कोरोना महामारी के दौरान दुनिया ने पहली बार mRNA वैक्सीन तकनीक का नाम सुना. उस समय कई लोगों के लिए यह सिर्फ एक नई वैज्ञानिक तकनीक थी. लेकिन अब यही तकनीक एक और बड़ी बीमारी के खिलाफ इस्तेमाल होने जा रही है. अमेरिकी फूड ऐंड ड्रग डिपार्टमेंट यानी FDA ने हाल ही में 50 साल और उससे ज्यादा उम्र वालों के लिए देश की पहली mRNA आधारित फ्लू वैक्सीन को मंजूरी दी है. हालांकि में अमेरिका में राजनीतिक कारणों के चलते इस वैक्सीन को अप्रूव होने के लिए काफी मुश्किलों से गुजरना पड़ा. पर इसके फायदों को देखते हुए, आखिरकार इसका रास्ता साफ हो ही गया है. इस वैक्सीन को Moderna नाम की कंपनी ने बनाया है, जिसका नाम mFlusiva है. वैज्ञानिकों की मानें तो ये सिर्फ एक नई वैक्सीन नहीं, बल्कि वैक्सीन-साइंस का अगला चरण है. पर आखिर वैज्ञानिक इस एक वैक्सीन से क्यों इतनी उम्मीदें लगा रहे हैं? आइए समझते हैं.
फ्लू आखिर इतना गंभीर क्यों है?
बहुत से लोग फ्लू को सामान्य सर्दी-जुकाम समझ लेते हैं. पर फ्लू की कहानी इतनी आसान नहीं है. अमेरिकी CDC के अनुसार हर साल फ्लू के कारण अमेरिका में लगभग 12,000 से 52,000 लोगों की मौत हो जाती है. लाखों लोग अस्पताल पहुंचते हैं और करोड़ों लोग संक्रमित होते हैं. भारत में भी फ्लू और अन्य सांस से फैलने वाले इंफेक्शन हर साल हजारों लोगों को प्रभावित करते हैं. राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) और स्वास्थ्य मंत्रालय समय-समय पर इन्फ्लुएंजा संक्रमण की निगरानी करते हैं, खासकर H1N1 जैसे स्ट्रेनों की. फ्लू से सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और पहले से बीमार लोगों को होता है. ऐसे में ये नई वैक्सीन नई उम्मीद जगाती है.
mRNA वैक्सीन क्या होती है?
अभी तक मौजूद फ्लू वैक्सीन में वायरस के कमजोर, निष्क्रिय या उसके कुछ हिस्सों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि शरीर उसे पहचानना सीख सके. लेकिन mRNA वैक्सीन अलग तरीके से काम करती है. यह शरीर में वायरस नहीं डालती. इसके बजाय यह शरीर की कोशिकाओं को एक संदेश (mRNA) देती है कि वे वायरस के एक खास प्रोटीन की नकल तैयार करें. जब शरीर उस प्रोटीन को देखता है, तो हमारा इम्यूनिटी सिस्टम उसके खिलाफ सुरक्षा तैयार कर लेता है. बाद में असली वायरस शरीर में प्रवेश करे तो शरीर पहले से तैयार रहता है.
असल में फ्लू वैक्सीन बनाने में सबसे बड़ी समस्या यही है. फ्लू वायरस बहुत तेजी से बदलता है. हर साल वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि आने वाले मौसम में कौन-सा फ्लू स्ट्रेन सबसे ज्यादा फैल सकता है. मौजूदा वैक्सीन तकनीक में यह फैसला लगभग फरवरी में लेना पड़ता है जबकि वैक्सीन लोगों तक कई महीने बाद पहुंचती है. समस्या यह है कि तब तक वायरस बदल भी सकता है. इसलिए हर बार कुछ सालों बाद फ्लू वैक्सनी का असर कम हो जाता है. mRNA तकनीक यहीं इस खेल को पूरा बदल देती है.
अभी तक बनते आए फ्लू वैक्सीन के लिए वायरस को अंडों या विशेष कोशिकाओं में विकसित किया जाता है, जो काफी समय लेता है. जबकि mRNA वैक्सीन तेजी से बनती हैं. यानी वैज्ञानिक वायरस के नए स्ट्रेन को अधिक समय तक मॉनिटर कर सकते हैं और वैक्सीन में अपेक्षाकृत अधिक सटीक स्ट्रेन शामिल कर सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में फ्लू वैक्सीन और अधिक प्रभावी बन सकती है.
Moderna के अध्ययन में 50 वर्ष से अधिक उम्र के 40,000 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया. कंपनी के आंकड़ों के अनुसार 2024-25 फ्लू सीजन में mFlusiva पारंपरिक फ्लू वैक्सीन की तुलना में लगभग 27% अधिक प्रभावी रही. यह एक महत्वपूर्ण अंतर माना जा रहा है क्योंकि फ्लू जैसी बीमारी में कुछ प्रतिशत की अतिरिक्त सुरक्षा भी हजारों अस्पताल भर्ती और मौतों को रोक सकती है.
पर क्या इसके साइड इफेक्ट हैं?
हर वैक्सीन की तरह इसके भी कुछ साइड इफेक्ट नजर आए हैं जैसे:
इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द
मांसपेशियों में दर्द
जोड़ों में दर्द
सिरदर्द
बुखार
ठंड लगना
बेचैनी होना
हालांकि इस वैक्सीन के ज्यादातार साइड इफेक्ट हल्के या मीडियम स्तर के थे और जल्द ही ठीक भी हो गए.
अमेरिकी FDA ने अभी इसे 50 से 64 वर्ष के लोगों के लिए सामान्य मंजूरी दी है. लेकिन 65 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र वालों के लिए इसे Accelerated Approval के तहत मंजूरी मिली है. इसका कारण यह है कि बुजुर्गों में पहले से बेहतर डोज वाली स्पेशल फ्लू वैक्सीन उपलब्ध हैं. FDA चाहता है कि Moderna अतिरिक्त अध्ययन करके साबित करे कि नई mRNA वैक्सीन वास्तव में बुजुर्गों में मौजूदा उन्नत वैक्सीन से बेहतर क्लिनिकल सुरक्षा देती है.
बुजुर्गों के लिए क्यों इतनी जरूरी है फ्लू वैक्सीन?
CDC के 2024-25 सीजन के आंकड़े बताते हैं कि फ्लू के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले 76.9% लोग 50 वर्ष से अधिक आयु के थे. फ्लू से हुई 70.6% मौतें 65 वर्ष से अधिक आयु वालों में हुईं. यानी बीमारी का सबसे बड़ा बोझ बुजुर्ग आबादी पर पड़ता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या फ्लू वैक्सीन लेने से फ्लू नहीं होगा? तो ऐसा नहीं है. फ्लू वैक्सीन का मुख्य उद्देश्य गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु के जोखिम को कम करना है. इस वैक्सीन के बाद फ्लू तो हो सकता है, पर उससे जुड़े जोखिम कम होंगे. विशेषज्ञ इसे ही वैक्सीन की सफलता मानते हैं.
अगर mRNA तकनीक फ्लू वायरस के बदलते स्वरूप के साथ बेहतर तालमेल बिठा पाती है, तो भविष्य में फ्लू से होने वाली गंभीर बीमारियों और मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है. mFlusiva की मंजूरी सिर्फ एक प्रोडक्ट लॉन्च नहीं है. यह इशारा है कि कोविड महामारी के दौरान विकसित mRNA तकनीक अब अन्य बीमारियों के खिलाफ भी उपयोगी साबित हो रही है.