्स सिस्टम जटिल और अनिश्चित नीति को देखते हुए भारत अब किसी ढीले-ढाले वादे पर भरोसा करने के मूड में नहीं है. भारत भविष्य की किसी भी अनिश्चितता से बचने के लिए एक ऐसा पक्का फॉर्मूला चाहता है, जिससे अमेरिका चाहकर भी भारतीय कारोबारियों को मिलने वाले फायदों को कम न कर सके.
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत भारत अब ‘फॉरवर्ड मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (Forward MFN)’ क्लॉज को शामिल कराने की पुरजोर कोशिश में है. यह एक ऐसा कानूनी सुरक्षा कवच है जो भविष्य में होने वाले बदलावों से भारत के हितों की रक्षा करेगा. यदि यह प्रावधान लागू हो जाता है तो अमेरिका भविष्य में अगर अपनी टैरिफ व्यवस्था में कोई भी फेरबदल करता है या किसी तीसरे देश को भारत से बेहतर टैक्स छूट या शर्तें देता है, तो वे सभी रियायतें और दरें भारत को भी अपने आप मिल जाएंगी.
चल रही है बातचीत
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों के बीच फॉरवर्ड एमएफएन क्लॉज को लेकर बातचीत चल रही है. इसका मकसद अमेरिकी नीतियों में आने वाले उतार-चढ़ाव से भारतीय निर्यातकों को मिलने वाली रियायतों को प्रभावित होने से बचाना है.
क्या चाहता है भारत
भारत सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वह द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने और फरवरी में तैयार की गई रूपरेखा के आधार पर एक मजबूत अंतरिम समझौता करने को तैयार है. प्रस्तावित फॉरवर्ड एमएफएन व्यवस्था असल में 6 फरवरी 2026 के भारत और अमेरिका के संयुक्त बयान में शामिल एक सुरक्षा प्रावधान का ही अपग्रेडेड रूप है. पुराने प्रावधान में कहा गया था कि यदि कोई देश टैरिफ बदलता है, तो दूसरा देश भी ऐसा कर सकता है.
लेकिन इसमें एक बड़ी खामी थी. यह व्यवस्था भविष्य में अमेरिका द्वारा की जाने वाली मनमानी टैरिफ बढ़ोतरी के खिलाफ कोई व्यापक गारंटी नहीं देती थी. न ही इससे भारत को किसी अन्य देश को दी गई नई अमेरिकी रियायतें अपने आप मिल सकती थीं. भारत इसी खाली जगह को फॉरवर्ड मोस्ट-फेवर्ड-नेशन से भरना चाहता है.
भारत क्यों चाहता है फॉरवर्ड मोस्ट-फेवर्ड-नेशन?
एमएफएन यह सुनिश्चित करता है कि इसके दायरे में आने वाले सभी देशों को समान टैरिफ दरें मिलें. अमेरिका की टैरिफ व्यवस्था अब अधिक जटिल हो गई है. अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत अतिरिक्त टैरिफ लगाए जा रहे हैं. इसी वजह से भारत चाहता है कि जो समझौता हो उसका लाभ लगातार मिलता रहे.