Food Grain wastage: मध्य प्रदेश में एक ओर बड़ी आबादी कुपोषण और खाद्य संकट से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर पिछले पांच वर्षों में सरकारी और निजी गोदामों में करीब 300 करोड़ रुपये का अनाज बर्बाद हो गया. सीएजी और मध्य प्रदेश के संबंधित विभागों की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 से 2026 के बीच करीब एक लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न नमी, बारिश, चूहों और उठाव में देरी के कारण खराब हुआ.
बर्बाद हुए अनाज में करीब 70% गेहूं और 20 प्रतिशत धान-चावल बताया गया है. इस अनाज की खरीद, ढुलाई और भंडारण पर सरकार ने 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए थे. वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन, एफसीआई और निजी भंडारण केंद्रों में अनाज की सुरक्षा और समय पर उठाव में लापरवाही को नुकसान की बड़ी वजह माना गया है.
सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं का हुआ
रायसेन, सीहोर, होशंगाबाद, सोहागपुर, औबेदुल्लागंज और विदिशा के गोदामों में करीब 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं खराब होने की बात सामने आई है. इसके अलावा बारिश और नमी के कारण करीब 21 हजार मीट्रिक टन धान बर्बाद हुआ. कीड़े और नमी से करीब 8,500 मीट्रिक टन दलहन भी खराब हुआ.
अगर यह अनाज सुरक्षित रहता, तो गरीब कल्याण योजना के तहत करीब दो करोड़ लोगों को एक महीने का राशन उपलब्ध कराया जा सकता था. वहीं, इससे करीब आठ लाख परिवारों को एक साल तक खाद्यान्न सहायता देने में मदद मिल सकती थी. बड़ी मात्रा में अनाज बचने से कुपोषित बच्चों और महिलाओं तक भी अतिरिक्त पोषण पहुंचाया जा सकता था.
पिछले पांच वर्षों में गेहूं की एमएसपी 1,975 रुपये से बढ़कर 2,425 रुपये प्रति क्विंटल हो गई. धान की एमएसपी 1,940 से बढ़कर 2,300 रुपये और दलहन की एमएसपी भी बढ़ी है. ऐसे में अनाज की बर्बादी से सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है.
वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल सुधारी के मुताबिक, उपार्जन से लेकर भंडारण तक अनाज की सुरक्षा के इंतजाम मजबूत किए गए हैं. जहां भी अनाज खराब होने के मामले सामने आए हैं, वहां जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.