Avocado Farming in Uttarakhand: पहाड़ों में खेती का तरीका अब धीरे-धीरे बदल रहा है. किसान पारंपरिक फसलों के साथ नए फल और दूसरी फसलें भी उगा रहे हैं. बागेश्वर में मंडलसेरा निवासी और पेशे से पर्वतारोही भुवन चौबे ने अपने घर पर एवोकाडो का पौधा तैयार किया है. उन्होंने एवोकाडो की गुठली से यह पौधा उगाया है, जिसे करीब तीन साल हो चुके हैं.
भुवन चौबे ने बताया कि उम्मीद है कि चौथे साल इस पौधे में फल आ सकता है. हालांकि, गुठली से तैयार पौधे में फल आने में कितना समय लगेगा और फल कैसा होगा, यह नहीं कहा जा सकता. उन्होंने बताया कि एवोकाडो का पौधा घर के बगीचे या खेत में लगाया जा सकता है. इसके लिए ऐसी मिट्टी जरूरी है, जहां पानी ज्यादा देर तक जमा न रहे. अगर पानी लगातार जड़ों के पास जमा रहेगा तो पौधे की जड़ खराब हो सकती है. पहाड़ी इलाकों में ऐसी जगह चुनना ठीक रहता है, जहां पानी आसानी से बाहर निकल जाए. पौधे को अच्छी धूप, जैविक खाद और जरूरत के हिसाब से पानी देना चाहिए. जिन जगहों पर बारिश ज्यादा होती है, वहां पानी की निकासी का इंतजाम करना और भी जरूरी है.
गुठली से पौधा या नर्सरी का पौधा
घर में लगाने के लिए एवोकाडो की गुठली से पौधा तैयार किया जा सकता है. लेकिन अगर किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती करना चाहते हैं तो अच्छी नर्सरी से अच्छी किस्म का ग्राफ्टेड पौधा लेना ज्यादा ठीक रहेगा. गुठली से तैयार पौधे में फल आने में ज्यादा समय लग सकता है और इससे मिलने वाला फल उसी फल जैसा हो, यह जरूरी नहीं है.
कमाई के लिए भी बन सकता है विकल्प
एवोकाडो की खेती पहाड़ों में किसानों के लिए कमाई का एक जरिया बन सकती है, लेकिन इससे तुरंत कमाई शुरू हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है. इससे होने वाली कमाई पौधे की उम्र, किस्म, मौसम, खेती में आने वाला खर्च, बाजार और बिक्री पर निर्भर करेगी. बाजार में एवोकाडो की कीमत आम फलों के मुकाबले ज्यादा दिखाई देती है. उदाहरण के तौर पर ऑनलाइन बाजार में इसकी कीमत करीब 249 से 338 रुपये प्रति किलो तक है, जबकि छोटे पैक में एक फल की कीमत अलग हो सकती है.
एवोकाडो खाने से शरीर को मिलते हैं ये फायदे
एवोकाडो में गुड फैट, फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फोलेट और विटामिन सी व के जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसे खाने से शरीर को अच्छी फैट और फाइबर मिलता है. फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है. बागेश्वर जैसे पहाड़ी इलाकों में एवोकाडो को पहले घर के स्तर पर लगाकर देखा जा सकता है. अगर पौधा वहां के मौसम और मिट्टी में अच्छी तरह बढ़ता है तो आगे बड़े स्तर पर इसकी खेती के बारे में सोचा जा सकता है. हालांकि किसानों को ज्यादा पौधे लगाने से पहले स्थानीय कृषि या उद्यान विशेषज्ञ से मिट्टी, मौसम और सही किस्म की जानकारी जरूर लेनी चाहिए.