Last Updated:
Dhanbad AK-47 Firing Case: वासेपुर के चर्चित गैंगस्टर फहीम खान के घर पर साल 2004 में AK-47 से हुई अंधाधुंध फायरिंग के मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. जिला व सत्र न्यायाधीश तृतीय पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने इस मामले में तीन आरोपियों को दोषी पाया है. सजा के बिंदु पर कोर्ट 3 तारीख को अपना निर्णय सुनाएगा. पूरी खबर विस्तार से आगे पढ़िये.
धनबाद के चर्चित फायरिंग केस में बड़ा फैसला, फहीम खान के घर हमले में तीन आरोपी दोषी
धनबाद के चर्चित गैंगस्टर फहीम खान के घर पर AK-47 से हुई अंधाधुंध फायरिंग के मामले में करीब 22 साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया है. जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने शाहिद आलम, शहादत हुसैन और कथित शूटर तनवीर आलम को दोषी करार दिया है. 29 जनवरी 2004 को हुए इस हमले में फहीम खान के बॉडीगार्ड विनोद शर्मा की गोली लगने से मौत हो गई थी. अब अदालत 3 तारीख को दोषियों की सजा के बिंदु पर फैसला सुनाएगी.
2004 में AK-47 से गूंज उठा था फहीम खान का घर
बता दें कि यह मामला 29 जनवरी 2004 का है. उस दिन फहीम खान के घर पर AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग की गई थी. हमला इतना भीषण था कि फहीम खान को अपनी जान बचाने के लिए पड़ोसी की छत से कूदना पड़ा था. इस दौरान उनके बॉडीगार्ड विनोद शर्मा की गोली लगने से मौत हो गई थी. विनोद शर्मा बिहार के अरवल जिले के रहने वाले थे.
शाहिद आलम समेत तीन आरोपियों को अदालत ने माना दोषी
इस मामले में साबिर आलम के भाई शाहिद आलम, वासेपुर निवासी शहादत हुसैन और पटना निवासी कथित शूटर तनवीर आलम के खिलाफ मुकदमा चल रहा था. लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने तीनों को दोषी करार दिया है. मामले में शाहिद आलम के पैर में भी गोली लगी थी.
बॉडीगार्ड की मौत, फहीम खान की जान बचाने की घटना की चर्चा
फायरिंग की इस घटना में फहीम खान के बॉडीगार्ड की मौत और खुद फहीम का पड़ोसी की छत से कूदकर बचना मामले के सबसे अहम घटनाक्रम रहे. AK-47 से हुए हमले ने उस समय धनबाद के अपराध जगत में हलचल पैदा कर दी थी. अब अदालत के फैसले के बाद करीब दो दशक पुराने इस मामले में दोषियों की सजा तय होने की प्रक्रिया बाकी है.
3 अक्टूबर को सजा पर आएगा फैसला
अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया है. अब 3 अक्टूबर को सजा के बिंदु पर सुनवाई और निर्णय होना है. इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि अदालत दोषियों को कितनी सजा सुनाती है. फिलहाल मामले में दोषसिद्धि का फैसला आ चुका है और सजा का इंतजार है.