29 या 30 सितंबर, विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी कब? उज्जैन के आचार्य से जानें सही तिथि और पूजा विधि

29 या 30 सितंबर, विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी कब? उज्जैन के आचार्य से जानें सही तिथि और पूजा विधि


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29 या 30 सितंबर, विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी कब? जानें सही तिथि और पूजा विधि

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Sankashti Chaturthi 2026: विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें और भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई कर बप्पा की प्रतिमा स्थापित करें. गणपति महाराज को जल, पुष्प, रोली, दूर्वा, अक्षत और फल अर्पित करें. उन्हें मोदक या लड्डू चढ़ाएं.

उज्जैन. हिंदू धर्म में विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष संयोग लेकर आ रहा है. इस बार संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ रही है, इसलिए इसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाएगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करने से संकट दूर होने और कर्ज से राहत मिलने की कामना की जाती है. आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को लेकर इस बार असमंजस की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में व्रत किस दिन रखा जाएगा और गणपति पूजन का शुभ समय क्या रहेगा, आइए जानते हैं उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज से.

वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि इस बार 29 सितंबर 2026 को शाम 5 बजकर 09 मिनट से शुरू होगी, जो 30 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 55 मिनट तक रहेगी. चतुर्थी तिथि की शुरुआत मंगलवार को हो रही है. मंगलवार के दिन पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. ऐसे में भगवान गणेश को समर्पित विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत 29 सितंबर को रखा जाएगा. इस दिन गणेशजी की विशेष पूजा की जाएगी.

विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
इस दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई कर गणपति की प्रतिमा स्थापित करें. भगवान गणेश को जल, दूर्वा, पुष्प, रोली, अक्षत और फल अर्पित करें. उन्हें मोदक या पसंदीदा भोग का प्रसाद चढ़ाएं. इसके बाद गणेश मंत्र का जाप कर गणेश चालीसा या स्तोत्र का पाठ करें. शाम को विधि-विधान से पूजा करें. चंद्रमा के दर्शन होने पर उन्हें अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें.

संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला देवता माना गया है. इसी कारण संकष्टी चतुर्थी का व्रत जीवन के संकटों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए रखा जाता है. विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी पर भक्त विधि-विधान से गणेशजी की पूजा-अर्चना कर परेशानियां दूर करने की प्रार्थना करते हैं. मंगलवार को पड़ने से इस बार की संकष्टी चतुर्थी का महत्व और बढ़ गया है. इसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है.



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