Last Updated:
Gold Price: आसमान छूती कीमतों ने भारतीय ग्राहकों के खरीदारी पैटर्न को पूरी तरह बदल दिया है. भारी-भरकम गहनों की जगह अब 18 कैरेट और 14 कैरेट हॉलमार्क ज्वेलरी तथा डायमंड-स्टडेड गहनों को तरजीह दी जा रही है.
पिछले एक साल में सोने की कीमत में बेतहाशा वृद्धि हुई है. (Photo : Canva)
नई दिल्ली. पिछले एक साल में सोने की कीमतों में आया करीब 60% के भारी-भरकम उछाल ने त्योहारी सीजन की खरीदारी पर ग्रहण लगा दिया है. आमतौर पर सितंबर के महीने में धनतेरस और दिवाली की एडवांस बुकिंग्स जोर पकड़ लेती हैं, लेकिन इस बार नजारा कुछ और ही है. सोने की रिटेल मांग में 8 से 10 फीसदी की गिरावट आई है. 24-कैरेट शुद्ध सोना पिछले साल करीब ₹98,000 प्रति 10 ग्राम था, जो इस साल बढ़कर ₹1.57 लाख प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया. फरवरी 2026 में अमेरिका-ईरान तनाव के चलते MCX पर सोना ₹1,61,700 प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक शिखर पर जा पहुंचा था. अगस्त में ₹1,57,750 के आसपास रहने के बाद 24 सितंबर 2026 तक इसमें करीब 4.85% का सुधार हुआ और यह ₹1,50,106 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया.
बोनान्जा पोर्टफोलियो के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के अनुसार, यदि त्योहारी सीजन तक कीमतें मौजूदा स्तर से थोड़ी और नरम होकर स्थिर हो जाती हैं, तो रुकी हुई खरीदारी वापस लौट सकती है. हालांकि, वजन के लिहाज से तेज उछाल की उम्मीद कम है. इस त्योहारी सीजन का सबसे बड़ा मंत्र ‘कम ग्राम, ज्यादा वैल्यू’ रहने वाला है. इसका मतलब यह है कि ग्राहक भले ही कम ग्राम सोना घर ले जाएं, लेकिन रिकॉर्ड कीमतों के चलते ज्वैलर्स का कुल बिलिंग टर्नओवर मजबूत दिखाई दे सकता है.
क्यों कम सोना खरीद रहे हैं ग्राहक
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में खुदरा बिक्री में सालाना आधार पर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. आईबीजेए के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता का कहना है कि वैश्विक तनाव, विशेषकर रूस-ईरान और अन्य भू-राजनीतिक टकरावों ने खरीदारों के मन में गहरा असमंजस पैदा कर दिया है. ग्राहकों को यह डर सता रहा है कि यदि वैश्विक तनाव और खिंचता है या समीकरण बदलते हैं, तो कीमतों में अचानक भारी गिरावट आ सकती है. जब तक युद्ध समाप्त नहीं होता और कीमतों की चाल एक स्थिर दायरे में नहीं आती, तब तक आम ग्राहक बड़े सौदे करने से हिचकिचाता रहेगा.
बदल गई खरीदारी की आदत
ऑगमोंट की चीफ रिसर्च ऑफिसर रेनिशा चैनानी के अनुसार, आसमान छूती कीमतों ने भारतीय ग्राहकों के खरीदारी पैटर्न को पूरी तरह बदल दिया है. भारी-भरकम गहनों की जगह अब 18 कैरेट और 14 कैरेट हॉलमार्क ज्वेलरी तथा डायमंड-स्टडेड गहनों को तरजीह दी जा रही है. ज्वैलर्स ग्राहकों को खींचने के लिए मेकिंग चार्ज पर भारी छूट और ‘पुराने सोने के बदले नया सोना’ जैसी योजनाएं पेश कर रहे हैं. इसके अलावा लोग फिजिकल सोने की बजाय गोल्ड ईटीएफ, गोल्ड बार और डिजिटल गोल्ड में ज्यादा निवेश कर रहे हैं.