RCA Election: सुलह की कोशिशें नाकाम, मंत्री के बेटे ने खोला मोर्चा तो सांसद-विधायक पुत्र हुए साथ, 38 वोटर पर नजर

RCA Election: सुलह की कोशिशें नाकाम, मंत्री के बेटे ने खोला मोर्चा तो सांसद-विधायक पुत्र हुए साथ, 38 वोटर पर नजर


जयपुर. राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव को लेकर सोमवार को तस्वीर साफ हो गई. संगठन की ओर से दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की गई, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका. अब मंगलवार को होने वाले चुनाव में दो पैनल आमने-सामने हैं और दोनों ही अपने पक्ष में बहुमत होने का दावा कर रहे हैं. चुनाव में सत्ता और संगठन से जुड़े नेताओं के परिवारों की भी सीधी भागीदारी दिखाई दे रही है. चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींसर के बेटे धनंजय खींसर एक पैनल का नेतृत्व कर रहे हैं.

उनके साथ राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी और भाजपा विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव भी चुनाव मैदान में हैं. दूसरी ओर बुजकिशोर उपाध्याय के नेतृत्व वाला पैनल चुनाव लड़ रहा है. इस पैनल को भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम राठौड़ के नाम वापस लेने के बाद उनका समर्थन मिला है. सोमवार को नाम वापसी के बाद मुकाबला दो प्रमुख पैनलों के बीच सिमट गया. अब 38 मतदाता मंगलवार को आरसीए की नई टीम चुनेंगे.

छह पदों के लिए 11 उम्मीदवार मैदान में हैं

आरसीए चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, संयुक्त सचिव और कार्यकारी सदस्य के छह पदों पर चुनाव होना है. इन पदों के लिए कुल 11 उम्मीदवार मैदान में हैं. मंगलवार सुबह 11 बजे आरसीए की वार्षिक आम सभा यानी एजीएम होगी. इसके बाद सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक मतदान कराया जाएगा. मतदान पूरा होने के बाद मतगणना शुरू होगी. बुजकिशोर उपाध्याय पैनल में अध्यक्ष पद पर बुजकिशोर उपाध्याय, सचिव पद पर पियूष जैन, उपाध्यक्ष पद पर रतन सिंह, कोषाध्यक्ष पद पर विष्णु अग्रवाल, संयुक्त सचिव पद पर राजेश सारस्वत और कार्यकारी सदस्य पद पर अरिस्ट सिंघ मैदान में हैं. वहीं धनंजय खींसर पैनल में अध्यक्ष पद पर धनंजय खींसर, सचिव और उपाध्यक्ष पद पर मोहित यादव, कोषाध्यक्ष पद पर आशीष तिवाड़ी, संयुक्त सचिव पद पर विनोद सहारण और कार्यकारी सदस्य पद पर धर्मवीर सिंह शेखावत चुनाव लड़ रहे हैं. मोहित यादव दो पदों के लिए उम्मीदवार हैं.

पराक्रम राठौड़ ने नाम वापस लिया

चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम राठौड़ भी पहले मैदान में थे. हालांकि सोमवार को उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया और बुजकिशोर उपाध्याय पैनल को समर्थन देने की घोषणा की. पराक्रम राठौड़ ने दावा किया कि नामांकन के समय उनके पास 32 वोटों का समर्थन था. इसके बावजूद उन्होंने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए चुनाव से हटने का निर्णय लिया. उन्होंने कहा कि सरकार और पार्टी के खिलाफ जाकर काम करने की अनुमति नहीं होती, इसलिए उन्होंने नाम वापस लिया. इस के बाद चुनाव में समीकरण बदलने की चर्चा शुरू हो गई.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले- संगठन का दखल नहीं

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने साफ कहा कि संगठन की कोई दखलंदाजी नहीं है. उन्होंने कहा, “मैंने समझा था कि सभी एक होकर आगे बढ़ें, लेकिन यदि कोई चुनाव मैदान में डटा है तो इसमें क्या किया जा सकता है. आरसीए एक अलग संस्था है, इसलिए संगठन का इसमें कोई दखल नहीं रहता.” अब पूरे मामले पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की नजर है. हालांकि आरसीए की चुनाव प्रक्रिया में सरकार या भाजपा संगठन की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है.

होटल में वोटर्स की है किलाबंदी

सोमवार रात एक गुट की ओर से अजमेर रोड स्थित एक होटल में जिला सचिवों की बैठक और ठहरने की व्यवस्था की गई. सूत्रों के मुताबिक, करीब 14 जिला सचिव इस किलाबंदी में शामिल रहे. चुनाव से पहले दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थक मतदाताओं को साथ रखने में जुटे हुए हैं. आरसीए एडहॉक कमेटी के पूर्व कन्वीनर दीनदयाल कुमावत ने अध्यक्ष पद से अपना नाम वापस लेते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए. उनका आरोप है कि जिन जिलों के एजीएम ने समर्थन किया था, उन्हें मतदान का अधिकार दिया गया है. उन्होंने इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ने की बात भी कही है.

आज सामने आएगा चुनाव का नतीजा

आरसीए चुनाव न सिर्फ क्रिकेट प्रशासन का मुद्दा बन गया है, बल्कि सत्ता और संगठन के बीच प्रभाव की लड़ाई का प्रतीक भी बन चुका है. आरसीए चुनाव में दोनों पैनल अपनी-अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं. एक तरफ धनंजय खींसर के साथ मंत्री, सांसद और विधायक के बेटे चुनाव मैदान में हैं, वहीं दूसरी तरफ बुजकिशोर उपाध्याय पैनल को पराक्रम राठौड़ के समर्थन के साथ चुनावी मुकाबले में मजबूती मिली है. चुनाव प्रक्रिया पर उठे सवाल और दिल्ली तक पहुंचा मामला इस चुनाव को और दिलचस्प बना रहा है. संगठन की सुलह की कोशिशें नाकाम होने के बाद अब मैदान में सीधा मुकाबला तय हो चुका है. अब सभी की नजर मंगलवार को होने वाली एजीएम, मतदान और मतगणना पर है. 38 मतदाता छह पदों के लिए उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे. मतदान के बाद होने वाली मतगणना से ही आरसीए की नई टीम की तस्वीर साफ होगी. साथ ही चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों पर भी आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.



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