Pitru Paksha: 3 तर्पण स्थल और 45 पिंड वेदियां, गयाजी में 1, 3, 5, 8 और 17 दिनों के श्राद्ध का क्या है महत्व?

Pitru Paksha: 3 तर्पण स्थल और 45 पिंड वेदियां, गयाजी में 1, 3, 5, 8 और 17 दिनों के श्राद्ध का क्या है महत्व?


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गयाजी विश्व का एकमात्र स्थान है जहां विष्णुजी स्वयं विराजमान हैं. यहां पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष मिलता है. गयाजी में 3 तर्पण स्थल और 45 पिंड वेदियां हैं. श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार 1, 3, 5, 8 और 17 दिनों का श्राद्ध कर सकते हैं. इससे 108 कुलों और सात पीढ़ियों का उद्धार होता है.

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गयाजीः गयाजी विश्व का एकमात्र ऐसी जगह है, जहां भगवान विष्णु स्वयं विराजमान है और यहां पिंडदान करने से पितरों को सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है. पितृपक्ष के दौरान यहां श्रद्धालु 17 दिवसीय, तीन दिवसीय और एक दिवसीय पिंडदान करते हैं. यहां 3 तर्पण स्थल एवं 45 पिंड वेदियां हैं. जहां पिंडदान का कार्यक्रम होता है. शास्त्रों में कहा गया है गया वो स्थान है जहां पिंडदान करने से 108 कुलों और आने वाली सात पीढ़ियों का उद्धार होता है.

बिहार के गयाजी में पिंडदान और श्राद्ध की परंपरा अत्यंत प्राचीन मानी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार गया में पिंडदान करने से पितरों को तृप्ति और सद्गति प्राप्त होती है. गया में पिंडदान के लिए एक ही निश्चित दिनों की बाध्यता सभी लोगों के लिए नहीं है. अलग-अलग परंपराओं और पुरोहितों द्वारा अलग-अलग विधियां बताई जाती हैं. सामान्य रूप से एक दिन, तीन दिन, पांच दिन, आठ दिन तथा 17 दिन विभिन्न वेदियों की विस्तृत पिंडदान-विधि का उल्लेख मिलता है.

क्या कहते हैं आचार्य जी?
इस संबंध में विष्णुपद क्षेत्र में स्थित मंत्रालय वैदिक पाठशाला के पंडित राजा आचार्य के अनुसार गयाजी में त्रैपाक्षिक श्राद्ध का नियम है. यहां तीन पक्ष यानि 45 दिन रहकर पिंडदान करने की भी परंपरा है. हालांकि समयाभाव के कारण 16-17 दिनों का श्राद्ध कार्य किया जा सकता है. 17 दिनों में विभिन्न पिंड वेदियों की विस्तृत विधि में श्रद्धालु विभिन्न वेदियों पर जाकर पितरों के लिए पिंड अर्पित करता है. इसका उद्देश्य केवल एक स्थान पर पूजा करना नहीं, बल्कि गया क्षेत्र के विभिन्न पवित्र तीर्थों पर श्राद्ध-विधि पूर्ण करना माना जाता है.

कुछ धार्मिक परंपराओं में 8 दिनों का गया श्राद्ध भी किया जाता है. इसमें गया क्षेत्र की अनेक महत्वपूर्ण वेदियों पर क्रमशः पिंडदान और तर्पण किया जाता है. 8 दिन का कार्यक्रम विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी हो सकता है जो विस्तृत विधि करना चाहते हैं. गया में तीन दिवसीय पिंडदान भी प्रचलित है. इसमें अलग-अलग दिनों में अलग-अलग वेदियों और तीर्थस्थलों पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है. तीन दिनों में विधि करने का उद्देश्य प्रमुख पिंडदान स्थलों को क्रम से शामिल करना होता है.

समय की कमी होने पर श्रद्धालु गया में एक दिन में भी पिंडदान कर सकते हैं. एक दिन की विधि में सामान्यतः प्रमुख पिंडदान स्थलों पर पूजा, तर्पण और पिंड अर्पण किया जाता है. इसमें विशेष रूप से विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी और अक्षयवट जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों का महत्व माना जाता है.



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