पटना. बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की आठ सीटों पर चुनाव से पहले जन सुराज को तिरहुत शिक्षक सीट पर अपना उम्मीदवार बदलना पड़ा है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पार्टी के पहले प्रत्याशी भूषण कुमार झा ने अचानक ही पार्टी छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. हालांकि, इसके बाद प्रशांत किशोर की पार्टी ने त्वरित निर्णय लेते हुए पूर्व सैनिक और शिक्षाविद् श्याम नंदन कुमार यादव को मैदान में उतारा है. श्याम नंदन यादव की पहचान सेना में सेवा, शिक्षा के क्षेत्र में काम और कारगिल युद्ध में शहीद हुए उनके छोटे भाई प्रमोद यादव से भी जुड़ी है.
भूषण झा के जाने के बाद श्याम नंदन यादव को टिकट
जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से श्याम नंदन यादव के नाम की घोषणा की है. भूषण झा ने पार्टी छोड़ने के साथ ही निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने की बात कही है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी बैठक में उनके भाषण की रिकॉर्डिंग रोकने की कोशिश हुई और उन पर पार्टी के मुताबिक बोलने का दबाव बनाया गया. उनके अनुसार, शिक्षक साथियों से बातचीत के बाद उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ने की सलाह मिली.
जन सुराज की ओर से भूषण कुमार झा पर ये आरोप
वहीं जन सुराज पार्टी का पक्ष अलग है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ ने कहा कि भूषण झा ने बैठक में कहा था कि शिक्षकों को क्या है, बस अपना पेट भरने से मतलब है. पार्टी के अनुसार शिक्षकों के बारे में ऐसी टिप्पणी अस्वीकार्य है. वरिष्ठ नेता रामबली चंद्रवंशी ने कहा कि उम्मीदवारों का चयन पारदर्शी है, लेकिन नेगेटिव फीडबैक पर बदलाव की गुंजाइश है. खैर इन राजनीतिक बदलावों के बीच अब चर्चा श्याम नंदन यादव की हो रही है जिन्होंने जन सुराज का स्कूल बैग (चुनाव चिन्ह) थामा है.
कौन हैं नए उम्मीदवार श्याम नंदन यादव?
वहीं, दूसरी ओर जन सुराज ने भूषण झा के पार्टी छोड़ते ही तुरंत निर्णय लिया श्याम नंदन कुमार यादव को अपना कैंडिडेट घोषित कर दिया. उनकी पेशेवर पहचान पूर्व सैनिक और शिक्षाविद् की है. श्याम नंदन मुजफ्फरपुर जिले के कुड़नी ब्लॉक से आते हैं और उनका व्यक्तित्व सैनिक और शिक्षा दोनों का संगम है. जानकारी के अनुसार, उन्होंने भारतीय सेना में 15 से 18 वर्षों तक सेवा की है और बिहार के एक सम्मानित सैनिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं. खास बात यह कि श्याम नंदन यादव के चार भाइयों में से तीन ने सेना में सेवा दी है.
कारगिल युद्ध में शहीद हुए छोटे भाई प्रमोद यादव
श्याम नंदन यादव के छोटे भाई प्रमोद यादव 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे. उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया था. परिवार शहीद प्रमोद यादव की स्मृति में शिक्षा और प्रशिक्षण से जुड़ी संस्थाएं संचालित करता है. इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ यादव की सार्वजनिक पहचान शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़ी रही है.
शिक्षक संगठनों और प्रशिक्षण संस्थानों से जुड़ाव
वर्तमान में वे डिग्री कॉलेज या शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान में प्राचार्य हैं. बिहार शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेजों के संघ के प्रदेश सचिव और पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन बिहार के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं. लगभग 15 वर्षों से ITI के माध्यम से युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने का काम कर रहे हैं. शहीद प्रमोद ग्रुप ऑफ एजुकेशन से निदेशक के रूप में जुड़े हैं. यहां यह भी बता दें कि जन सुराज में शामिल होने से पहले वे राजद से भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने कहा, मैं एमएलसी बनने के लिए नहीं, शिक्षकों की आवाज बनने के लिए चुनाव लड़ रहा हूं.
23 अक्टूबर को मतदान, आठ सीटों पर चुनाव
बता दें कि बिहार विधान परिषद की चार स्नातक क्षेत्रों-पटना, तिरहुत, कोसी, दरभंगा और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों-पटना, तिरहुत, सारण, दरभंगा की कुल आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है. चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी, 6 अक्टूबर तक नामांकन और 9 अक्टूबर तक नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी. मतदान सुबह 8 से शाम 4 बजे तक होगा और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी.