‘तुमसे नहीं हो पाएगा’ से CA बनने की कहानी, इंजीनियरिंग छोड़ अभिषेक ने लिखी सफलता की नई इबारत, कमाल है जर्नी

‘तुमसे नहीं हो पाएगा’ से CA बनने की कहानी, इंजीनियरिंग छोड़ अभिषेक ने लिखी सफलता की नई इबारत, कमाल है जर्नी


पटना: कभी इंजीनियर बनने का सपना था. विज्ञान विषय से पढ़ाई की और इंजीनियरिंग की तैयारी भी शुरू कर दी थी. सीए के बारे में जानकारी भी महज इतनी थी कि यह एक कठिन पेशा है. लेकिन दोस्तों की बातचीत सुनते-सुनते इस पेशे में दिलचस्पी बढ़ी. एक दिन दोस्त के साथ सीए फाउंडेशन में दाखिला कराने पहुंचे. यहीं से शुरू हुआ सीए बनने का सफर. बीच में लोगों के ताने और डेढ़ साल तक अस्पताल की बेड. यह कहानी है पटना में प्रैक्टिस कर रहे सीए अभिषेक मिश्रा की. जिन्होंने रास्ते में मिले मुश्किलों को अपने लक्ष्य के आगे छोटा कर दिया.

दोस्त के साथ गए थे दाखिला कराने, खुद भी बन गए सीए स्टूडेंट
लोकल 18 से बातचीत करते हुए सीए अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि इंटरमीडिएट में वह विज्ञान के छात्र थे. इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे थे. उस दौरान उनके कई दोस्त कॉमर्स बैकग्राउंड से थे. सीए को लेकर चर्चा करते रहते थे. यहीं से उनके मन में भी इस कोर्स को लेकर उत्सुकता पैदा हुई. एक दिन उनका एक दोस्त सीए फाउंडेशन में दाखिला लेने जा रहा था. अभिषेक भी उसके साथ चले गए. वहां शिक्षकों और सीए से बातचीत सुनी तो पहली बार उन्हें इस पेशे की थोड़ी डीटेल जानकारी मिली. इसके बाद उन्होंने घर पर चर्चा की. रिश्तेदारों और सीनियर्स से सलाह ली. लेकिन ज्यादातर लोगों ने उन्हें डराया ही.

‘बहुत मुश्किल है, शायद पूरा नहीं कर पाओगे’… लेकिन बात दिल में अटक गई
अभिषेक कहते हैं कि लोगों ने मुझे बताया कि सीए की पढ़ाई काफी कठिन है. इसमें बहुत मेहनत करनी पड़ती है. कई छात्र इसे पूरा नहीं कर पाते हैं. चूंकि मेरा एकेडमिक परफॉर्मेंस भी कोई बहुत शानदार नहीं रहा था, इसलिए कुछ लोगों ने यहां तक कह दिया कि तुम इसे पूरा नहीं कर पाओगे. यही बात मुझे रोकने के बजाय इस कोर्स को और समझने के लिए प्रेरित करने लगी. इसीलिए मैंने पुराने और अनुभवी सीए से बातचीत की. वहां से मुझे बिल्कुल अलग सलाह मिली. सीनियर्स से बातचीत में मुझे मालूम चला कि अगर ईमानदारी से पढ़ाई की जाए और लगातार मेहनत की जाए तो देरी हो सकती है, लेकिन लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. इस पॉज़िटिव सोच ने अभिषेक को आगे बढ़ने का हौसला दिया.

पहली परीक्षा में ही मिला बड़ा आत्मविश्वास
अभिषेक ने दोस्तों के साथ सीए फाउंडेशन की परीक्षा दी. नतीजा आया तो वह पास हो गए, जबकि उनके साथ परीक्षा देने वाले कई दोस्त सफल नहीं हो सके. यहीं उन्हें अपने साइंस बैकग्राउंड का एक फायदा महसूस हुआ. अभिषेक मानते हैं कि साइंस की पढ़ाई के दौरान डेवलप हुआ डिसिप्लिन और तैयारी का तरीका सीए की पढ़ाई में भी उनके काम आया. फाउंडेशन पास करने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने आगे की तैयारी शुरू कर दी.

दिल्ली पहुंचे, वहीं से पूरी पढ़ाई
सीए की आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें कई लोगों ने अलग-अलग शहरों का सुझाव दिया. किसी ने कोलकाता जाने को कहा कि किसी ने मुंबई तो किसी ने दिल्ली. आखिरकार उन्होंने दिल्ली जाने का फैसला किया. दिल्ली में उन्होंने आर्टिकलशिप शुरू की. वहीं से सीए इंटर की तैयारी भी की. कोचिंग, संस्थान की क्लासेज और अपनी पढ़ाई को जी जान से पूरा किया. लेकिन सफर इतना आसान नहीं था.

बीमारी ने रोक दी पढ़ाई, डेढ़-दो साल तक झेला संघर्ष
सीए इंटर की पढ़ाई के दौरान उनकी तबीयत काफी खराब हो गई. स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण उन्हें करीब डेढ़ साल तक अस्पताल की बेड पर पड़े रहना पड़ा. वे गंभीर बीमारी का शिकार हो गए. इससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हुई. इसके बावजूद भी वे अपने लक्ष्य से भटके नहीं. करीब डेढ़ से दो साल तक स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलों से जूझने के बाद उन्होंने दोबारा अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया.

डिग्री लेनी है तो लेनी है, लक्ष्य से नहीं हटे पीछे
अभिषेक के सफर में सबसे खास बात उनका लक्ष्य के प्रति लगातार बने रहना रहा. वह बताते हैं कि उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया. सोशल लाइफ भी सीमित हो गई थी. ज्यादातर समय पढ़ाई और जरूरी कामों में ही बीतता था. उनका मानना है कि शुरुआती दौर का संघर्ष इंसान को बहुत कुछ सिखाता है. मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति रवैया आगे की जिंदगी में भी काम आता है. स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और पढ़ाई में हुए विलंब के बावजूद उन्होंने पांच सालों में आखिरकार 2012 में सीए फाइनल की परीक्षा पास कर ली.

फाइनल के बाद नौकरी नहीं, खोली अपनी फर्म
सीए बनने के बाद अभिषेक ने कॉरपोरेट नौकरी करने के बजाय अपनी प्रैक्टिस शुरू करने का फैसला किया. उन्होंने अपनी फर्म शुरू की. जिसमें कुल पांच पार्टनर हैं. आज वह पटना में बतौर चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रैक्टिस कर रहे हैं. अपने पार्टनर्स के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. सिर्फ पटना ही नहीं कई शहरों में भी उनका फर्म एक्टिव है. आज अभिषेक मिश्रा की गिनती पटना के बेस्ट सीए के रूप में होती है.



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